गुरु अंगददेव की जन्मतिथि आज, वैशाख माह की पंचमी तिथि पर हुआ था उनका जन्म

सिख समुदाय के द्वितीय सत-गुरु अंगद देव जी का जन्म पांच बैसाख संवत 1561 को गाव मत्ते की सराय जिला फिरोजपुर में हुआ था। अंगद देव जी को लहना नाम से भी जाना जाता है। गुरु अंगद देव जी के जन्मोत्सव को अंगद देव जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार उनकी जन्म तिथि 12 अप्रैल को मनाई जाएगी।

  • इस अवसर पर गुरुद्वारों में भव्य कार्यक्रम सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ किया जाता है। माना जाता है कि गुरु अंगददेव जी ने गुरुमुखी यानी पंजाबी लिपिका आविष्कार किया। साथ ही गुरु नानकदेव की वाणी को लेखों के रूप में संजोए रखा। जात-पात से हटकर गुरु अंगद जी ने ही लंगर की प्रथा चलाई।

7 परीक्षाओं को पार कर बने गुरु

  1. गुरु नानक देव ने अपने दोनों पुत्रों को छोड़कर अंगद देव को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था। गुरु अंगद देव ने गुरु नानक देव की उन सात परीक्षाओं का सामना किया।
  2. गुरु नानक देव ने उनकी पहली परीक्षा कीचड़ के ढेर से लथपथ घास फूस की गठरी अपने सिर पर रखवा कर ली थी।
  3. दूसरी परीक्षा उनकी तब हुई जब गुरु नानक देव ने उन्हें धर्मशाला से उठाकर मरी हुई चुहिया बाहर फेंकने को कहा।
  4. इसी तरह गुरु नानक ने उन्हें सर्दी के मौसम में मध्य रात्रि को धर्मशाला की टूटी दीवार बनाने की हुक्म दिया तो उन्होंने रात में ही दीवार खड़ी कर दी।
  5. फिर एक बार गुरुजी उन्हें लेकर शमशान पर गए। वहां एक कपड़े में लिपटा हुआ मुर्दा पड़ा हुआ था। गुरु नानक जी ने लहना से कहा कि तुम्हें उसे खाना है तो लहना सहर्ष तैयार हो गए।
  6. गुरु नानक देव ने उन्हे अपने गले से लगाकर कहा कि अब तेरे और मेरे में कोई अन्तर नहीं रहा। आज से तुम अंग हुए मेरे अंगद। तभी से उनका नाम अंगद देव हो गया जो सिख पंथ के दूसरे गुरु कहलाए।


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Today was the birth date of Guru Angaddev, he was born on the fifth date of the month of Vaishakh


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