ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र हैं परशुराम, गणेशजी ने उन्हें रोक दिया था शिवजी के दर्शन करने से

रविवार, 26 अप्रैल को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। इस तिथि पर भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का जन्म हुआ था। ऋषि जमदग्नि और रेणुका परशुराम के माता-पिता थे। इनके तीन बड़े भाई थे, जिनके नाम रुक्मवान, सुषेणवसु और विश्वावसु था। परशुराम अष्टचिरंजीवियों में से एक माने गए हैं। परशुराम का त्रेतायुग में और द्वापरयुग में भी जिक्र मिलता है। जानिए परशुराम से जुड़ी प्रचलित कथाएं...

कथा 1.

एक कथा के अनुसार एक दिन परशुराम शिवजी के दर्शन करने के लिए कैलाश पर्वत पहुंचे। उस समय शिवजी ध्यान में बैठे थे। तब गणेशजी ने परशुरामजी को शिवजी से मिलने से रोक दिया। इससे क्रोधित होकर परशुराम ने फरसे से श्रीगणेश पर वार कर दिया। ये फरसा स्वयं भगवान शिव ने दिया था। श्रीगणेश उस फरसे का वार खाली नहीं जाने देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने फरसे का वार अपने दांत पर झेल लिया। इस प्रहार से गणेशजी का एक दांत टूट गया। तभी से गणेशजी को एकदंत कहा जाता है।

कथा 2.

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार एक बार महिष्मती देश का राजा था कार्तवीर्य अर्जुन। कार्तवीर्य अर्जुन एक युद्ध जीतकर जमग्नि मुनि के आश्रम के पास से निकला। तब वह आश्रम में विश्राम करने के लिए रुक गया। राजा ने आश्रम में कामधेनु देखी। कामधेनु ने अपनी दिव्य शक्तियों से कार्तवीर्य अर्जुन की पूरी सेना को भोजन करा दिया। इसके बाद राजा कामधेनु के बछड़े को अपने साथ बलपूर्वक ले गया। जब यह बात परशुराम को पता चली तो उन्होंने कार्तवीर्य अर्जुन की एक हजार भुजाएं काट दी और उसका वध कर दिया।

कार्तवीर्य अर्जुन के वध का बदला लेने के लिए उसके पुत्रों ने जमदग्नि मुनि का वध कर दिया। इससे क्रोधित होकर परशुराम ने कार्तवीर्य अर्जुन के सभी पुत्रों का वध कर दिया। जिन क्षत्रिय राजाओं ने उनका साथ दिया था, परशुराम ने उनका भी वध कर दिया। इस प्रकार परशुराम ने 21 बार धरती को क्षत्रिय विहिन कर दिया था।

कथा 3.

एक दिन परशुराम की माता रेणुका स्नान करने गई, जिस समय वह स्नान करके आश्रम को लौट रही थीं, उन्होंने राजा चित्ररथ को जलविहार करते देखा। यह देखकर उनका मन विचलित हो गया। इस अवस्था में जब उन्होंने आश्रम में प्रवेश किया तो महर्षि जमदग्नि ने ये बात जान ली। तभी वहां परशुराम के बड़े भाई रुक्मवान, सुषेणु, वसु और विश्वावसु भी आ गए। महर्षि जमदग्नि ने उन सभी से बारी-बारी अपनी मां का वध करने को कहा लेकिन माता से मोह की वजह से किसी ने ऐसा नहीं किया। तब मुनि ने उन्हें शाप दे दिया और उनकी विचार शक्ति नष्ट हो गई।

परशुराम वहां पहुंच तो उन्होंने पिता के आदेश पर तुरंत अपनी मां का वध कर दिया। ये देखकर महर्षि जमदग्नि बहुत प्रसन्न हुए और परशुराम को वर मांगने के लिए कहा। तब परशुराम ने अपने पिता से माता रेणुका को पुनर्जीवित करने और चारों भाइयों को ठीक करने का वरदान मांगा। साथ ही, ये बात किसी को याद न रहने और अजेय होने का वर भी मांगा। महर्षि जमदग्नि ने उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी कर दीं।



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