वैदिक ज्योतिष: जानें कुंडली में देवगुरु बृहस्पति का प्रभाव

वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह को ‘गुरु’ कहा जाता है। सप्ताह में इसका दिन बृहस्पतिवार माना गया है। इसका रंग पीला व रत्न पुखराज होता है। ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह कुंडली में स्थित 12 भावों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डालता है। इन प्रभावों का असर हमारे प्रत्यक्ष जीवन पर पड़ता है। यह एक शुभ ग्रह है, अतः जातकों को इसके शुभ फल प्राप्त होते हैं।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार गुरु धनु और मीन राशि का स्वामी होता है और कर्क इसकी उच्च राशि है जबकि मकर इसकी नीच राशि मानी जाती है। गुरु ज्ञान, शिक्षक, संतान, बड़े भाई, शिक्षा, धार्मिक कार्य, पवित्र स्थल, धन, दान, पुण्य और वृद्धि आदि का कारक होता है।

ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह 27 नक्षत्रों में पुनर्वसु, विशाखा, और पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति पर बृहस्पति ग्रह की कृपा बरसती है उस व्यक्ति के अंदर सात्विक गुणों का विकास होता है। इसके प्रभाव से व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है।

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ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति ग्रह का गोचर जन्मकालीन राशि से दूसरे, पांचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है। जिन व्यक्तियों की जन्म कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत स्थिति में होता है तो जातक के जीवन में प्रगति होती है। हालाँकि इस दौरान जातक के मोटे होने की भी संभावना बनी रहती है। गुरु के आशीर्वाद से व्यक्ति को पेट से संबंधित रोगों से छुटकारा मिलता है। कुंडली में यदि कोई भाव कमज़ोर हो और उस पर गुरु की दृष्टि पड़ जाए तो वह भाव मजबूत हो जाता है।

गुरु के मंत्र:

वैदिक मंत्र : ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

गुरु का तांत्रिक मंत्र ॐ बृं बृहस्पतये नमः।।

बृहस्पति का बीज मंत्र ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरुवे नमः।।

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सभी 12 भावों पर असर...

1. प्रथम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in First House

ज्योतिष में प्रथम भाव यानि लग्न भाव होता है। जिससे जातक के व्यक्तित्व, उसके डीलडोल आदि के बारे में अनुमान लगाया जाता है। पंडित शर्मा के अनुसार प्रथम भाव का बृहस्पति सामान्यत: उत्तम फल ही देता है। ऐसे जातक मनोहर व्यक्तित्त्व के स्वामी होने के साथ ही बलवान और दीर्घायु होते हैं। आप स्पष्ट वक्ता और स्वाभिमानी होने के साथ साथ उदार स्वभाव के भी होते हैं।

आध्यात्म और रहस्यमयी विद्याओं में आपकी गहरी रुचि होने के अलावा इनका स्वभाव स्थिर होता है। इन्हें राजा के द्वारा मान-सम्मान और धन की प्राप्ति होने की संभावना अधिक होती है, लेकिन कभी-कभी झूठी अफवाहों के द्वारा इन्हें कष्ट का सामना भी करना पड़ता है।


2. द्वितीय भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Second House

द्वितीय भाव को संपत्ति भाव या विचार भाव भी कहते हैं। यहां स्थित बृहस्पति के कारण इन जातकों की मुखाकृति सुंदर होती है। ये विनम्र और सत्संगी होने के अलावा इनका साहस और सदाचार सराहनीय होता है। वाणी बहुत प्रभावशाली और अच्छी होने के साथ ही ये मधुरभाषी, सर्वजन प्रिय होते हैं। ऐसे जातक संततिवान और सम्पत्तिवान व्यक्ति होंगे। आप धन संग्रह और संचय में निपुण होंगे।

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हांलाकि अशुभ प्रभाव या अशुभ दशा की स्थिति में बृहस्पति के विपरीत फल भी मिल सकते हैं। ऐसे जातक शत्रु विजय और बंधुओं से सुखी और 27वें वर्ष में राजा या सरकार से आदर पाने वाले होते हैं।

इन्हें सोना चांदी, सरकारी नौकरी, कानूनी काम, बैंक, शिक्षा संस्थान, देवालय, धर्म संस्था आदि माध्यमों से आपको धन और यश मिल सकता है। इसके अलावा रसायनशास्त्र, भाषाओं का ज्ञान, काव्यशास्त्र, व दण्डाधिकार भी आपको मिल सकता है अर्थात आप मजिस्ट्रेट, कलेक्टर या न्यायाधीश भी हो सकते हैं।

3. तृतीय भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Third House ...

