आज बन रहा है सोम प्रदोष का शुभ संयोग, लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए करते हैं ये व्रत

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव की उपासना के लिए हर महीने शुक्ल एवं कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को श्रेष्ठ बताया गया है। इसे प्रदोष कहा जाता है। 20 अप्रैल को सोमप्रदोष व्रत किया जाएगा। सोमवार शिवजी का दिन होने से ये व्रत और भी महत्वपूर्ण हो गया है। ये साल का पहला और आखिरी सोम प्रदोष है। इसके बाद 2021 में ऐसा शुभ संयोग बनेगा, जब सोमवार को प्रदोष व्रत किया जाएगा।

  • माना जाता है कि प्रदोष पर भगवान शिव कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं। इसलिए प्रदोष पर व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है।


प्रदोष व्रत और पूजा की विधि

  1. प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, भोग, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान शिव को चढ़ाएं।
  2. शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। शिवजी का षोडशोपचार पूजा करें, जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं।
  3. आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जप करें। रात्रि में जागरण करें।


प्रदोष का महत्व
हिन्दू धर्म के अनुसार, प्रदोष व्रत कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला होता है। माह की त्रयोदशी तिथि में सायं काल को प्रदोष काल कहा जाता है। यह व्रत रखने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है। इसलिए इसे प्रदोष कहा जाता है। इस व्रत के रखने से दो गायों के दान करने जितना पुण्य मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से न केवल भगवान शिव बल्कि माता पार्वती की भी कृपा बनी रहती है।



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Today is auspicious coincidence of Som Pradosh, this fast for long life and good health


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