23 मई से 5 जून तक रहेगा ज्येष्ठ महीने का शुक्लपक्ष, इन 15 दिनों में रहेंगे बड़े व्रत और पर्व

23 मई शनिवार से ज्येष्ठ महीने का शुक्लपक्षशुरू हो गया है। इन 15 दिनों में हिंदू धर्म के बड़े व्रत-उपवास और पर्वरहेंगे। इस पखवाड़े के आने वाले मंगलवार को चतुर्थी तिथि का संयोग भी बन रहा है। इस दिन अंगारक चतुर्थी व्रत किया जाएगा। इस व्रत को करने से बीमारियां दूर रहती हैं और मनोकामना भी पूरी होती है। ज्येष्ठ शुक्लपक्षमें गंगा दशहरा, निर्जलाएकादशी और पूर्णिमा पर्व मनाया जाएगा। तीनों पर्वों में गंगा स्नान का महत्व बताया गया है। भविष्य पुराण के अनुसार ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाएगा।

5 जून तक आने वाले बड़े तीजऔर त्योहार

25 मई, सोमवार - रंभा तीज

ये व्रत महिलाओं के लिए विशेष माना जाता है। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। इसको करने से वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है।

26 मई, मंगलवार - अंगारक चतुर्थी

शुक्लपक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। इस बार मंगलवार चतुर्थी तिथि का संयोग बनने पर इस व्रत को करने से शारीरिक परेशानियां और बीमारियां दूर हो सकती हैं।

30 मई, शनिवार - महाविद्या धूमावती प्राकट्योत्सव

देवी धूमावती मां दुर्गा की दश महाविद्याओं में से एक हैं। कुछ ग्रंथों मे इन्हें लक्ष्मीजी की बहन भी कहा गया है। इनकी पूजा से दरिद्रता दूर होती है।

31 मई, रविवार - महेश नवमी

ज्येष्ठ शुक्ल नवमी को महेश नवमीया महेश जयंती उत्सव माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। यह पर्वभगवानशिव और पार्वती की आराधना का दिन है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष के नवें दिन भगवान शंकर की कृपा से माहेश्वरी समाज की उत्त्पत्ति हुई थी

1 जून, सोमवार - गंगा दशहरा

ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से गंगाजी का पृथ्वी पर आगमन हुआ था। इसलिए इस दिन गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान करके दूध, बताशा, जल, रोली, नारियल, धूप, दीप से पूजन करके दान देना चाहिए।

2 जून, मंगलवार - निर्जला एकादशी व्रत

निर्जला यानि यह व्रत बिना जल ग्रहण किए और उपवास रखकर किया जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति मात्र निर्जला एकादशी का व्रत करने से साल भर की पच्चीस एकादशी का फल पा सकता है।

3 जून, बुधवार - प्रदोष व्रत

सुखी वैवाहिक जीवन में लिए प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है। प्रदोष व्रत के प्रभाव से जीवन के कष्ट दूर हो जाते हैं।

5 जून, शुक्रवार - ज्येष्ठ पूर्णिमा, संत कबीर जयंती

स्कंद और भविष्योत्तर पुराण के अनुसार ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत करने का विधान है। ये व्रत पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। इस पर्व पर गंगा स्नान का भी महत्व बताया गया है।



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