फाल्गुन मास में करनी चाहिए श्रीकृष्ण की पूजा, दक्षिणावर्ती शंक से चढ़ाएं बाल गोपाल को दूध

जीवन मंत्र डेस्क. सोमवार, 10 फरवरी से हिन्दी पंचांग का अंतिम माह फाल्गुन शुरू हो गया है। इस माह में महाशिवरात्रि (21 फरवरी) मनाई जाएगी और होलिका दहन (9 मार्च) होगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार फाल्गुन मास में श्रीकृष्ण के तीन स्वरूपों की पूजा की जाती है। ये तीन रूप हैं बालकृष्ण, राधा-कृष्ण और गुरु कृष्ण। जो लोग संतान का सुख चाहते हैं, उन्हें बाल कृष्ण की पूजा करनी चाहिए। सुख-समृद्धि चाहने वाले लोगों को राधा-कृष्ण का पूजन करना चाहिए और जो लोग ज्ञान पाना चाहते हैं, उन्हें गुरु कृष्ण की भक्ति करनी चाहिए। अधिकतर लोग श्रीकृष्ण का बाल स्परूप बाल गोपाल घर के मंदिर में रखते हैं। फाल्गुन मास में दक्षिणावर्ती शंख से बाल गोपाल का अभिषेक करना चाहिए। जानिए श्रीकृष्ण पूजा की सरल विधि...

> रोज सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद श्रीगणेश की पूजा करें। गणेशजी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाएं। चावल चढ़ाएं। गणेशजी के पूजन के बाद श्रीकृष्ण की पूजा शुरू करें।

> श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की मूर्ति को स्नान कराएं। पहले शुद्ध जल से फिर पंचामृत से और फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और कृं कृष्णाय नम: मंत्र बोलते हुए अभिषेक करें।

> भगवान को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। हार-फूल, फल मिठाई, जनेऊ, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, पान, दक्षिणा और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। तिलक करें। धूप-दीप जलाएं। तुलसी के पत्ते डालकर माखन-मिश्री का भोग लगाएं। कर्पूर जलाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें।

>पूजा में हुई अनजानी भूल के लिए क्षमा याचना करें। इसके बाद अन्य भक्तों को प्रसाद बांट दें और खुद भी प्रसाद ग्रहण करें।

> पूजा में ऊँ नमो भगवते गोविंदाय, ऊँ नमो भगवते नंदपुत्राय या ऊँ कृष्णाय गोविंदाय नमो नम: मंत्र का जाप भी कर सकते हैं।



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