शनि और हनुमानजी के बीच हुआ था युद्ध, शनिवार को इन दोनों देवताओं की पूजा करने की परंपरा

जीवन मंत्र डेस्क। शनिवार को शनिदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस संबंध में ज्योतिष की मान्यता है कि शनिवार का कारक ग्रह शनि ही है। शनिदेव के साथ ही इस दिन हनुमानजी की पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। इस संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार प्राचीन समय में शनिदेव को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। जब उन्हें मालुम हुआ कि हनुमानजी भी बहुत शक्तिशाली हैं तो शनिदेव उनसे युद्ध करने पहुंच गए। शनिदेव ने हनुमानजी को ललकारा। उस समय वे अपने आराध्य प्रभु श्रीराम का ध्यान कर रहे थे। हनुमानजी ने शनि को लौट जाने के लिए कहा, लेकिन शनि युद्ध के लिए बार-बार उन्हें ललकार रहे थे। हनुमानजी भी क्रोधित हो गए और युद्ध के लिए तैयार हो गए। दोनों के बीच युद्ध शुरू हो गया।
हनुमानजी ने शनिदेव पर ऐसे प्रहार किए, जिनसे वे बच नहीं सके और घायल हो गए। इसके बाद शनि ने क्षमा याचना की। हनुमानजी ने क्षमा किया और घावों पर लगाने के लिए तेल दिया। तेल लगाते ही शनि के घाव ठीक हो और दर्द खत्म हो गया। शनि ने हनुमानजी से कहा अब जो भी भक्त आपकी पूजा करेंगे, उन्हें शनि के दोष का सामना नहीं करना पड़ेगा। तभी से शनि के साथ ही हनुमानजी की पूजा करने की परंपरा शुरू हो गई।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मनोकामनाओं के अनुसार हनुमानजी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने पर सकारात्मक फल जल्दी मिल सकते हैं। जानिए हनुमानजी के 6 स्वरूप और उनका महत्व...
  • दक्षिणामुखी हनुमान
हनुमानजी की जिस प्रतिमा जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है, वह हनुमानजी का दक्षिणमुखी स्वरूप है। दक्षिण दिशा काल यानी यमराज की दिशा मानी जाती है। हनुमानजी रुद्र यानी शिवजी के अवतार हैं, जो काल के नियंत्रक हैं। इसलिए दक्षिणामुखी हनुमान की पूजा करने पर मृत्यु भय और चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
  • उत्तरामुखी हनुमान
देवी-देवताओं की दिशा उत्तर मानी गई है। इसी दिशा में सभी देवी-देवताओं का वास है। हनुमानजी की जिस प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर है, वह हनुमानजी का उत्तरामुखी स्वरूप है। इस स्वरूप की पूजा करने पर सभी देवी-देवताओं की कृपा भी प्राप्त होती है। घर-परिवार में शुभ और मंगल वातावरण रहता है।
  • भक्त हनुमान
इस स्वरूप में हनुमानजी श्रीराम की भक्ति में लीन दिखाई देते हैं। जो लोग इस स्वरूप की पूजा करते हैं, उनकी एकाग्रता बढ़ती है। व्यक्ति का मन धर्म-कर्म में लगा रहता है।
  • सेवक हनुमान
इस स्वरूप में हनुमानजी श्रीराम की सेवा करते हुए दिखते हैं। इस स्वरूप की पूजा करने पर हमारे मन में सेवा करने का भाव जागता है। घर-परिवार के लिए समर्पण की भावना आती है। माता-पिता और वरिष्ठ लोगों की कृपा मिलती है।
  • वीर हनुमान
वीर हनुमान साहस, बल, पराक्रम और आत्मविश्वास का प्रतीक हैं। इस स्वरूप में हनुमानजी ने राक्षसों का संहार किया था। वीर हनुमान की पूजा से हमारा साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • सूर्यमुखी हनुमान
सूर्यदेव हनुमानजी के गुरु हैं। जिस तस्वीर में हनुमानजी सूर्य की उपासना कर रहे हैं या सूर्य की ओर देख रहे हैं, उस स्वरूप की पूजा करने पर हमारी एकाग्रता बढ़ती है। ज्ञान में बढ़ोतरी होती है। घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान मिलता है।

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