ज्योतिष में तृतीय भाव को पराक्रम भाव या भाई बहन का भाव भी कहते हैं। तीसरे भाव में बृहस्पति होने के कारण ऐसे जातक साहसी और बलवान होने के साथ ही शास्त्रों के जानकार और अनेक प्रकार के धार्मिक कार्यों को सम्पादित करने वाले होते हैं। ये जीतेन्द्रिय, तेजस्वी और ईश्वर पर विश्वास करने वाले होने के साथ ही काम करने में चतुर होते हैं।

ऐसे जातक प्रवास पर्यटन और तीर्थयात्राएं करने वाले होते हैं। इन्हें अपने सगे भाइयों-बहनों और कुटुम्बियों से सुख मिलता है। ये अपने भाइयों का कल्याण करने वाले और उन्हें उत्तम सुख देने वाले होंगे। इनके भाई भी प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।

इन्हे राजा या सरकार के द्वारा सम्मान मिलने के साथ ही बहुत सारे लोग इनके अधीनस्थ रहेंगे। अच्छे बुद्धि विवेक के कारण लेखन से लाभ होगा। तीसरे भाव के बृहस्पति के कारण आपको कंजूसी करते हुए देखा जाएगा। वहीं भूख न लगने के कारण शरीर दुर्बल हो सकता है।

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4. चतुर्थ भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Fourth House ...

चतुर्थ भाव को सुख भाव या माता का भाव भी कहते हैं। चौथे स्थान पर बृहस्पति रूपवान, बलवान और बुद्धिमान बनाता है। ऐसे जातक उत्तम हृदय वाले मेधावी होने के साथ ही इनकी वाक्पटुता प्रसंसनीय होगी। आप महत्त्वाकांक्षी और शुभकर्म करने वाले व्यक्ति हैं। यशस्वी और अपने कुल के मुखिया होंगे। ये विभिन्न प्रकार के वाहनों का सुखोपभोग करेंगे।

ब्राह्मणों और गुरुजनों का आदर करने के साथ ही गुरु की भक्ति को बहुत महत्त्व देंगे। घर बहुत बडा और विभिन्न प्रकार की सुख सुविधाओं से युक्त होगा। राजकीय या सरकार द्वारा प्रदत्त घर का भी सुख मिलेगा।

यदि व्यापार करते हैं तो हो सकता है कि आपके व्यापार की गति कुछ हद तक धीमी रहे। सरकार से धन मिल सकता है।

5. पंचम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Fifth House ...

पंचम भाव बुद्धि या पुत्र भाव का परिचायक माना गया है। ऐसे जातक का स्वरूप दर्शनीय होने के साथ ही इनकी ईश्वर में आस्था रहेगी। धार्मिक और शुद्धचित्त होने के साथ ही इनमें दयालुता और विनम्रता के गुण हैं। बुद्धिमान, पवित्र और श्रेष्ठ व व्यक्तियों में गिने जाएंगे। स्वभाव से न्यायशील होंगे। वाणी कोमल और मधुर होगी। आपकी कल्पना शक्ति बहुत उत्तम होगी। चतुर, समझदार और महान कार्य करने वाले होंगे।

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उत्तम वक्ता, धारा प्रवाह बोलने वाले और कुशल व्याख्याता हो सकते हैं। प्रतिभावान और नीतिविशारद होंगे। उत्तम लेखक या ग्रंथकार होने के साथ ही रुचि ज्योतिष में भी हो सकती है।बॄहस्पति के प्रभाव के कारण आप स्वभाव से आराम तलब हो सकते हैं। स्थिर धन से युक्त सदा सुखी रहने वाले व्यक्ति होंगे।

6. छ्टें भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Sixth House ...

