अक्षय तृतीया 2020 : कोरोना के दौर में करें ऐसे उपाय, जिनसे आपके घर में बने धन संपत्ति का अक्षय भंडार

अक्षय तृतीया/आखातीज अबूझ मुहूर्त माना गया है। यह पर्व वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन मनाया जाता है। इस दिन किया हुआ जप, तप, ज्ञान तथा दान अक्षय फल देने वाला होता है अतः इसे 'अक्षय तृतीया' कहते हैं। इस साल 2020 में ये पर्व 26
अप्रैल, 2020,रविवार को मनाया जाएगा।

वैसे तो अक्षय तृतीया पर पवित्र नदियों व समुंद्र में स्नान का काफी महत्व हैं, वहीं इस दिन कई आयोजन भी किए जाते हैं। लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन की स्थिति में ये सारे संस्कार पूरे होते हुए कम ही दिख रहे हैं। ऐसे में आज हम आपको वो उपाय बता रहे हैं, जिन्हें आप घर पर रहकर कर सकते हैं। ये उपाय जहां एक ओर आपको अक्षय फल देंगे, वहीं आपके घर के धन व संपत्ति के भंडार में भी वृद्धि करेंगे।

इस बार जहां तक स्नान की बात है तो आप अपने घर पर ही पानी में गंगा जल या स्वर्णजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।

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अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निपट कर तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं और इस मंत्र का जप करें- ॐ भास्कराय विग्रहे महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य: प्रचोदयात्

अक्षय तृतीया से प्रत्येक दिन इस प्रक्रिया को दोहराएं।मान्यता है कि ऐसा करने से आपका भाग्य चमक उठेगा। यदि यह उपाय सूर्योदय के एक घंटे के भीतर 7 बार किया जाए तो और भी शीघ्र फल देता है।

अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त : 05:50:24 से 12:18:17 तक
अवधि : 06 घंटे 27 मिनट

अक्षय तृतीया का मुहूर्त
1. वैशाख मास में शुक्लपक्ष की तृतीया अगर दिन के पूर्वाह्न (प्रथमार्ध) में हो तो उस दिन यह त्यौहार मनाया जाता है।
2. यदि तृतीया तिथि लगातार दो दिन पूर्वाह्न में रहे तो अगले दिन यह पर्व मनाया जाता है, हालाँकि कुछ लोगों का ऐसा भी मानना है कि यह पर्व अगले दिन तभी मनाया जायेगा जब यह तिथि सूर्योदय से तीन मुहूर्त तक या इससे अधिक समय तक रहे।
3. तृतीया तिथि में यदि सोमवार या बुधवार के साथ रोहिणी नक्षत्र भी पड़ जाए तो बहुत श्रेष्ठ माना जाता है।

अक्षय तृतीया व्रत...
अक्षय तृतीया दिन से सतयुग का आरंभ होता है इसलिए इसे युगादि तृतीया भी कहते हैं। यदि यह व्रत सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र में आए तो महाफलदायक माना जाता है।
यदि तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो श्रेष्ठ मानी जाती है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं, उनका बड़ा ही श्रेष्ठ फल मिलता है। यह व्रत दानप्रधान है। इस दिन अधिकाधिक दान देने का बड़ा माहात्म्य है।

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: व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें।

: घर की सफाई व नित्य कर्म से निवृत्त होकर पवित्र या शुद्ध जल से स्नान करें।

: घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

इस मंत्र से संकल्प करें -
ममाखिलपापक्षयपूर्वक सकल शुभ फल प्राप्तये
भगवत्प्रीतिकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये।

: संकल्प करके भगवान विष्णु को पंचामृत से स्नान कराएं।

: षोडशोपचार विधि से भगवान विष्णु का पूजन करें।

: भगवान विष्णु को सुगंधित पुष्पमाला पहनाएं।

: नैवेद्य में जौ या गेहूं का सत्तू, ककड़ी और चने की दाल अर्पण करें।

: अगर हो सके तो विष्णु सहस्रनाम का जप करें।

: अंत में तुलसी जल चढ़ाकर भक्तिपूर्वक आरती करें।

इस दिन सुख, शांति, सौभाग्य तथा समृद्धि हेतु इस दिन शिव-पार्वती और नर-नारायण के पूजन का विधान है। इस दिन श्रद्धा विश्वास के साथ व्रत रख जो प्राणी गंगा-जमुनादि तीर्थों में स्नान कर अपनी शक्तिनुसार देवस्थल व घर में ब्राह्मणों द्वारा यज्ञ, होम, देव-पितृ तर्पण, जप, दानादि शुभ कर्म करते हैं उन्हें उन्नत व अक्षय फल की प्राप्ति होती है। तृतीया तिथि मां गौरी की तिथि है, जो बल-बुद्धिवर्धक मानी गई है अत: सुखद गृहस्थ की कामना से जो भी विवाहित स्त्री-पुरुष इस दिन मां गौरी व संपूर्ण शिव परिवार की पूजा करते हैं उनके सौभाग्य में वृद्धि होती है।

