तिरुपति बालाजी का मंदिर बंद लेकिन अन्न प्रसाद जारी, रोज 1.40 लाख पैकेट भोजन जरूरतमंदों के लिए

आंध्र प्रदेश की तिरुमाला पहाड़ियों पर बसे श्री वैंकटेश तिरुपति बालाजी मंदिर जहां रोजाना 70 से 80 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, पिछले एक महीने से यहां सन्नाटा पसरा है। देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक तिरुपति में अभी कुछ पुजारी रोज की पारंपरिक पूजाएं और परंपराएं अबाध रूप से कर रहे हैं लेकिन मंदिर श्रद्धालुओं की कतारें नहीं हैं। कोरोना वायरस के चलते मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद हुए लेकिन यहां पर रोज हजारों लोगों के लिए बनने वाला अन्न प्रसादम् अभी भी वैसे ही चल रहा है। लॉकडाउन के कारण जिन गरीब लोगों को भोजन नहीं मिल पा रहा है, तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् (टीटीडी) ट्रस्ट ऐसे लोगों को भोजन उपलब्ध करा रहा है। इंसानों के साथ ही पशुओं के लिए भी भोजन की व्यवस्था की गई है।

केवल तिरुपति नहीं, आसपास के एक दर्जन जिलों में मंदिर से भोजन की व्यवस्था के लिए प्रशासन को पैसा दिया गया है। 13 जिलों के लिए 13 करोड़ रुपए ट्रस्ट ने स्वीकृत किए हैं, जो स्थानीय प्रशासन को दिए गए हैं। टीटीडी ने इसके लिए अलग से लगभग 13 करोड़ रुपए का बजट बनाया है। रोज सुबह और शाम भोजन के 70 हजार पैकेट बांटे जा रहे हैं। रोज भोजन के करीब 1 लाख 40 हजार पैकेट तैयार हो रहे हैं । 28 मार्च से लगातार रोज इतने पैकेट भोजन वितरीत किया जा रहा है। अभी तक 37लाख से ज्यादा पैकेट बांटे जा चुके हैं। मंदिर में 20 मार्च से श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद किया गया है। ट्रस्ट के एक्सिक्यूटिव ऑफिसर अनिलकुमार सिंघल के मुताबिक आंध्र प्रदेश के एक दर्जन जिलों में श्रीवारि अन्न प्रसादम् योजना के तहत भोजन वितरीत किया जा रहा है। ट्रस्ट की प्राथमिकता ऐसे भिक्षुकों और दिहाड़ी मजदूरों को भोजन उपलब्ध कराना है, जो लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में अन्य प्रदेशों से आए मजदूर भी शामिल हैं।

ऐसा पहली ही बार है कि पिछले 36 दिनों से तिरुपति मंदिर का प्रांगण सूना पड़ा हुआ है। आम दिनों में यहां रोजाना 70 से 80 हजार श्रद्धालुओं का जमघट होता है। बालाजी के दर्शन के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। 20 मार्च से यहां प्रवेश बंद है।
  • 2000 साल में पहली बार ऐसी स्थिति

मंदिर के 2000 साल के इतिहास में संभवतः पहली बार ही ऐसा मौका आया है, जब यहां इतने लंबे समय के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश ना हुआ हो। 128 साल पहले 1892 में दो दिन के लिए मंदिर बंद हुआ था। उसके पीछे क्या कारण था, ये रिकॉर्ड मंदिर के पास भी नहीं है। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए 20 मार्च से ही बंद है और अब 3 मई को लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही खुलने के आसार है। इतने लंबे समय तक कभी मंदिर बंद नहीं रहा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अन्न प्रसाद की व्यवस्था होती है, मंदिर में करीब रोज 70 हजार लोगों के लिए अन्न प्रसाद बनता है।

अन्न प्रसादम् के लिए दो शिफ्टों में करीब 750 कर्मचारी रोज काम कर रहे हैं। दो जगहों पर ये भोजन तैयार किया जा रहा है। एक शिफ्ट में 70 हजार पैकेट तैयार होते हैं।
  • 750 लोग कर रहे हैं काम

श्रीवारि अन्न प्रसादम् के लिए 750 कर्मचारी दो शिफ्ट में काम कर रहे हैं। एक शिफ्ट में 70 हजार पैकेट बनाए जा रहे हैं। सुबह 3 से 11 बजे तक और फिर दोपहर 1 से रात 8 बजे तक दो शिफ्ट में पैकेट बनाए जा रहे हैं। जिन्हें जरूरतमंदों, भिक्षुकों और मजदूरों में बांटा जा रहा है। पहले ये व्यवस्था 3 मई तक के लिए थी लेकिन 20 अप्रैल को मिलने वाली रियायतों को देखते हुए इसे 25 अप्रैल तक कर दिया गया है। 20 अप्रैल से कुछ निर्माण कार्य और आर्थिक गतिविधियां शुरू होने क संभावना है।

तिरुपति के स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाते तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम् ट्रस्ट के कर्मचारी।
  • इंसानों के साथ जानवरों के लिए भी

तिरुपति ट्रस्ट ने जरूरतमंद लोगों के साथ ही मवेशियों और स्ट्रीट डॉग्स के लिए भी भोजन की व्यवस्था जुटाई है। मवेशियों के लिए लगभग तीन टन भोजन सामग्री जुटाई है। वहीं तिरुपति के स्ट्रीट डॉग्स के लिए दो वक्त का भोजन जुटाया जा रहा है। ये व्यवस्था 1 अप्रैल से जारी है।



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Tirupati Balaji temple closed, but food offerings continue, 1.40 lakh packets of food per day for the needy


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