ऋतुओं के संधिकाल में आती है नवरात्रि, इन दिनों में खान-पान की लापरवाही न करें

जीवन मंत्र डेस्क. बुधवार, 25 मार्च से देवी दुर्गा का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है। इन दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार बुधवार से ही विक्रम संवत् 2077 भी शुरू हो रहा है।एक वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। ये ऋतु परिवर्तन का समय रहता है। दो नवरात्रि सामान्य रहती हैं और दो गुप्त रहती हैं। चैत्र मास और आश्विन मास की सामान्य नवरात्रि मानी गई है। जबकि माघ और आषाढ़ मास में आने वाली नवरात्रि गुप्त होती हैं। इन दिनों में देवी साधना गुप्त रूप से की जाती हैं।

ठंड और गर्मी का संधिकाल

चैत्र नवरात्र से गर्मी का प्रभाव पूरी तरह से शुरू हो जाता है। ये ठंड और गर्मी का संधिकाल है। इस समय में मौसमी बीमारियां होने की संभावनाएं काफी अधिक रहती हैं। इसी वजह से नवरात्रि में व्रत रखने की परंपरा है, ताकि खानपान में लापरवाही न हो। इन दिनों मेंफलाहार लेने का महत्व है। फलों के रस का सेवन किया जाता है। ये हमारे शरीर के लाभदायक होते हैं। चैत्र नवरात्र को स्वास्थ्य नवरात्रि के नाम भी जाना जाता है। कुछ लोग इन दिनों में नीम की पत्तियों का सेवन भी करते हैं।

नवरात्रि में दान करने का है विशेष महत्व

देवी मां की पूजा का महापर्व है चैत्र नवरात्र। इन दिनों में देवी पूजा के साथ ही दान-पुण्य भी करना चाहिए। जरूरतमंद लोगों को भोजन और धन का दान करें। नवरात्रि में व्रत करने वाले लोगों को फल जैसे केले, आम, पपीता आदि का दान करें।

नवरात्रि में करें देवी मंत्र का जाप

नवरात्रि में विशेष रूप से देवी मां के मंत्रों का जप करना चाहिए। यदि आप चाहें तो दुर्गा शप्तसती का पाठ भी कर सकते हैं। देवी मां के पूजन में साफ-सफाई और पवित्रता का बहुत ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, मंत्र जाप में उच्चारण भी एकदम सही होना चाहिए। यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ब्राह्मण से मंत्र जप करवा सकते हैं।

देवी मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
Hindu Nav Varsh New Year 2020; Vikram Samvat 2077 Start Date, importance of chaitra navratri, devi mantra, navratri do's and don'ts


Comments