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माना जाता है कि यदि अविवाहित इस दिन श्रद्धा-विश्वास से प्रभु शिव व माता गौरी को परिवार सहित शास्त्रीय विधि से पूजते हैं, तो उन्हें सफल व सुखद वैवाहिक सूत्र में जुड़ने का पवित्र अवसर मिलता है। वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन यानी अक्षय तृतीया में पूजा, जप-तप, दान, स्नानादि शुभ कार्यों का विशेष महत्व तथा फल रहेगा।

इस तिथि का जहां धार्मिक महत्व है वहीं यह तिथि व्यापारिक रौनक बढ़ाने वाली भी मानी गई है। इस दिन स्वर्णादि आभूषणों की खरीद-फरोख्त को बहुत ही शुभ माना जाता है जिससे आभूषण निर्माता व विक्रेता अपने प्रतिष्ठानों को बड़े ही सुन्दर ढंग से सजाते हैं। अक्षय तृतीया के दिन बाजारों की रौनक बढ़ जाती है।

अक्षय तृतीया सुख-शांति व सौभाग्य में निरंतर वृद्धि करने वाली है। इस परम शुभ अवसर का जैसा नाम वैसा काम भी है अर्थात 'अक्षय' जो कभी क्षय यानी नष्ट न हो, ऐसी युगादि तिथि में किए गए शुभ व धर्मकार्य वृद्धिदायक व अक्षय रहते हैं और जीवन के दुर्भाग्य का अंत होता है।

3 अचूक मंत्र : घर में ही रह कर करें इनका उपयोग...
अक्षय तृतीया पर लक्ष्मी प्राप्ति के लिए विशेष प्रयोग किए जा सकते हैं। इसके तहत लक्ष्मी यं‍त्र या श्रीयंत्र को चावल की ढेरी पर स्‍थापित कर उत्तराभिमुख हो कमल गट्टे की माला, गुलाबी आसन तथा नैवेद्य खीर का तथा गुलाब का इत्र, कमल या गुलाब पुष्प से पूजन कर निम्न मंत्र का यथाशक्ति जप करें। पश्चात सभी सामग्री यंत्र को छोड़कर पोटली बनाकर या गल्ले-तिजोरी में रख दें।

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मंत्र- 'ॐ श्रीं श्रियै नम:।।'

'ॐ कमल वासिन्यै श्रीं श्रियै नम:।।'

'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं श्रियै नम:।।'

अक्षय तृतीया का दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति के लिए बहुत महत्व रखता है। इस दिन मां लक्ष्मीजी का पूजन करना शुभ फलदायी माना जाता है। इसके पीछे यह मान्यता है कि इससे साल भर आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।

पौराणिक शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया यानी अखातीज को सर्वसिद्घ मुहूर्त माना गया है। अत: इस दिन मां लक्ष्मीजी की उपासना शाम के समय उत्तरमुखी होकर लाल आसान पर बैठकर की जाती है।

मां लक्ष्मी का अचूक मंत्र: ॐ अमृत लक्ष्म्यै नम:
: ॐ पहिनी पक्षनेत्री पक्षमना लक्ष्मी दाहिनी वाच्छा भूत-प्रेत सर्वशत्रु हारिणी दर्जन मोहिनी रिद्धि सिद्धि कुरु-कुरु-स्वाहा।
: ॐ विद्या लक्ष्म्यै नम:
: ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नम:

मान्यता के अनुसार इन मंत्रों से मां लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहती है। हर क्षेत्र में व्यापार में उन्नति होने के साथ-साथ एवं आर्थिक सफलता प्राप्त होती।

इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन दान को श्रेष्ठ माना गया है। चूंकि वैशाख मास में सूर्य की तेज धूप और गर्मी चारों ओर रहती है और यह आकुलता को बढ़ाती है तो इस तिथि पर शीतल जल, कलश, चावल, चना, दूध, दही आदि खाद्य पदार्थों सहित वस्त्राभूषणों का दान अक्षय व अमिट पुण्यकारी होता है।

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हर संकट से बचाएंगे ये उपाय....
- अक्षय तृतीया के दिन सोने चांदी की चीजें खरीदी जाती हैं। इससे बरकत आती है। अगर आप भी बरकत चाहते हैं इस दिन सोने या चांदी के लक्ष्मी की चरण पादुका लाकर घर में रखें और इसकी नियमित पूजा करें। क्योंकि जहां लक्ष्मी के चरण पड़ते हैं वहां अभाव नहीं रहता है।
- अक्षय तृतीया के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपडे में बांधकर पूजा स्थान में रखे इसमें देवी लक्ष्मी को आकर्षित करने की क्षमता होती है। इनका प्रयोग तंत्र मंत्र में भी होता है। देवी लक्ष्मी के समान ही कौड़ियां समुद्र से उत्पन्न हुई हैं।
- अक्षय तृतीया के दिन केसर और हल्दी से देवी लक्ष्मी की पूजा करने से आर्थिक परेशानियों में लाभ मिलता है।
- अक्षय तृतीया के दिन घर में पूजा स्थान में एकाक्षी नारियल स्थापित करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

- इस दिन स्वर्गीय आत्माओं की प्रसन्नता के लिए जल कलश, पंखा, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा आदि फल, शक्कर, घी आदि ब्राह्मण को दान करने चाहिए इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है।

14 तरह के दान, जो लाते हैं जीवन में चमत्कार...

अक्षय तृतीया के संबंध में माना जाता है कि जो लोग इस दिन अपने सौभाग्य को दूसरों के साथ बांटते हैं वे ईश्वर की असीम अनुकंपा पाते हैं। इस दिन दिए गए दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। सुख समृद्धि और सौभाग्य की कामना से इस दिन शिव-पार्वती और नर नारायण की पूजा का विधान है।

चूंकि तृतीया मां गौरी की तिथि है कि इस दिन गृहस्थ जीवन में सुख-शांति की कामना से की गई प्रार्थना तुरंत स्वीकार होती है। गृहस्थ जीवन को निष्कंटक रखने के लिए इस दिन उनकी पूजा की जाना चाहिए।

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इस दिन इन 14 तरह के दान का महत्व है....
इस बार कोरोना के चलते शायद घर से निकलना मुश्किल हो ऐसे में आप दान की वस्तुएं चाहें तो किसी के नाम पर निकाल कर घर में ही रख सकते हैं। और जब कोरोना के लॉकडाउन को हटाया जाए तब उनका दान कर सकते हैं, लेकिन इसमें एक बात का खास ध्यान रखें आपने जो भी चीज दान के लिए निकाली है, उसका किसी भी स्थिति में न तो स्वयं उपयोग करें, न ही इसे किसी अन्य कार्य में लगाएं। यानि उसे दान के लिए ही संभाल कर रखें।

अक्षय तृतीया के दिन यह 14 दान है महत्वपूर्ण : 1. गौ, 2. भूमि, 3 . तिल, 4. स्वर्ण, 5 . घी, 6. वस्त्र, 7. धान्य, 8. गुड़, 9. चांदी, 10. नमक, 11. शहद, 12. मटकी, 13 खरबूजा और 14. कन्या

अगली तृतीया तक इस दान के चमत्कार को आप स्वयं महसूस करेंगे। सुख, खुशी, प्रसन्नता, वैभव, शांति, स्नेह, पराक्रम, यश, सौभाग्य में आश्चर्यजनक श्रीवृद्धि होगी।

अक्षय तृतीया की खास बातें...
1. इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है।
2. इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं।

3. नर-नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।
4. वेद व्यास एवं श्रीगणेश द्वारा महाभारत ग्रंथ के लेखन का प्रारंभ।
5. महाभारत के युद्ध का समापन का दिन।

6. श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था।
7. द्वापर युग का समापन दिन।

8. माता गंगा का पृथ्वी में आगमन।

9. हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था।
10. ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव अर्थार्त उदीयमान।

11. वृंदावन के श्री बांकेबिहारीजी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढंके रहते हैं।

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अक्षय तृतीया, जानिए क्या करें इस दिन...

