नृसिंह जयंती 6 मई को, इस दिन की जाती है भगवान विष्णु के चौथे अवतार की पूजा

वैशाख महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि को नृसिंह चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि पर भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु को मारा था। ये भगवान विष्णु के दस प्रमुख अवतारों में चौथा है। इस बार यह पर्व 6 मई, बुधवार को है। इस दिन भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा जाता है और पूजा भी की जाती है।

  • भगवान नृसिंह की पूजा में चंदन का उपयोग खासतौर से किया जाता है। ये भगवान विष्णु का रोद्र रूप का अवतार है। इसलिए इन्हें गुस्से को कम करने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता है। चंदन ठंडक पहुंचाता है। इसलिए इसका उपयोग पूजा में विशेष तौर से किया जाता है।

क्यों लिया भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार

  • दैत्यों का राजा हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान से भी अधिक बलवान मानता था। उसे मनुष्य, देवता, पक्षी, पशु, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न अस्त्र से, न शस्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था। उसके राज्य में जो भी भगवान विष्णु की पूजा करता था, उसको दंड दिया जाता था। उसके पुत्र का नाम प्रह्लाद था।
  • प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था। यह बात जब हिरण्यकशिपु को पता चली तो पहले उसने प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी जब प्रह्लाद नहीं माना तो हिरण्यकशिपु ने उसे मृत्युदंड दे दिया। लेकिन हर बार भगवान विष्णु के चमत्कार से वह बच गया। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, वह प्रह्लाद को लेकर धधकती हुई अग्नि में बैठ गई।
  • तब भी भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। जब हिरण्यकशिपु स्वयं प्रह्लाद को मारने ही वाला था, तब भगवान विष्णु नृसिंह का अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया।


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