30 अप्रैल को गंगा सप्तमी और चित्रगुप्त प्राकट्य उत्सव, इस दिन स्नान और पूजा का है  विशेष महत्व

30 अप्रैल गुरुवार को वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की सप्तमी तिथि है। इसे गंगा सप्तमी और चित्रगुप्त प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार इस पर्व पर गंगा तीर्थ स्नान और भगवान चित्रगुप्त की पूजा का विशेष महत्व है। लेकिन कोरोना महामारी के कारण घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करना चाहिए और घर पर ही भगवान चित्रगुप्त की विशेष पूजा करनी चाहिए।

गंगा सप्तमी

पं. मिश्रा के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को गंगा सप्तमी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि गंगा की उत्पत्ति इसी दिन हुई थी। धर्म ग्रंथों के अनुसार जब कपिल मुनि के श्राप से सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हजार पुत्र भस्म हो गए तब उनके उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर माता गंगा को प्रसन्न किया और धरती पर लेकर आए। गंगा के स्पर्श से ही सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार हो सका। गंगा को मोक्षदायिनी कहा जाता है।

चित्रगुप्त प्राकट्य दिवस

  • ग्रंथों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर यमराज के सहयोगी चित्रगुप्त प्रकट हुए थे।चित्रगुप्तयमलोक में न्यायालय के लेखक माने गए हैं। एक बार जब ब्रह्मा जी ध्यान लगा रहे थे तब उनके अंग से कई रंगों से चित्रित लेखनी लिए एक पुरुष उत्पन्न हुआ। इन्हीं का नाम चित्रगुप्त था। ब्रह्माजी की काया से उत्पन्न होने के कारण इन्हें कायस्थ भी कहा जाता है।
  • चित्रगुप्त ने ब्रह्माजी से अपने कार्य के संबंध में पूछा तो उन्होंने बताया कि आपका काम यमलोक में मनुष्यों के पाप और पुण्य का लेखा तैयार करना है। उसी समय से ये यमलोक में पाप और पुण्य की गणना करते हैं। अम्बष्ट, माथुर तथा गौड़ आदि इनके बारह पुत्र हुए।


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