अक्षय तृतीया : इस दिन इनके दर्शन मात्र से, हर अधूरी कामना हो जाती है पूरी

इस साल अक्षय तृतीया तिथि का पर्व 26 अप्रैल दिन रविवार को मनाया जाएगा। यह पर्व प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बिना किसी पंचांग या शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य किये जा सकते हैं। अगर किसी के जीवन में कोई बाधाएं बार-बार आ रही है हो, अधूरे कार्य पूरे नहीं हो रहे हो तो अक्षय तृतीया तिथि के दिन इनके दर्शन मात्र से कार्य पूरे हो जाते हैं।

अक्षय तृतीया : इस दिन इनके दर्शन मात्र से, हर अधूरी कामना हो जाती है पूरी

1- भविष्य पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया तिथि की युगादि तिथियों में गणना होती है।

2- सतयुग और त्रेतायुग का प्रारंभ भी अक्षय तृतीया तिथि से ही हुआ है।

3- अक्षय तृतीया तिथि के दिन ही भगवान विष्णु ने नर-नारायण के रूप में अवतार लिया था।

4- हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथि को हुआ था।

5- ब्रह्माजी के पुत्र अक्षय कुमार का आविर्भाव भी इसी दिन हुआ था।

अक्षय तृतीया : इस दिन इनके दर्शन मात्र से, हर अधूरी कामना हो जाती है पूरी

6- अक्षय तृतीया के दिन श्री बद्रीनाथ जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है।

7- प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारायण के कपाट भी इसी तिथि से ही पुनः खुलते हैं।

8- अक्षय तृतीया के दिन से प्रारम्भ किए गए कार्य अथवा इस दिन को किए गए दान का कभी भी क्षय नहीं होता।

9- अक्षय तृतीया तिथि के दिन ही साल में केवल एक बार वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी मन्दिर में श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष भर वस्त्रों से ढके रहते हैं।

10- अक्षय तृतीया के दिन 41 घटी 21 पल होती है।

अक्षय तृतीया : इस दिन इनके दर्शन मात्र से, हर अधूरी कामना हो जाती है पूरी

11- धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार अक्षय तृतीया 6 घटी से अधिक होना चाहिए।

12- पद्म पुराण के अनुसार, अक्षय तृतीया को अपराह्न व्यापिनी मानना चाहिए।

13- अक्षय तृतीया के दिन ही महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था।

14- द्वापर युग का समापन भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था।

15- अक्षय तृतीया के दिन भगवान लक्ष्मी नारायण के दर्शन मात्र मात्र से जीवन की समस्त बाधाएं खत्म होने लगती है।

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source https://www.patrika.com/festivals/kamna-purti-ke-upay-for-akshaya-tritiya-at-home-6036604/

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