22 अप्रैल को रेवती नक्षत्र में मनाई जाएगी वैशाख अमावस्या, इसे पितृ अमावस्या भी कहते हैं

वैशाख माह की अमावस्या को पितृ अमावस्या भी कहा जाता है। इसलिए इस दिन पितृ पूजा का विशेष महत्व रहेगा। वहीं भगवान विष्णु का प्रिय महीना होने से इस तिथि पर स्नान और दान करने से पाप खत्म हो जाते हैं। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार22 अप्रैल को वैशाख अमावस्या रेवती नक्षत्र में शुरू होगी। इस नक्षत्र का स्वामी बुध है। इस दिन बुधवार भी होने से बुध ग्रह का विशेष प्रभाव रहेगा। वहीं मीन राशि में बुध और चंद्रमा की युति भी बन रही है। इस कारण अमावस्या तिथि पर पितृ शांति और रोगनाश के लिए किए गए दान एवं पूजा का विशेष फल प्राप्त होगा।

अमावस्या कब से कब तक
22 अप्रैल को सुबह करीब 5:25 से वैशाख मास की अमावस्या तिथि प्रारंभ होगी। जो कि पूरे दिन और रात तक रहने के बाद 23 अप्रैल गुरुवार को सुबह लगभग 8 बजे समाप्त होगी। ऐसी स्थिति में बुधवार को ही स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करना चाहिए। पंचांग भेद के कारण देश के कुछ हिस्सों में ये पर्व 23 अप्रैल गुरुवार को भी मनाया जाएगा।

अमावस्या पर स्नान-दान और व्रत की विधि
वैशाख अमावस्या के दौरान स्नान-दान का अत्यधिक महत्व होता है। इस दौरान नदियों में नहाना श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन लॉक डाउन के कारण नदियों में नहाना संभव नहीं हो सकेगा। इसलिए अपने घर में ही वैशाख अमावस्या का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है। ज्योतिषाचार्य पं. मिश्रा के अनुसार इसके लिए प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठें। दैनिक क्रिया से निवृत्त होकर अपने नहाने के जल में नर्मदा, गंगा आदि किसी भी पवित्र नदी का जल मिला लें। साथ में थोड़े से तिल भी डाल लें। इस जल से स्नान करते हुए 7 पवित्र नदियों, गंगा, युमना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी को प्रणाम करें। महामारी या विपरित परिस्थितियों के दौरान ऐसा करने से तीर्थ स्नान का फल मिलता है।



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Vaishakh Amavasya will be celebrated on April 22 in Revathi Nakshatra, also called Pitru Amavasya.


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