देवी दुर्गा को सभी देवताओं ने दी थीं अलग-अलग शक्तियां, पर्वतराज हिमालय ने दिया था सिंह

जीवन मंत्र डेस्क. अभी चैत्र मास की नवरात्रि चल रही है। ये पर्व 2 अप्रैल तक चलेगा। देवी भगवती ने अलग-अलग दैत्यों का वध करने के लिए कई अवतार लिए हैं। देवी ने महिषासुर का वध करने के लिए दुर्गा मां के रूप में अवतार लिया था। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार दुर्गा सप्तशती में देवी के अवतार के बारे में बताया गया है।

ये है दुर्गा अवतार की संक्षिप्त कथा

प्राचीन समय में महिषासुर नामत के असुर ने देवताओं को स्वर्ग के निकालकर वहां अपना अधिकार कर लिया था। इसके बाद सभी देवता शिवजी और विष्णुजी के पास पहुंचे। महिषासुर के आंतक से शिवजी और विष्णुजी क्रोधित हो गए। तब सभी देवताओं के मुख के तेज प्रकट हुआ जो नारी रूप में बदल गया।

शिव के तेज से देवी का मुख, यमराज के तेज से केश, विष्णु के तेज से भुजाएं, चंद्रमा के तेज से वक्षस्थल, सूर्य के तेज से पैरों की उंगलियां, कुबेर के तेज से नाक, प्रजापति के तेज से दांत, अग्नि के तेज से तीनों नेत्र, संध्या के तेज से भृकुटि और वायु के तेज से कानों की उत्पत्ति हुई।

सभी देवताओं ने दिए अलग-अलग शक्तियां

सभी देवताओं ने देवी को अपनी-अपनी शक्तियां दीं। शिवजी ने त्रिशूल भेंट में दिया। अग्निदेव ने अपनी शक्ति देवी को प्रदान की। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

वरुणदेव ने शंख, पवनदेव ने धनुष और बाण, देवराज इंद्र ने वज्र और घंटा, यमराज ने कालदंड भेंट किया।

प्रजापति दक्ष ने स्फटिक की माला, ब्रह्मादी ने कमंडल, सूर्यदेव ने अपना तेज प्रदान किया। समुद्रदेव ने आभूषण भेंट किए।

सरोवरों ने कभी न मुरझाने वाली माला, कुबेरदेव ने शहद से भरा पात्र, पर्वतराज हिमालय ने सवारी करने के लिए सिंह भेंट में दिया।

देवताओं से मिली इन शक्तियां से दुर्गाजी ने महिषासुर का वध कर दिया। महिषासुर का वध करने की वजह से ही देवी को महिषासुरमर्दिनी कहा जाता है।



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