दोपहर में 12 से 4 बजे के बीच करनी चाहिए पितरों की पूजा, सुबह-शाम करें देवी-देवताओं का पूजन

पूजा-पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो जल्दी ही सकारात्मक फल मिल सकते हैं। पूजा कर्म के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है।उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त को देवताओं का समय माना गया है। इस समय जागने और पूजा करने से मन को शांति मिलती है। सुबह सूर्योदय के समय सभी दैवीय शक्तियां जागृत हो जाती हैं। जिस प्रकार सूर्य की पहली किरण से फूल खिल जाते हैं, ठीक इसी प्रकार सुबह-सुबह की सूर्य की किरणें हमारे शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद होती हैं। सुबह के समय सूर्य की किरणें हमारी त्वचा को लाभ पहुंचाती है, इन किरणों से त्वचा की चमक बढ़ती है। ध्यान रखें दोपहर में 12 से 4 का समय पितरों की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। इस समय में भगवान की पूजा से पूरा शुभ फल नहीं मिलता है।

सुबह पूजा करते समय मन नहीं भटकता

पूजा करते समय मन शांत होना चाहिए। एकाग्रता के बिना की गई पूजा सफल नहीं हो पाती है। सुबह का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ है, क्योंकि जागने के बाद हमारा मन शांत और स्थिर रहता है। दिमाग में इधर-उधर की बातें, व्यर्थ विचार नहीं रहते। भक्ति के लिए जरूरी है एकाग्रता। एकाग्र मन से ही ध्यान लगाया जाता है। दिन के समय हमारे दिमाग में कई तरह के विचार चलते रहते हैं और मन एक जगह टिक नहीं पाता। भटकते मन से पूजा नहीं हो पाती है। इसीलिए सुबह-सुबह का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

दिनभर बनी रहती है सकारात्मकता

सुबह जल्दी जागने से मानसिक शक्ति बढ़ती है, जिससे दिनभर ऊर्जा और सकारात्मकता बनी रहती है। सुबह जल्दी जागने से स्वास्थ्य को लाभ मिलते हैं। त्वचा की चमक बढ़ती है, पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है। सुबह पूजा में किए गए ध्यान से दिमाग तेजी से चलता है, तनाव हम पर हावी नहीं हो पाती है। मन शांत रहता है तो हम परेशानियों को आसानी से हल कर सकते हैं।



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