क्रिसमस पर शिमला के क्राइस्ट चर्च में 35 साल बाद बजेगी ऐतिहासिक बेल

जीवन मंत्र डेस्क.शिमला के रिज मैदान परउतरी भारत का दूसरा सबसे पुराना चर्च बना है। ये ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्चअंग्रेजों के शासनकाल में बना था।स्थानीय लोगों के अनुसार ये चर्च 1857 में नियो गोथिक कला में बनाया गया था जो कि एंग्लीकेन ब्रिटिश कम्युनिटी के लिए बनाया गया था। हर साल यहां देश और विदेश से कई लोग क्रिसमस मनाने आते हैं। इस बार शिमला के इस चर्च में 35 साल बाद ऐतिहासिक बेल बजाई जाएगी। यहां के लोगों का मानना है कि ये 150 साल पुरानी बेल है और कई सालों से खराब पड़ी थी।

  • शिमला के रिटायर्ड मेकैनिकल इंजिनियर विक्टर डेन ने इस बेल को ठीक किया है।उनके अनुसार ये 35 साल से खराब थी और इसे ठीक करने में 20 दिन की कड़ी मेहनत लगी। इस बेल को ठीक करने मेंकुछ पार्ट्स यहीं बनवाए हैं और कुछ चंडीगढ़ से मंगवाएगए हैं। इस चर्च में बेल बजाकर लोगों को प्रार्थना और मास या सर्विस के बुलाया जाता था।
  • मेकैनिकल इंजिनियर डेन के अनुसार कई लोगों ने इस चर्च के आसपास बचपन बिताया है और इस बेल के साथ उनकी बहुत सी यादें भी जुड़ी हैं।इस बेल के बजने से कई लोग खुश होंगे। जो कि यादगार पल होगा।
  • 1857 में बनना शुरू हुआ था ये चर्च

शिमला के क्राइस्ट चर्च को कर्नल जेटी बोयलियो ने 1844 में डिजाइन किया था। इसका निर्माण करीब 13 साल बाद 1857 में शुरू किया गया। उस समय इसके निर्माण में करीब 40 से 50 हजार रुपये का खर्चा आया था। इस चर्च पर लगा पोर्च 1873 में जोड़ा गया। ये चर्च गोथिक कला में बनाया हुआ है। इसलिए इसमें अलग-अलग रंगों की कांच की खिड़कियां बनाई गई थीं।यह चर्च हर रविवार को खुला रहता है।

  • 158 साल पुरानी घड़ी

इस चर्च में पांच बड़ी खिड़कियां लगी हैं जो कीमती कांच से बनाई गई हैं। जो कि ईसाई धर्म के विश्वास, उम्मीद, परोपकार, धैर्य और विनम्रता का प्रतीक है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस चर्च पर लगी बड़ी घड़ी 1860 में कर्नल डमबेल्टन ने दान की थी।इसके बाद भले की इसकी घड़ी नहीं चल पाई लेकिन इससे इस चर्च की पहचान बनी हुई है।



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The historic bell will ring at Christ Church, Shimla after 35 years on Christmas


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