छ्टें भाव को रोग या शत्रु भाव भी कहते हैं। यहां स्थित बृहस्पति शारीरिक प्रकृति को अच्छा करता है अर्थात आपको निरोगी बनाता है। फिर भी हो सकता है कि इनका शरीर दुबला हो। आप मधुरभाषी और सदाचारी व्यक्ति हो सकते हैं। आप पराक्रमी विवेकवान और उदार हैं। आप अच्छे कर्म करने वाले, लोकमान्य और प्रतापी हैं। आप विद्वान और ज्योतिषी हो सकते हैं साथ ही आप संसारी विषयों से विरक्त भी हो सकते हैं।

आप मारण-उच्चाटन आदि मंत्रों में कुशल हो सकते हैं। शायद इसीलिए लोग आपको संदिग्ध और संशय की नजर से देख सकते हैं। आप शत्रुहंता और अजात शत्रु होंगे। लेकिन उम्र के चालीसवें साल में आपको शत्रुभय रह सकता है। राज काज और विवाद में भी आप विजयी रहेंगे। केवल अशुभ दशा की अवधि में बृहस्पति की यह स्थिति मामा और भाइयों के लिए ठीक नहीं कही गई है अन्यथा गुरु, भाई-बहनों और मामा सुख मिलता है।

आप यशस्वी और विख्यात व्यक्ति हैं। फिर भी आप अपने काम को देर से पूरा करते हैं। यानी आपका काम समय से पूरा नहीं हो पाता। आपको पुत्र और पौत्रों को देखने का सुख मिलेगा। संगीत में भी आपकी रुचि होनी चाहिए। आपको स्त्री पक्ष से सुख मिलेगा। आपको अच्छे नौकर चाकर मिलेंगे। यदि आप चिकित्सा से जुडा कोई काम करते हैं तो आपको बहुत यश प्राप्त होगा।

7. सप्तम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Seventh House ...

सप्तम भाव को विवाह भाव भी कहते हैं। आप शारीरिक रूप से सुंदर और और आकर्षक व्यक्तित्त्व के मालिक हैं। लोग आपसे मिलकर प्रसन्न होते हैं अर्थात आपके आकर्षण के कारण लोग आपसे मिलकर आपके वशीभूत हो जाते हैं।

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आपकी वाणी आकर्षक और प्रभावशाली होगी। आप कुशाग्र बुद्धि और विद्या सम्पन्न व्यक्ति हैं। आप ज्योतिष काव्य साहित्य, कला प्रेमी और शास्त्र परिशीलन में आसक्त रहने वाले व्यक्ति हैं।

आप प्रतापी यशस्वी और प्रसिद्ध होंगे। लेकिन यहां स्थित बृहस्पति कभी-कभी विपरीत लिंगी के प्रति अधिक आशक्ति देता है परंतु उनके प्रति लम्बे समय तक समर्पित रहना आपको पसंद नहीं होगा। फिर भी आपका जीवन साथी कुलीन और धनवान होना चाहिए। विवाह के कारण आपका भाग्योदय होगा और आपको धन, सुख, श्रेष्ठ पद और मान्यता मिलेगी। आपका जीवन साथी गुणों से युक्त होगा।

सप्तम भाव का बृहस्पति कामुकता अधिक देता है। यहां स्थित कभी-कभी अभिमानी भी बनाता है। अत: इन पर नियंत्रण भी आवश्यक होगा। आप शीघ्र ही बडी उन्न्ति और बडा पद प्राप्त करेंगे। आपको सरकारी कामों, कचहरी के काम, मंत्रणा देने का काम, सलाहकार का काम, चित्रकला आदि के द्वारा लाभ मिल सकता है। आप न्याय के काम से भी धनार्जन कर सकते हैं।

8. अष्टम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Eighth House ...

ज्योतिष में अष्टम भाव को आयु भाव भी कहते हैं। आठवें भाव में बृहस्पति की स्थिति आपको दीर्घायु प्रदान कर आपको चिरंजीवी बनाता है। आपकी शारीरिक संरचना कुछ इस प्रकार होती है कि लोग बरबस आपकी ओर आकृष्ट हो जाते हैं।

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यह इस बात का भी संकेत है कि आप अपने पिता के घर में बहुत दिनो तक नहीं रहेंगे। आप स्वजनों से इतना अधिक लगाव रखेंगे कि उनके लिए छोटे से छोटा काम करने को भी तैयार रहेंगे।

