अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु के साथ ही लक्ष्मीजी का भी करें अभिषेक, देवी को चढ़ाएं इत्र

रविवार, 26 अप्रैल को अक्षय तृतीया है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की विशेष पूजा की जाती है। घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना से विष्णुजी के साथ ही लक्ष्मीजी की भी पूजा जरूर करनी चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए लक्ष्मी पूजा की सरल विधि...

श्री लक्ष्मी पूजन की सरल विधि 10 स्टेप्स में

अक्षय तृतीया पर स्नान के बाद घर के मंदिर में ही लक्ष्मी पूजन की व्यवस्था करें। पूजा शुरू करने से पहले गणेशजी का पूजन करें। भगवान गणेश को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, चावल चढ़ाएं।

गणेशजी के बाद देवी लक्ष्मी की पूजा शुरू करें। माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान विष्णु की चांदी, पारद या स्फटिक की प्रतिमा का पूजन कर सकते हैं।

देवी-देवताओं की मूर्ति अपने पूजा घर में स्थापित करें। मूर्ति में माता लक्ष्मी आवाहन करें। आवाहन यानी माता लक्ष्मी को आमंत्रित करें। लक्ष्मी को अपने घर बुलाएं।

माता लक्ष्मी को अपने घर में सम्मान सहित स्थान दें। यानी आसन दें। ये भावनात्मक रूप से करना चाहिए। माता लक्ष्मी को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से कराना चाहिए।

माता लक्ष्मी को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। सुगंधित इत्र अर्पित करें। प्रसाद चढ़ाएं। कुमकुम से तिलक करें। अब धूप और दीप जलाएं। माता लक्ष्मी को गुलाब और कमल के फूल विशेष प्रिय है। ये फूल चढ़ाएं। चावल अर्पित करें। घी या तेल का दीपक जलाएं। आरती करें। परिक्रमा करें। महालक्ष्मी पूजन में ऊँ महालक्ष्मयै नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।



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