मानसून 2020: नक्षत्रों के आधार पर कब-कब, कहां-कहां होगी बरसात

वैदिक ज्योतिष में राहु केतु से लेकर नक्षत्रों तक का काफी महत्व होता हैं। सामान्यत: लोग केवल ग्रहों की चाल पर ही आंकलन के आधार पर भविष्यवाणी कर देते हैं। लेकिन वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के साथ ही नक्षत्रों का प्रभाव जातक से लेकर प्रकृति तक के रुख का मूल्यांकन करता है। तभी तो चाहे बारिश को लेकर बात हो या गर्मी व नौतपे की हर मामले में वैदिक ज्योतिष में नक्षत्रों के आधार पर ही भविष्य को आंका जाता है।

इन दिनों गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, ऐसे में लोग अब कोरोना के बीच बरसात का इंतजार करते दिख रहे हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय बनने वाली कुंडली से ही ज्योतिष में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा के संबंध में भविष्यवाणी की जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र का स्वामी राहु ग्रह है। यह आंसू की तरह दिखायी देता है।

इस नक्षत्र के रूद्रा (शिव का एक रूप) और लिंग-स्री है। यहां आर्द्रा का शाब्दिक आंसू (अश्रु) यानि पानी से माना जाता है, ऐसे में जब सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो मेदिनी ज्योतिष के अनुसार आसमान में मानसून के बादलों में विशेष गति आती है। ऐसे समय में यदि अन्य वर्षा कारक ग्रह जैसे गुरु, चंद्र, शुक्र और बुध अनुकूल हों तो बरसात खूब होती है।

MUST READ : जून 2020 - जानें इस माह कौन कौन से हैं तीज त्योहार

https://www.patrika.com/religion-and-spirituality/hindu-calendar-june-2020-for-hindu-festivals-6141442/

वहीं इस वर्ष 2020 में 25 मई से शुरु हुए नौतपा के समय शनि, शुक्र, गुरु, राहू, केतु वक्र गति यानि उल्टी चाल में रहेंगे। नौतपा के दौरान 30 मई को वक्री शुक्र अपनी ही राशि में अस्त होंगे। जिससे छुटपुट बूंदाबांदी के योग निर्मित होंगे। नौतपा का संबंध मानसून से होता है। इस बार 25 मई को नौतपा शुरू होगा। 22 जून को आर्द्रा का प्रवेश मिथुन लग्न और राहु, बुध, सूर्य, चंद्र के चतुर्थ ग्रही योग में होगा। आर्द्रा से हस्त नक्षत्र तक बारिश होगी। वर्षा का अंतिम और आठवां नक्षत्र 11 अक्टूबर तक चलेगा।

पं. शर्मा के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र में सूर्य हर साल 21 जून के आसपास प्रवेश करते हैं। ऐसे में साल 2020 में भी सूर्य 21 जून रविवार— सोमवार की दरमियानी रात 11 बजकर 28 मिनट पर ज्येष्ठ मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि को आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य के आर्द्रा प्रवेश की कुंडली में तीन शुभ ग्रह गुरु, शुक्र और बुध वक्री होकर अच्छी वर्षा के संकेत दे रहे हैं।

वहीं ज्योतिष गणना में ये भी दिख रहा है कि इस साल शनि के जल तत्व की राशि मकर और मंगल के जलतत्व की राशि मीन में वक्री होने से सामान्य से कुछ अधिक वर्षा होगी। जिसके चलते जुलाई से 15 अगस्त के बीच भारत के उत्तर और पश्चिम भू-भाग में बाढ़ और भारी वर्षा से भूस्खलन का खतरे की स्थिति भी निर्मित होती दिख रही है।

MUST READ : 05 दिन बाद है निर्जला एकादशी, जानें इस एकादशी के नियम

https://www.patrika.com/dharma-karma/nirjala-ekadashi-2020-and-its-importance-6142229/

तारीख अनुसार : कहां कब पहुंचेगा मानसून
ज्योतिष गणना के अनुसार 5-6 जून को चन्द्रमा के वृश्चिक राशि में गोचर के समय मानसून के केरल में जोरदार बारिश लाने की संभावना है। वहीं मुंबई में 10 जून की अपनी सामान्य तिथि की बजाय मानसून 14 जून को चंद्रमा के मीन राशि में गोचर के समय पहुंचेगा।

जबकि अब तक जो स्थिति सामने आती दिख रही है उसके अनुसार 18 जून को मंगल के मीन राशि में गोचर के साथ मानसून का छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जोरदार तरीके से आगमन होगा, वहीं मध्यप्रदेश में भी इसी समय के आसपास मानसून का प्रवेश होगा और यहां बारिश तकरीबन साल भर जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के बाद यानि 22 जून तक मानसून बिहार, झारखण्ड और पूर्वी उत्तर-प्रदेश में अच्छी वर्षा करेगा।

वहीं मिथुन राशि में राहु के गोचर के चलते इस वर्ष पूर्वोत्तर में तेज हवाओं के साथ 21 जून के बाद जोरदार वर्षा होने का अंदेशा है। इसके बाद 2 जुलाई को वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे चंद्रमा दिल्ली-एनसीआर में मानसून का प्रवेश कराएंगे। मंगल के मीन राशि में गोचर के चलते जुलाई के महीने में उत्तर भारत में अच्छी वर्षा होगी। वहीं मीन राशि से प्रभावित मुंबई में बाढ़ का खतरा रहेगा।