: इस दिन समुद्र या गंगा स्नान करना चाहिए।

: प्रातः पंखा, चावल, नमक, घी, शक्कर, साग, इमली, फल तथा वस्त्र तथा मटकी और खरबूजे का दान करके ब्राह्मणों को दक्षिणा भी देनी चाहिए।

: ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
: इस दिन सत्तू अवश्य खाना चाहिए।
: आज के दिन नवीन वस्त्र, शस्त्र, आभूषणादि बनवाना या धारण करना चाहिए।

: नवीन स्थान, संस्था, समाज आदि की स्थापना या उद्घाटन भी आज ही करना चाहिए।

अक्षय तृतीया व्रत व पूजन विधि
1. इस दिन व्रत करने वाले को चाहिए की वह सुबह स्नानादि से शुद्ध होकर पीले वस्त्र धारण करें।
2. अपने घर के मंदिर में विष्णु जी को गंगाजल से शुद्ध करके तुलसी, पीले फूलों की माला या पीले पुष्प अर्पित करें।
3. फिर धूप-अगरबत्ती, ज्योत जलाकर पीले आसन पर बैठकर विष्णु जी से सम्बंधित पाठ (विष्णु सहस्त्रनाम, विष्णु चालीसा) पढ़ने के बाद अंत में विष्णु जी की आरती पढ़ें।
4. साथ ही इस दिन विष्णु जी के नाम से गरीबों को खिलाना या दान देना अत्यंत पुण्य-फलदायी होता है।

नोट: अगर पूर्ण व्रत रखना संभव न हो तो पीला मीठा हलवा, केला, पीले मीठे चावल बनाकर खा सकते हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन नर-नारायण, परशुराम व हयग्रीव अवतार हुए थे। इसलिए मान्यतानुसार कुछ लोग नर-नारायण, परशुराम व हयग्रीव जी के लिए जौ या गेहूं का सत्तू, कोमल ककड़ी व भीगी चने की दाल भोग के रूप में अर्पित करते हैं।

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अक्षय तृतीया कथा...
हिन्दू पुराणों के अनुसार युधिष्ठिर ने भगवान श्री कृष्ण से अक्षय तृतीया का महत्व जानने के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की थी। तब भगवान श्री कृष्ण ने उनको बताया कि यह परम पुण्यमयी तिथि है। इस दिन दोपहर से पूर्व स्नान, जप, तप, होम (यज्ञ), स्वाध्याय, पितृ-तर्पण, और दानादि करने वाला व्यक्ति अक्षय पुण्यफल का भागी होता है।

प्राचीन काल में एक गरीब, सदाचारी तथा देवताओं में श्रद्धा रखने वाला वैश्य रहता था। वह गरीब होने के कारण बड़ा व्याकुल रहता था। उसे किसी ने इस व्रत को करने की सलाह दी। उसने इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान कर विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की व दान दिया। यही वैश्य अगले जन्म में कुशावती का राजा बना। अक्षय तृतीया को पूजा व दान के प्रभाव से वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना। यह सब अक्षय तृतीया का ही पुण्य प्रभाव था।

अक्षय तृतीया महत्व
1. अक्षय तृतीया का दिन साल के उन साढ़े तीन मुहूर्त में से एक है जो सबसे शुभ माने जाते हैं। इस दिन अधिकांश शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
2. इस दिन गंगा स्नान करने का भी बड़ा भारी माहात्म्य बताया गया है। जो मनुष्य इस दिन गंगा स्नान करता है, वह निश्चय ही सारे पापों से मुक्त हो जाता है।
3. इस दिन पितृ श्राद्ध करने का भी विधान है। जौ, गेहूँ, चने, सत्तू, दही-चावल, दूध से बने पदार्थ आदि सामग्री का दान अपने पितरों (पूर्वजों) के नाम से करके किसी ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।
4. इस दिन किसी तीर्थ स्थान पर अपने पितरों के नाम से श्राद्ध व तर्पण करना बहुत शुभ होता है।
5. कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सोना ख़रीदना इस दिन शुभ होता है।
6. इसी तिथि को परशुराम व हयग्रीव अवतार हुए थे।
7. त्रेतायुग का प्रांरभ भी इसी तिथि को हुआ था।
8. इस दिन श्री बद्रीनाथ जी के पट खुलते हैं।

इन्हीं सब कारणों से इस त्यौहार को बड़ा पवित्र और महान फल देने वाला बताया गया है।



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