अंगारक चतुर्थी 26 मई को, आर्थिक तंगी और बीमारियों से राहत के लिए किया जाता है व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश की पूजा और व्रत किया जाता है। समृद्धि और सौभाग्य की कामना से ये व्रत रखा जाता है। इस व्रत में भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व है। काशी के धर्मशास्त्र के जानकार ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार हर वार के साथ चतुर्थी व्रत का संयोग अलग-अलग फल देने वाला होता है। मंगलवार को चतुर्थी होने से अंगारक चतुर्थी का योग बनता है। इस व्रत को करने से हर तरह की आर्थिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं।

अंगारक चतुर्थी
पं. मिश्र का कहना है कि मंगलवार के दिन चतुर्थी तिथि होने से उसे अंगारक चतुर्थी कहा गया है। गणेश पुराण के अनुसार इस दिन गणेशजी की पूजा के साथ व्रत करने से बीमारियां दूर हो जाती हैं। मंगलवार का संयोग होने से इस दिए किए गए व्रत से आर्थिक परेशानियों से भी छुटकारा मिलता है। जिन लोगों के विवाह में रुकावटें आ रही हो उनके लिए ये व्रत महत्वपूर्ण होता है। इस व्रत के प्रभाव से हर तरह के कष्ट दूर होते हैं। कर्ज या किसी भी तरह के लोन से परेशान लोगों को ये व्रत करना चाहिए।

अंगारक चतुर्थी: अब 20 अक्टूबर को बनेगा ये संयोग
हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में एक या 2 ही बार ये संयोग बनता है। इस साल माघ मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी यानी 28 जनवरी को तिलकुंद चतुर्थी पर ये संयोग बना था। इसके बाद 26 मई यानी आज मंगलवार और चतुर्थी तिथि का संयोग बन रहा है। अब 20 अक्टूबर को अश्विन महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को अंगारक विनायक चतुर्थी रहेगी।

अंगारक चतुर्थी पर मंगल पूजा
इस चतुर्थी व्रत में भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा के साथ मंगल देव की भी पूजा की जाती है। ग्रंथों के अनुसार मंगल ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। अंगारक चतुर्थी व्रत में मंगल पूजा करने से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन, लाल फूल और गुलाल चढ़ाना चाहिए। इस चतुर्थी व्रत में लाल कपड़े पहनना चाहिए। इसके साथ ही फलों के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।



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Angarak Chaturthi is celebrated on 26 May, for the relief of financial problems and diseases


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