नवसंवत्सर 2077 की पहली पूर्णमासी, चैत्र पूर्णिमा पर ऐसे करें भगवान विष्णु को प्रसन्न

हिन्दू-पंचांग के अनुसार हर महीने की शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन आकाश में चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है। पूर्णिमा का सनातनधर्मियों के जीवन में अपना एक अलग ही महत्व होता है। हर महीने में आने वाली पूर्णिमा को कोई न कोई व्रत या त्यौहार ज़रूर मनाया जाता है। ऐसे में इस बार यानि 2020 में चैत्र पूर्णिमा 08 अप्रैल 2020, बुधवार को होगी, इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव भी है।

चैत्र पूर्णिमा : 2020...
चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम के नाम से भी जाना जाता है। चूंकि चैत्र मास हिन्दू-वर्ष का प्रथम मास होता है इसलिए चैत्र पूर्णिमा का विशेष महत्व है, वहीं यह हिन्दू वर्ष की पहली पुर्णमासी कहलाती है। इस दिन भक्त भगवान सत्य नारायण की पूजा कर उनकी कृपा पाने के लिए भी पूर्णिमा का उपवास रखते हैं।

वहीं रात्रि के समय चंद्रमा की पूजा की जाती है। उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार चैत्र पूर्णिमा पर नदी, तीर्थ, सरोवर और पवित्र जलकुंड में स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

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पूर्णिमा : भविष्य पुराण
भविष्य पुराण के अनुसार पूर्णिमा के दिन किसी तीर्थ स्थान पर जा कर स्नान करने से सारे पाप मिट जाते हैं और यदि कोई तीर्थ-स्थल पर नहीं जा सकता तो उसे घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे मिला सकता है। पूर्णिमा के दिन पितरों का तर्पण (जल दान) करना भी बेहद शुभ माना गया है।

पूर्णिमा हिंदू-कैलेंडर की बहुत ही महत्वपूर्ण तिथि होती है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपने पूरे आकार में होता है। अलग-अलग जगहों पर पूर्णिमा को कई अलग तरह के नामों से जाना जाता है। कहीं इसे पौर्णिमी कहते हैं तो कहीं पूर्णमासी। हिन्दू-धर्म में इस दिन दान, धर्म के साथ-साथ व्रत करने की भी मान्यता है।

चैत्र पूर्णिमा व्रत मुहूर्त ...
अप्रैल 7, 2020 को 12:02:47 से पूर्णिमा आरम्भ
अप्रैल 8, 2020 को 08:06:17 पर पूर्णिमा समाप्त

चैत्र पूर्णिमा : हनुमान जन्मोत्सव और भगवान विष्णु की पूजा...
08 अप्रैल 2020, बुधवार के दिन पूर्णिमा होने के कारण भक्तों द्वारा भगवान विष्णु की पूजा और सत्यानारायण की कथा भी सुनी जाएगी। वहीं इस दिन हनुमान जी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त में हनुमान जी की पूजा करना अत्यंत शुभ है।

8 अप्रैल 2020 शुभ मुहूर्त...
अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
अमृत काल : 09:28 PM से 10:52 PM
सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:42 AM से 06:07 AM
रवि योग : कोई नहीं

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श्री हनुमान जी का जन्म...
मान्यता है कि चैत्र मास की पूर्णिमा को ही श्री राम भक्त हनुमान जी का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन विशेष रूप से उत्तर और मध्य भारत में हनुमान जयंती मनाई जाती है। हनुमान जयंती को लेकर कुछ मतभेद हैं। कुछ स्थानों पर हनुमान जयंती कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाई जाती है, तो कुछ जगह चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर। हालांकि धार्मिक ग्रन्थों में दोनों ही तिथियों का जिक्र मिलता है लेकिन इनके कारणों में भिन्नता है, इसलिए पहला जन्मदिवस है और दूसरा विजय अभिनंदन महोत्सव है।

इस दिन उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी पर लाल कपड़ा रखें। हनुमान जी के साथ श्री राम जी के चित्र की स्थापना करें। हनुमान जी को लाल और राम जी कको पीले फूल अर्पित करें।
लड्डुओं के साथ-साथ तुलसी दल भी अर्पित करें। पहले श्री राम के मंत्र 'राम रामाय नमः' का जाप करें।

फिर हनुमान जी के मंत्र 'ॐ हं हनुमते नमः' का जाप करें। इसके अलावा हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए तिल के तेल में नारंगी सिंदूर घोलकर चढ़ाएं। वहीं हनुमान जी को चमेली की खुश्बू या तेल और लाल फूल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। हनुमान जी को अर्पित करने वाले प्रसाद का भी ध्यान रखें। जो भी प्रसाद तैयार करें वो स्नान करके पूरी तरह से शु्द्ध हो। प्रसाद भी शुद्ध साम्रगी से तैयार करें।

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पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा की पूजा की जाती है। हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होने की वजह से पूर्णिमा के दिन कई लोग भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा आदि भी रखते हैं। कहा जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को हर तरह के सुख और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। पूर्णिमा के दिन पूर्वजों को भी याद किए जाने का रिवाज है।

ज्योतिष में महत्व...
पूर्णिमा तिथि को ज्योतिष शास्त्र में भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्णिमा के दिन ही महान आत्माओं के जन्म उत्सव से लेकर बड़े-बड़े त्यौहार मनाए जाते हैं। यह तिथि हिन्दू धर्म में बहुत ज्यादा मायने रखती है। वैदिक ज्योतिष तथा प्राचीन शास्त्रों मत में चन्द्रमा को मन का कारक माना गया है। इसीलिए चन्द्रमा के अपने पूरे रूप में होने की वजह से उसका असर सीधे जातक के मन पर पड़ता है।

पूर्णिमा पर पूजा और व्रत की विधि
इस दिन प्रातः काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करना चाहिए। अगर संभव हो तो अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिला लें, मान्यता है कि ऐसा करने से आपको भूतकाल में किए गए सारे पापों से छुटकारा मिल जाता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पूर्णिमा वाले दिन भगवान विष्णु और शिव की पूजा करने का विशेष विधान है। कई सारे श्रद्धालु बिना कुछ खाए-पिए उपवास रखते हैं। उपवास का समय सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्र दर्शन के साथ समाप्त होता है।

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माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति पूरे विश्वास और श्रद्धा से इस व्रत को करता है तो वह इसी जन्म में मोक्ष प्राप्ति कर सकता है।

चैत्र पूर्णिमा पर स्नान, दान, हवन, व्रत और जप किये जाते हैं। इस दिन भगवान सत्य नारायण का पूजन करें और गरीब व्यक्तियों को दान देना चाहिए। चैत्र पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि इस प्रकार है-

1. चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, जलाशय, कुआं या बावड़ी में स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए।
2. स्नान के पश्चात व्रत का संकल्प लेकर भगवान सत्य नारायण की पूजा करनी चाहिए।
3. रात्रि में विधि पूर्वक चंद्र देव का पूजन करने के बाद उन्हें जल अर्पण करना चाहिए।
4. पूजन के बाद व्रती को कच्चे अन्न से भरा हुआ घड़ा किसी ज़रुरतमंद व्यक्ति को दान करना चाहिए।


चैत्र पूर्णिमा का महत्व
चैत्र पूर्णिमा को चैती पूनम भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज में रास उत्सव रचाया था, जिसे महारास के नाम से जाना जाता है। इस महारास में हजारों गोपियों ने भाग लिया था और प्रत्येक गोपी के साथ भगवान श्रीकृष्ण रातभर नाचे थे। उन्होंने यह कार्य अपनी योगमाया के द्वारा किया था।



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