परिधावी संवत् खत्म: इस संवत् में फैलते हैं कोरोनावायरस जैसे संक्रामक रोग, 25 मार्च से नव संवत् प्रमादी शुरू

जीवन मंत्र डेस्क. बुधवार, 25 मार्च से हिन्दू नव वर्ष 2077 शुरू हो रहा है। इसका नाम प्रमादी है। इससे पहले परिधावी नाम का संवत् था। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कोई संवत् करीब 60 साल में एक बार आता है। 1780, 1840, 1900, 1960 और 2019 में परिधावी संवत् था। इन सालों में जब-जब परिधावी संवत् आया है, तब-तब देश-दुनिया में कोरोनावायरस जैसेसंक्रामक रोग फैले हैं। 25 मार्च से नया संवत् प्रमादी शुरू होगा, इसके बाद से संक्रामक रोगों का असर कम हो सकता है। 25 मार्च से चैत्र मास की नवरात्रि शुरू होगी, जो कि 2 अप्रैल तक रहेगी। 25 मार्च को गुड़ी पड़वा भी मनाई जाएगी।

नव संवत् के स्वामी हैं अश्विनी कुमार

> देवताओं के वैद्य का नाम है अश्विनी कुमार। ये नव संवत् यानी प्रमादी संवत् के स्वामी हैं। 25 मार्च से शुरू होने वाले नव वर्ष के राजा बुध और मंत्री चंद्र रहेंगे। अश्विनी कुमार की वजह से संक्रामक रोगों की रोकथाम हो सकती है। इससे पहले परिधावी नाम का संवत् था। इसके स्वामी इंद्र और अग्नि थे। राजा शनि और सूर्य मंत्री थे। ये दोनों ही एक दूसरे के शत्रु हैं।

1780 के बाद से हर 60 साल में 1780, 1840, 1900, 1960 और 2019 ये संवत् आया है और जब-जब ये संवत् आया तब-तब पोलियो, दिमागी बुखार, हैजाजैसे संक्रामक रोग फैले। इस बार यानी 2019-20 में कोरोनावायरस फैला है। ये बीमारी फैलने की एक वजह शनि और सूर्य की शत्रुता भी है। संक्रामक बीमारियां तो पुराने समय से ही हैं, लेकिन परिधावी संवत् के समय ये बीमारियांमहामारी बनीऔर बहुत बड़े वर्ग को अपनी गिरफ्त में ले लिया। बाद में इन बीमारियों की दवाइयां बन गई और इन्हें काबू कर लिया गया, लेकिन इन्हें खत्म नहीं किया जा सका है।

> कोरोनावायरस भी पहले से ही है, लेकिन वर्तमान में इस बीमारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। जल्दी ही इसकी दवाइयां भी बन जाएंगी, जिससे रोगी ठीक हो जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी ये बीमारी पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाएगी।

चैत्र नवरात्रि में गुरु का राशि परिवर्तन

25 मार्च से चैत्र मास की नवरात्रि शुरू हो रही है। नौ दिवसीय दुर्गा पूजा महोत्सव 2 अप्रैल तक रहेगा। इस साल नवरात्रि के बीच में यानी 29 मार्च को गुरु ग्रह राशि बदलेगा। गुरु मकर राशि में प्रवेश करेगा। मकर राशि में गुरु नीच का हो जाएगा। इस राशि में पहले से ही मंगल उच्च का होकर और स्वराशि का शनि स्थित है।

भारत के लिए गुरु है शुभ

गुरु नीच का है, लेकिन भारत देश की राशि कर्क पर इस ग्रह की उच्च की दृष्टि होगी। इस वजह से 29 मार्च के बाद से कोरोना नामक संक्रामक रोग पर भारत के नियंत्रण के प्रयास सफल होने लगेंगे। शनि, मंगल, गुरु की युति 4 मई 2020 तक रहेगी। इसके बाद से ये रोग बहुत हद तक काबू हो जाएगा। तब तक शासन के नियमों को पालन करें। चिकित्सक की सलाह को नजरंदाज न करें।



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