शनिवार और चतुर्थी के योग में गणेशजी के साथ करें शनिदेव की भी पूजा

शनिवार, 11अप्रैल को गणेश चतुर्थी है। शनिवार को चतुर्थी होने से इस दिन गणेशजी के साथ ही शनिदेव की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। चतुर्थी पर गणेशजी की कृपा पाने के लिए व्रत और पूजा-पाठ किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार गणेशजी सुख-समृद्धि और बुद्धि के दाता है। इनकी पूजा में 12 नाम मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।

दूर्वा चढ़ाकर करें मंत्र जाप

भगवान को दूर्वा चढ़ाएं। दीपक जलाएं और इन मंत्रों का जाप करें। मंत्र- ऊँ गणाधिपतयै नम:, ऊँ उमापुत्राय नम:, ऊँ विघ्ननाशनाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ ईशपुत्राय नम:, ऊँ सर्वसिद्धप्रदाय नम:, ऊँ एकदन्ताय नम:, ऊँ इभवक्त्राय नम:, ऊँ मूषकवाहनाय नम:, ऊँ कुमारगुरवे नम:।

ये है गणेशजी की सरल पूजा विधि

गणेश चतुर्थी पर स्नान के बाद सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। पूजा का धागा, वस्त्र अर्पित करें। चावल चढ़ाएं।

गणेशजी के मंत्र बोलते हुए दूर्वा चढ़ाएं। लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर से भगवान श्रीगणेश की आरती करें। पूजा के बाद प्रसाद अन्य भक्तों को बांटें। अगर संभव हो सके तो घर में ब्राह्मणों को भोजन कराएं। दक्षिणा दें।

शनिवार को करें शनि की पूजा

शनिवार को शनिदेव की कृपा पाने के लिए जरूरतमंद लोगों को तेल का दान करें। शनिदेव को नीले फूल चढ़ाएं। ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप 108 बार करें। हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऊँ रामदूताय नम: मंत्र का जाप करें।



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