MUST READ : इस बार ज्येष्ठ माह के आखिरी दिन पड़ेगा चंद्रग्रहण, जानिये इस बार क्या होने जा रहा है खास

https://www.patrika.com/dharma-karma/hindu-calendar-chandra-grahan-2020-on-the-last-day-of-jyeshtha-month-6142059/

2020 का वार्षिक आंकलन माह अनुसार: ये भी मिल रहे हैं संकेत...
जून- 01 से 10 जून उमस वाली गर्मी, 15 से 17 जून, 24 से 28 जून तक वायु, बादल, आंधी के साथ देश के कई हिस्सों में साधारण से भारी बारीश हो सकती है।

जुलाई- 02 से 5, 9 से 13 जुलाई, 20 से 30 जुलाई तक देश के पूर्वोत्तरी राज्यों में अतिवर्षा एवं पश्चिमी राज्यों में सामान्य बारिश होगी।

अगस्त- 02 से 13 अगस्त, 20 से 21 अगस्त पूरे भारत में भारी बारिश होगी, साथ कुछ क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति भी बनेगी।

सितंबर- 01 से 07 सितंबर, 12 से 18 एवं 26, 28 से 31 सितंबर तक अच्छी बारीश, बिजली, बाढ़ के कारण कई शहरों में क्षति की स्थिति बनेगी।

अक्टूबर- 05 से 07 अक्टूबर, 10 से 13 अक्टूबर, 19 से 30 अक्टूबर तक खण्डवृष्टि हो सकती है।

नवंबर- 02 से 04 नवंबर, 17 से 19 नवंबर एवं 20 से 30 नवंबर तक देश के कई हिस्सों में प्रकृति प्रकोप से जन हानि हो सकती है।

दिसंबर- 04 से 05 दिसंबर, 11 से 14, 24 से 26 एवं 29 से 31 दिसंबर तक देश के कई हिस्सों में खण्डवृष्टि, शीतलहर हो सकती है।

बाढ़ से जन-धन की हानि का योग...
इस वर्ष श्रवण के महीने की अमावस्या 20 जुलाई को मीन लग्न उदित होगा जो कि एक जल तत्व की राशि है। इसके बाद 3 अगस्त को पूर्णिमा के दिन भी मीन लग्न उदित हो रहा है जिससे बाढ़ से जन-धन की हानि का योग बना रहा है। श्रवण के महीने में जलीय ग्रह गुरु और बुध का समसप्तक योग तथा बाद में भाद्रपद के महीने में गुरु और शुक्र का समसप्तक योग इस बार जुलाई और अगस्त में सामान्य से अधिक वर्षा का योग बना रहा है। 20 जुलाई से 15 अगस्त के बीच उत्तर और पश्चिम भारत के बड़े भूभाग में बाढ़ आने का भय रहेगा।

MUST READ : लुप्त हो जाएगा आठवां बैकुंठ बद्रीनाथ - जानिये कब और कैसे! फिर यहां होगा भविष्य बद्री...

https://www.patrika.com/astrology-and-spirituality/eighth-baikunth-of-universe-badrinath-dham-katha-6075524/

ऐसे समझें वर्षा के योग :
पंडित शर्मा के अनुसार ज्योतिष में वर्षा के आधार जलस्तंभ के रूप में बताया गया है। इसलिए वर्षा को आकृष्ट करने के लिए यज्ञ बहुत महत्वपूर्ण कहा गया है। 'अन्नाद् भवन्ति भूतानि पर्जन्यादन्न संभव' वस्तुतः वायु तथा बादलों का परस्पर संबंध होता है। आकाश मंडल में बादलों को हवा ही संचालित करती है वही उनको संभाले रखती है इसलिए वायुमंडल का वर्षा एवं स्थान विशेष में वर्षा करने में महत्वपूर्ण योगदान होता है।

तूफानी वायु, जंगलों एवं अन्य स्थानों में लगे हुए वृक्ष मकानों तथा पर्वत की शीला खंडों को उखाड़ फेंकने में समर्थ होते हैं लेकिन जब आर्द्रा, आश्लेषा, उत्तरा भाद्र पद, पुष्य, शतभिषा, पूर्वाषाणा एवं मूल नक्षत्र वारुण अर्थात्‌ जल मंडल के नक्षत्र कहे जाते हैं। इनसे विशेष ग्रहों का योग बनने पर वर्षा होती है। साथ ही रोहिणी नक्षत्र का वास यदि समुद्र में हो तो घनघोर वर्षा का योग बनता है। साथ ही रोहिणी का वास समुद्र तट पर होने पर भी वर्षा खूब होती है।

इसलिए वर्षा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में वायुमंडल का विचार किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्व तथा उत्तर की वायु चले तो वर्षा शीघ्र होती है। वायव्य दिशा की वायु के कारण तूफानी वर्षा होती है। ईशानकोण की चलने वाली वायु वर्षा के साथ-साथ मानव हृदय को प्रसन्न करती है। श्रावण में पूर्व दिशा की और वादों में उत्तर दिशा की वायु अधिक वर्षा का योग बनाती है। शेष महीनों में पश्चिमी वायु (पछवा) वर्षा की दृष्टि से अच्छी मानी जाती है।



source https://www.patrika.com/religion-and-spirituality/monsoon-2020-in-india-astrological-prediction-jal-jyotish-6144517/

Comments