आपको किसी वसीयत के माध्यम से भी धन की प्राप्ति हो सकती है। यहां स्थित बृहस्पति आपको कंजूस और लालची भी बना सकता है। अत: इन पर नियंत्रण रखते हुए मन की चंचलता पर भी नियंत्रण रखना जरूरी होगा। आप एक योगाभ्यासी व्यक्ति होंगे। आपको उत्तम से उत्तम तीर्थ यात्राओं को करने का मौका मिलेगा। आप अपनी कुल परंपरा को बहुत महत्त्व देते हैं।

अस्वस्थ होने की अवस्था में आपकी प्रकृति में अंतर आ जाता है। आपको शूल रोग होने का भय भी रहता है। आपको अच्छे मित्रों की संगति मिलती है। बृहस्पति की यह स्थिति कभी-कभी विवाह के माध्यम से खूब धनार्जन भी करवाती है। आप ज्योतिष प्रेमी और स्थिरमति व्यक्ति हो सकते हैं। यहां स्थित बृहस्पति आपको मोक्ष का अधिकारी भी बनाता है।

9. नवम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Ninth House ...

नवम भाव को भाग्य भाव भी कहा जाता है। नवमें भाव में बृहस्पति होने के कारण आप स्वभाव से धार्मिक हैं और सच बोलना आपकों पसंद है। आप नीतिमान, विचारशील और माननीय व्यक्ति हैं। देवताओं, ब्राह्मणों और गुरुजनों में आपकी अपार श्रद्धा होगी। आप दान पुण्य में विश्वास करने वाले व्यक्ति हैं। आप भक्त, योगी, वेदान्ती, शास्त्रज्ञ, विद्वान और अपने कुल की परम्परा को मानने और आगे बढाने वाले व्यक्ति होंगे।

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आप शांत, सदाचारी, और उच्च विचार वाले हैं। आप सभी शास्त्रों और कलाओं से परिपूर्ण, व्रती और देवपितॄभक्त होंगे। आपको तीर्थ यात्रा और धार्मिक कार्यों से बडा लगाव होगा। आप पराक्रमी, यशस्वी, विख्यात, मनुष्यों में श्रेष्ठ, भाग्यवान और साधु स्वभाव के होंगे। आप अपनी उम्र के पैंतीसवें वर्ष में देव यज्ञ कर सकते हैं। आपको मकान का पूर्ण सुख मिलेगा।

आप न्यायकर्ता या लेखक हो सकते हैं। आप मंत्री, नेता या प्रधान भी हो सकते हैं। आप कानूनी काम, क्लर्क का काम, धार्मिक विषयों, वेदांत और दूर के प्रवास के माध्यम से भी आजीविका चला सकते हैं। आप राजा या सरकार के बडे करीबी या प्रेम पात्र होंगे। आपके पास भी राजाओं जैसा ऐश्वर्य होना चाहिए। आप भाई, मित्रों और सेवकों से युक्त होंगे। लेकिन आपको चाहिए कि किसी भी काम को अधूरा न छोडें और आलस्य से बचें।

10. दशम भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Tenth House ...

ज्योतिष में दशम भाव को कर्म भाव या पिता भाव माना गया है। यहां स्थित बृहस्पति आपको चरित्रवान और स्वतंत्र विचारक बनाने के साथ ही विवेकी न्यायी और सत्यवादी भी बनाता है। आप सत्कर्मी पुण्यात्मा और साधु समान व्यक्ति हैं। आपको शास्त्रों का विधिवत ज्ञान होना चाहिए और आपकी रुचि ज्योतिष शास्त्र में भी होनी चाहिए। आप को भूमि सुख और भूमि के माध्यम से खूब लाभ मिलता है। आपको उत्तम वाहनों का सुख मिलेगा।

आप अपने गुणों के कारण समाज में पूजित होंगे। आप अपने प्रभाव के कारण सर्वत्र सम्मान प्राप्त करेंगे। आपका यश अतुलनीय होगा। आप अपने पूर्वजों से अधिक प्रतापी होंगे। आप अपने माता-पिता का बडा आदर करते हैं। आपके पिता भी आपको बडा स्नेह करते हैं। आप खूब धन कमाकर, ऐश्वर्यवान, सुखी और समृद्ध बनेंगे। आप सुंदर वस्त्र और आभूषणों से युक होंगे।

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आपको कार्य आरम्भ करते ही सफलता मिलने लगती है। आपको भाइयों के माध्यम से भी धन मिल सकता है। आपको स्त्री और पुत्र का सामन्य सुख मिलेगा। अर्थात संतान को लेकर या फिर संतान के भविष्य को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। स्वास्थ्य सुख भी सामान्य रहेगा। आपके घर पर बहुत लोग भोजन करेंगे। आप, प्रवचन कर्ता, भिक्षुक, जज, और आयात-निर्यात कर्ता हो सकते हैं।

11. एकादश भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Eleventh House ...

