वैदिककाल से है दीपक जलाने की परंपरा, पंच तत्वों का प्रतीक है मिट्टी का दीपक

पी एम मोदी ने देश की जनता से 5 अप्रैल रविवार यानी आज रात 9 बजे अपने घर के बाहर या बालकनी में दीपक, मोमबत्ती या मोबाइल की फ्लेश लाइट जलाने की अपील की है। ऐतिहासिक नजरिये से देखा जाए तो दीपक का इतिहास करीब 5000 साल पुराना है। वहीं ऋग्वेदकाल से कलयुग तक हिंदू धर्म में दीपक का बहुत महत्व बताया गया है।

ऋग्वेदिक काल से कलयुग तक दीपक

धर्म ग्रंथों में दीपक का बहुत महत्व बताया गया है। इस संबंध में काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसारऋग्वेद में बताया गया है कि दीपक में देवताओं का तेज रहता है। इसलिए सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए दीप जलाए जाते हैं। ऋग्वेद काल से अग्नि प्रज्वलित करने यानी दीपक जलाने की परंपरा मनाई जाती है। बाद में अलग-अलग कारणों से ये परंपरा पर्वो के साथ जुड़ गईं। त्रेतायुग में श्रीराम के अयोध्या आने पर और द्वापरयुग में श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर राक्षस को मारने पर दीपक जलाए गए थे। इसके बाद कलयुग में दीपावली पर्व के दौरान सुख-समद्धि की कामना और उल्लास प्रकट करने के लिए 5 दिनों तक दीपक जलाए जाते हैं। वहीं अग्नि पुराण, ब्रम्हवैवर्त पुराण, देवी पुराण, उपनिषदों तथा वेदों में गाय के घी तथा तिल के तेल से ही दीपक जलाने का विधान है।

पंच तत्वों का प्रतीक है मिट्टी का दीपक

मिट्टी का दिया पंच तत्व का प्रतीक है, इसे मिट्टी को पानी में गला कर बनाते हैं जो भूमि तत्व और जल तत्व का प्रतीक है, उसे बनाकर धूप और हवा से सुखाया जाता है जो आकाश तत्व और वायु तत्व के प्रतीक हैं फिर आग में तपाकर बनाया जाता है।

ऊर्जा चक्र होते हैं जागृत

  • घी के अंदर एक सुगंध होती है जो जलने वाले स्थान पर काफी देर तक रहती है जिसकी वजह वह स्थान शुद्ध रहता है और इससे कई तरह की बीमारियों से भी बचाव होता है। इसके अलावा आध्यात्म के अनुसार हमारे शरीर में 7 ऊर्जा चक्र होते हैं, घी का दिया जलाने से यह चक्र जागृत हो जाते है। इससे शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। वहीं अगर घी में लौंग डाल दिया जाए तो इससे निकलने वाला धुंआ घर के लिए एयर प्यूरीफायर का काम करता है। जो चर्म रोग से निजात दिलाने में मदद करता है।
  • यदि तिल के तेल से दीपक जलाया जाए तो यह शरीर के स्थित मूलाधार एवं स्वाधिष्ठान चक्र को एक सीमा तक जागृत करने का काम करता है। लेकिन घी के दीपक के इस्तेमाल से सात चक्रों को प्रभावित करता है। इनके साथ ही शरीर मेंचंद्र, सूर्य तथा सुषुम्ना नाड़ी को भी शुद्ध करता है।

मुश्किल समय में मेहनत और हिम्मत का संदेश

  • वैदिककाल में होने वाले सोमयज्ञ मेंतमसो मा ज्योतिर्गमय मंत्र पढ़ा जाता था। जो कि बृहदारण्यकोपनिषद्का मंत्र है। इस प्रार्थना का अर्थ है कि मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। इसलिए दीपक की रोशनी को ज्ञान का प्रतीक माना गया है। पुराणों में दीपक को सकारात्मकता का प्रतीक व दरिद्रता को दूर करने वाला भी कहा गया है।
  • दीपक जलाने का कारण यह है कि हम अज्ञान का अंधकार मिटाकर अपने जीवन में ज्ञान के प्रकाश के लिए पुरुषार्थ करें। जिस तरह अग्नि गर्माहट और प्रकाश की अपनी विशेषता नहीं छोड़ती। उसी तरह हमें भी दीपक से प्रेरित होकर मुश्किल समय में भी पुरुषार्थी होकर सभी को साथ लेकर हिम्मत से आगे बढ़ना चाहिए। इसलिए हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार दीपक लगाना जरूरी माना गया है।

दीपक लगाने के नियम

आमतौर पर विषम संख्या में दीप प्रज्जवलित करने की परंपरा चली आ रही है। घी का दीपक लगाने से घर में सुख समृद्धि आती है। इससे घर में लक्ष्मी का स्थाई रूप से निवास होता है। घी को पंचामृत यानी पांच अमृतों में से एक माना गया है। किसी भी सात्विक पूजा का पूरा फल प्राप्त करने के लिए घी का दीपक और तामसिक यानी तांत्रिक पूजा काे सफल बनाने के लिए तेल का दीपक लगाया जाता है।

  1. दीपक अंधकार को मिटाकर प्रकाश फैलाता है, इसी वजह से घर में सुबह-शाम दीपक का प्रकाश फैलाना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है।
  2. अग्नि पुराण के अनुसार सूर्योस्त के बाद मुख्य द्वार के पास दीपक लगाने से उस घर में रहने वाले लोगों की उम्र बढ़ती है और रोग खत्म होने लगते हैं। इसके साथ ही लक्ष्मीजी प्रसन्न होती हैं।
  3. खंडित दीपक नहीं जलाना चाहिए। दीपक के लिए रुई की बत्ती का उपयोग करना चाहिए। घी के अलावा तिल के तेल का दीपक भी लगाना शुभ है।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
tradition of lighting lamps And Importance of Diya from Vedic period Deepak symbolizes the five elements


Comments