13 अप्रैल से नया सौर वर्ष 1942 शुरू, इसी के आधार पर हाेती है ज्योतिषीय गणना

सूर्य के मीन से मेष राशि में प्रवेश होने से साेमवार काे शक संवत के नए वर्ष 1942 की शुरू होगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं.गणेश मिश्राने बताया कि शक संवत्सर सौर वर्ष होता है, जिसका चन्द्रमा की तिथियों से कोई सम्बन्ध नहीं होता है। सौर वर्ष की अवधि 364 दिन 6 घंटे 9 मिनट 10 सैकंड होती है। ज्योतिष में इस वर्ष का बहुत अधिक महत्व है। इस वर्ष के आधार पर ही ज्योतिषीय गणना भी की जाती है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के समय को ‘अब्दप’ (वर्ष-बीज) कहा जाता है। जिसकी शुरुआत 13 अप्रैल की रात से हो गई है।

सूर्य की परिक्रमा के आधार पर बदलाव

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसारसूर्य की परिक्रमा के आधार पर भी खगोल विज्ञान के कैलेंडर में बदलाव होता है। करीब 250 किमी प्रति सेकंड के आसपास घूमता है। इसी परिक्रमा के पूरे होने पर अगले कैलेंडर की शुरुआत होती है। सूर्य के प्रभाव से ही अलग-अलग खगोलिय घटनाएं और ऋतुओं में बदलाव भी होता है।

इस दिन की शुरुआत पर विभिन्न राज्याें में मनाते हैं त्याेहार

नए सौर वर्ष की शुरुआत के दिन देश के विभिन्न राज्यों में त्याेहार मनाए जाते हैं। सूर्य की मेष संक्राति के चलते केरल में नया वर्ष वैशाखादि होता है। मेष संक्रान्ति के बाद के सूर्योदय से मनाया जाता है। जबकि आसाम में माघ बिहु, पंजाब में वैशाखी, बंगाल में वैशाखादि आदि सहित देश के विभिन्न राज्यों में त्याेहार मनाए जाते हैं।



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New solar year 1942 starts from April 13, based on this astrological calculation is done


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