जानकी जयंती आज, इस दिन व्रत और पूजा करने से मिलता है 16 तरह के दान का पुण्य

वैशाख महीने के शुक्लपक्ष के नौवें दिन यानी नवमी तिथि को सीता जयंती मनाई जाती है। इस पर्व को जानकी नवमी भी कहा जाता है। इस दिन माता सीता और श्रीराम की पूजा की जाती है। ये पर्व 2 मई यानी आज मनाया जा रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन सीता का प्राकट्य हुआ था। श्रीराम और सीता जी का जन्म एक ही नक्षत्र में हुआ।

  • ग्रंथों के अनुसार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को पुष्य नक्षत्र में महाराजा जनक को पृथ्वी सेसंतान प्राप्त हुई थी।ग्रंथों में इस दिन का महत्व बताते हुए कहा गया है कि इस दिन माता सीता और श्रीराम की पूजा के साथ ही व्रत भी रखना चाहिए। इससे पृथ्वी दान सहित, सोलह तरह केमहत्वपूर्ण दान का फल भी मिलता है।

सीताजन्म कथा

वाल्मीकि रामायण के अनुसार राज जनक की कोई संतान नहीं थी। इसलिए उन्होंने यज्ञ करने का संकल्प लिया। जिसके लिए उन्हें जमीन तैयार करनी थी। वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमीतिथिको पुष्य नक्षत्र में जब राजा जनक हल से जमीन को जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी में उनके हल का एक हिस्सा फंस गया। उस जगह खुदाई करने पर मिट्‌टी के बर्तन में उन्हें कन्या मिली।जोती हुई भूमि और हल की नोक को सीत कहा जाता है, इसलिए उसका नाम सीता रखा गया।

सीता नवमीकी पूजा

  1. सीता नवमी पर व्रत व्रत करने वाले को सुबह जल्दी उठकर नहाना चाहिए।
  2. इसके बाद माता जानकी को प्रसन्न करने के लिए व्रत और पूजा का संकल्प लेना चाहिए।
  3. इसके बाद एक चौकी पर माता सीता और श्रीराम की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  4. राजा जनक और माता सुनयना की पूजा के साथ पृथ्वी की भी पूजा करनी चाहिए।
  5. इसके बाद श्रद्धा अनुसार दान का संकल्प लेना चाहिए।
  6. कई जगहों पर मिट्‌टी के बर्तन में धान, जल या अन्न भरकर दान दिया जाता है।


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Janaki Jayanti / Navami today, on this day, you get 16 kinds of charity by fasting and worshiping.


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