केदारनाथ के कपाट खुले, विष्णुजी के अवतार नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न होकर यहां प्रकट हुए थे शिवजी

बुधवार, 29 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खुल गए हैं। बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग केदारनाथ है। ये मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। हर साल गर्मी के दिनों में ये मंदिर भक्तों के लिए खोला जाता है। अन्य ऋतुओं में यहां का वातावरण प्रतिकूल रहता है, इस वजह से मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस साल कोरोनावायरस की वजह से देशभर में लॉकडाउन है। ऐसी स्थिति में केदारनाथ के कपाट 15-16 लोगों की उपस्थित में खोले गए। उज्जैन के शिवपुराण कथाकार और ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए केदारनाथ धाम से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं...

नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न हुए शिवजी

केदरनाथ धाम से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। शिवपुराण की कोटीरुद्र संहिता में बताया गया है कि प्राचीन समय में बदरीवन में विष्णुजी के अवतार नर-नारायण इस क्षेत्र में पार्थिव शिवलिंग बनाकर पूजा करते थे। नर-नारायण की भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी प्रकट हुए। शिवजी ने नर-नारायण से वरदान मांगने को कहा, तब सृष्टि के कल्याण के लिए नर-नारायण ने वर मांगा कि शिवजी हमेशा इसी क्षेत्र में रहें। शिवजी ने कहा कि अब से वे यहीं रहेंगे और ये क्षेत्र केदार क्षेत्र के नाम से जाना जाएगा।

केदारनाथ के साथ ही नर-नारायण के दर्शन

शिवजी ने नर-नारायण को वरदान देते हुए कहा था कि जो भी भक्त केदारनाथ के साथ ही नर-नारायण के भी दर्शन करेगा, वह सभी पापों से मुक्त होगा और उसे अक्षय पुण्य मिलेगा। शिवजी ज्योति स्वरूप में यहां स्थित शिवलिंग में समा गए।

केदारनाथ शिवलिंग माना जाता है स्वयंभू

हिमालय में स्थित केदारनाथ अधिकांश समय प्रतिकूल वातावरण की वजह से बंद रहता है। हर साल अप्रैल से नवंबर के बीच दर्शन के लिए खोला जाता है। मान्यता है कि ये स्वयंभू शिवलिंग है। स्वयंभू शिवलिंग का अर्थ है कि यह स्वयं प्रकट हुआ है। केदारनाथ मंदिर का निर्माण पाण्डव वंश के राजा जनमेजय द्वारा करवाया गया था और आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जिर्णोद्धार करवाया था।

ऐसा है मंदिर का स्वरूप

केदारनाथ मंदिर एक ऊंचे स्थान पर बना हुआ है। मंदिर के मुख्य भाग में मंडप और गर्भगृह है। मंदिर के चारों ओर परिक्रमा करने का मार्ग भी है। मंदिर परिसर में शिवजी के वाहन नंदी विराजित हैं।

शिवलिंग का पूजन प्राचीन विधि-विधान से किया जाता है। सुबह शिवलिंग को स्नान कराया जाता है। घी का लेपन किया जाता है। इसके बाद धूप-दीप जलाएं जाते हैं, पूजन सामग्रियां अर्पित की जाती हैं, भोग लगाया जाता है। आरती की जाती है। शाम के समय भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है।

कैसे पहुंच सकते हैं केदारनाथ

केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए भारत के किसी भी शहर से ट्रेन द्वारा हरिद्वार या ऋषिकेश पहुंचा जा सकता है। हरिद्वार और ऋषिकेश से केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए आवागमन के कई साधन मिल जाते हैं, जिनकी मदद से सड़क मार्ग से केदारनाथ धाम पहुंच सकते हैं, लेकिन इस समय कोरानावायरस की वजह से देशभर में आवागमन के साधन बंद है। परिस्थितियां सामान्य होने पर आम दर्शनार्थी केदारनाथ तक आसानी से पहुंच सकते हैं।



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