एकादश भाव को आय भाव भी कहा जाता है। यहां स्थित बृहस्पति आपको सुंदर के साथ-साथ निरोगी और दीर्घायु शरीर भी देता है। आप संतोषी, उदार और परोपकारी व्यक्ति हैं। आप कुशाग्र बुद्धि और विचारवान हैं। आप प्रमाणिक सच बोलने वाले और साधु स्वभाव के हैं। आप सज्जनों और श्रेष्ठ व्यक्तियों की संगति करने वाले व्यक्ति हैं। आप राजा या सरकार के द्वारा सम्मान और लाभ मिलेगा। श्रीमान और कुलीन लोगों से आपकी मित्रता होगी।

आपके मित्र अच्छे स्वभाव के होंगे। आपकी आशाओं और महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में वो आपकी सहायता करेंगे। अच्छे मित्रों की सलाह आपके लिए उत्तम और फायदेमंद रहेगी। आपके द्वारा किए गए उत्तम कार्यों से समाज में आपका नाम होगा और श्रेष्ठता भी बढेगी। आपको अर्थलाभ और धन की प्राप्ति होगी। आप धन धान्य से पूर्ण भाग्यवान व्यक्ति हैं। आपके पास आमदनी के कई श्रोत होने चाहिए।

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इस भाव का बृहस्पति कभी-कभी कंजूस बनाता है और संतान को लेकर कुछ चिंताए भी देता है। उम्र के बत्तीसवें वर्ष में आपको बहुत लाभ होता है। लेकिन आपकी पूर्वाजित सम्पत्ति को कोई और हडप सकता है या किसी कारण से वह आपके हाथ से निकल जाएगी। आप पराक्रमी, पिता के सहायक और शत्रुओं को पराजित करने वाले व्यक्ति हैं। आप राज पूज्य या राज कृपा युक्त बने रहेंगे।

12. द्वादश भाव में स्थित गुरु का फल Jupiter in Twelvth House ...

द्वादश भाव को व्यय भाव भी कहते हैं। यहां स्थित बृहस्पति के कारण आप धार्मिक आचरण करते हुए संसार में पूज्य होंगे। आप निर्भीक प्रकॄति के सुखी इंसान हैं। आप परोपकारी हैं और विश्वबंधुत्त्व की भावना रखते हैं। आप कम बोलने वाले उदार व्यक्ति हैं। फिर भी अप्रिय सम्भाषण और आलस्य से भी बचाव करना चाहिए। आपकी रुचि आध्यात्म और गूढशास्त्रों में होनी चाहिए। आप पुराने रीति रिवाजों को भी बहुत महत्त्व देते हैं।

दान पुण्य के कार्यों में आपका बहुत विश्वास है यही कारण है कि आप बडे से बडा दान करने से नहीं हिचकिचाते। लेकिन फिजूलखर्ची आपको पसंद नहीं है। फिर भी आपको दूसरों के प्रति द्वेष नहीं रखना चाहिए। जीवन में कई बार आपको विदेश प्रवास व अन्य यात्राओं का मौका मिलेगा। देशत्याग, अज्ञातवास तथा दूर प्रदेशों के प्रवास से आपको लाभ और कीर्ति की प्राप्ति होगी।

यदि आप, चिकित्सक, लोकसेवक सम्पादक, वेदज्ञानी, धर्मगुरु या सम्पादक हैं तो यहां स्थित बृहस्पति आपके लिए बडा शुभफलदायी रहेगा। आपके लिए आपकी उम्र का मध्यभाग तथा उत्तरार्ध अच्छा रहेगा। आपको अन्न की कभी भी कमी नहीं होगी। आप अपने जीवन काल में धन, सम्पत्ति, सोना, वस्त्र आदि पर्याप्त मात्रा में पाएंगे। पिता के द्वारा भी आपको खूब धन मिलेगा, लेकिन संतान की संख्या कम रह सकती है।



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