यहां मंदिर की सीढ़ियों से आती है संगीत की आवाज, वैज्ञानिक भी नहीं कर पाए इन रहस्यों का पता

देशभर में बहुत से प्रसिद्ध मंदिर हैं और सभी मंदिरों की अपनी अलग खासियत है। लेकिन देश के कुछ मंदिर ऐसे हैं जो की बहुत ही रहस्यों से भरे हैं, इन मंदिरों के रहस्यों को सुलझाने के लिये कई प्रयास किये गये लेकिन इन्हें ना तो कोई वैज्ञानिक सुलझा पाया और ना ही पुरात्तव विभाग। इन मंदिरों को चमत्कारी माना जाता है। तो आइए जानते हैं भारत के उन मंदिरों के बारे में जिनके बारे में जानने के लिये सभी उत्सुक रहते हैं और इनके दर्शन पाकर लोग खुद को भग्यशाली मानते हैं...

 

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टिटलागढ़ शिव मंदिर, उड़ीसा

उड़ीसा राज्य का टिटलागढ़ क्षेत्र बहुत गर्म क्षेत्र माना जाता है। यहां एक कुम्हड़ा पहाड़ स्थापित है जिस पर एक अद्भुत शिव मंदिर स्थापित है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि मंदिर में गर्मी के मौसम का कोई असर नहीं पड़ता है, इस जगह को एसी से भी ज्‍यादा ठंडा माना जाता है। हैरानी का विषय यह है कि यहां प्रचंड गर्मी के चलते मंदिर परिसर के बाहर भक्‍तों के लिए 5 मिनट खड़ा होना भी दुश्‍वार होता है। लेकिन मंदिर के अंदर कदम रखते हैं एसी से भी ज्‍यादा ठंडी हवाओं का अहसास होने लगता है। हालांकि यह वातावरण केवल मंदिर परिसर तक ही रहता है। बाहर आते ही प्रचंड गर्मी परेशान करने लगती है। इसके पीछे क्‍या रहस्‍य है आज तक कोई नहीं जान पाया।

त्रिपुर सुंदरी मंदिर, बिहार

बिहार के बक्सर में 400 साल पुराना मां त्रिपुर सुंदरी मंदिर स्थापित है। इस मंदिर को लेकर मान्यताएं हैं की यहां मंदिर प्रांगण में प्रवेश करते ही व्यक्ति को अलग तरह की शक्तियों का आभास होने लगता है। इसके साथ ही मध्य रात्रि में मंदिर से आवाजें आती हैं, कहा जाता है ये आवाजें देवी प्रतिमाओं के बात करने की आवाजें हैं। मंदिर से आने वाली आवाजों पर पुरातत्‍व विभाग ने बहुत अध्ययन किया लेकिन फिर भी कोई सुराग नहीं मिला। अब तो पुरातत्‍व विज्ञानियों ने भी यही मान लिया कि मंदिर में कुछ शक्तियां जरुर हैं।

बज्रेश्‍वरी देवी मंदिर, कांगड़ा

कांगड़ा के बज्रेश्‍वरी देवी मंदिर में भैरव बाबा की अनोखी प्रतिमा है। यहां आसपास के क्षेत्रों में जैसे ही कोई परेशानी आनी वाली होती है तो भैरव बाबा की इस मूर्ति से आंसुओं का गिरना शुरू हो जाता है। स्‍थानीय नागरिक इसी से आने वाली समस्‍याओं का पता लगाते हैं। बता दें कि मंदिर में स्‍थापित यह प्रतिमा 5 हजार साल से भी ज्‍यादा पुरानी है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि जब भी उन्‍हें प्रतिमा से आंसू गिरते हुए दिखते हैं वह भक्‍तों के संकट काटने के लिए प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना शुरू कर देते हैं। हालांकि भैरव बाबा के इन आंसुओं के पीछे का रहस्‍य आज तक कोई भी नहीं जान पाया।

ऐरावतेश्‍वर मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु में ‘ऐरावतेश्‍वर मंदिर’ बेहद ही अद्भुत मंदिर है। मंदिर को लेकर मान्यताएं हैं की यहां की सीढ़ियों से संगीत की आवाज आती है और इस मंदिर की वास्तुशैली बहुत ही अद्भुत है। यहां सिर्फ तीन ही सीढ़ियां हैं। जिनपर जरा सा भी तेज पैर रखने पर संगीत की अलग-अलग ध्‍वनि सुनाई देने लगती है। लेकिन इस संगीत के पीछे क्‍या रहस्‍य है। इसपर से पर्दा नहीं उठ पाया है। यह मंदिर भोलेनाथ को समर्पित है। मंदिर की स्‍थापना को लेकर स्‍थानीय किवंदतियों के अनुसार यहां देवताओं के राजा इंद्र के सफेद हाथी ऐरावत ने शिव जी की पूजा की थी। इस वजह से इस मंदिर का नाम ऐरावतेश्‍वर मंदिर हो गया। बता दें कि यह मंदिर महान जीवंत चोल मंदिरों के रूप में जाना जाता है। साथ ही इसे यूनेस्‍को की ओर से वैश्विक धरोहर स्‍थल भी घोषित किया गया है।

गढ़मुक्‍तेश्‍वर महादेव मंदिर

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में स्थित गढ़मुक्तेश्वर महादेव मंदिर बहुत ही प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर के बारे में मान्यताएं हैं की यहां स्‍थापित शिवलिंग पर हर साल एक अंकुर उभरता है। जिसके फूटने पर भगवान शिव और अन्‍य देवी-देवताओं की आकृतियां निकलती हैं। इस अद्भुत चमत्कार के बारे में बहुत बार रिसर्च किया गया लेकिन फिर भी कोई शिवलिंग पर अंकुर का रहस्य नहीं समझ पाये। इतना ही नहीं मंदिर की सीढ़ियों पर अगर कोई पत्थर फेंकता है तो पानी में पत्थर के मारने जैसी ध्वनी सुनाई देती है।

 



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