बद्रीनाथ धाम: इस चमत्कार ​ने दिए कोरोना संकट खत्म होने के संकेत

कोरोना महामारी के संकट के बीच जहां पूरी दुनिया में खौफ बना हुआ है, वहीं इसके लंबे समय तक चलने की अटकलें भी जारी हैं। लेकिन इसी बीच बद्री विशाल यानि बद्रीनाथ मंदिर में भगवान बद्री विशाल की ओर से मिले संकेतों ने कोरोन संकट जल्द ही कट जाने के संकेत दिए हैं!

दअरसल उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के कपाट एक लंबे शीत अवकाश के बाद 15 मई 2020,शुक्रवार को ब्रह्म मुहूर्त में खोल दिए गए। इससे पहले बद्रीनाथ मंदिर को फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया। वहीं इतिहास में पहली बार इस मौके पर केवल 11 ही लोग शामिल हुए, जबकि इस दौरान कोरोना लॉकडाउन की वजह से धाम में अन्य श्रद्धालु मौजूद नहीं थे।

ये माना जा रहा है चमत्कार...
दरअसल बद्रीनाथ के कपाट बंद किए जाने के दौरान भगवान बद्रीविशाल को घी का लेपन किया जाता है, वहीं इस दौरान भयंकर बर्फबारी व ठंड के चलते ये घी सूख जाता है, ऐसे में जब बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के बाद खोले जाते हैं, तो ये घी सूखकर कडक अवस्था में आ जाता है, लेकिन इस बार जब कपाट खुले तो घी का लेपन गीली अवस्था में ही मिला।

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खास बात ये है बद्री विशाल पर लेपन किया गया घी गीली अवस्था में कई वर्षों में एक बार मिलता है, जिसे बद्री विशाल का भाविष्य के सुखमय होना का इशारा माना जाता है। जानकारों की मानें तो इतनी सर्दी में भी घी का गीला रहना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा सकता।

ऐसे में बद्रीविशाल से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्षों बाद इस बार भी बाबा बद्रीविशाल का सुखमय भविष्य की ओर इशारा है। दरअसल बद्रीविशाल से जुड़े लोगों के अनुसार जिस वर्ष भी ये घी का लेपन गीली अवस्था में मिलता है, वह वर्ष फायनेंशियल से लेकर हर जगह देश के लिए अच्छा सिद्ध होता है।

उनके अनुसार ऐसे में इस वर्ष घी का गीला मिलना ये दर्शाता है कि ये वर्ष भी आने वाले समय में सुखमय रहेगा। ऐसे में अभी भारत सहित विश्व में कोरोना की दहशत है और यदि समय सुखमय होना है तो कोरोना को खत्म होना ही होगा, वहीं चूंकि इस बार भी बद्रीविशाल की ओर से सुखमय समय का इशारा मिला है ऐसे में माना जा रहा है कि जल्द ही कोरोना से निजाद मिल सकती है।

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वहीं केदारनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल तथा गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट अक्षय तृतीया पर 26 अप्रैल को खुल चुके हैं। द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट 11 मई को खुल चुके हैं। जबकि तृतीय केदार तुंगनाथ जी के कपाट 20 मई को तथा चतुर्थ केदार रुद्रनाथ जी के कपाट 18 मई को प्रात: खुल रहे हैं।

गेंदे के फूलों से सजाया
वहीं इससे पहले गुरुवार को योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर से कुबेर जी, उद्धव जी, गरुड़ जी, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा के साथ बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी बद्रीनाथ धाम पहुंचे।

योग ध्यान बदरी मंदिर पांडुकेश्वर में कुबेर जी, उद्धव जी और गरुड़ जी की विशेष पूजाएं हुईं। हक-हकूकधारियों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए भगवान को पुष्प अर्पित किए। भक्तों ने भगवान बद्रीनाथ से कोरोना संकट से निजात दिलाने की कामना की।

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इससे पहले बृहस्पतिवार/गुरुवार सुबह पांडुकेश्वर से डोली यात्रा बदरीनाथ के रावल के साथ बदरीनाथ धाम के लिए निकली तो पुलिस ने पांडुकेश्वर में ही यात्रा को रोक दिया। सभी के पास चेक किए गए। जो बिना पास थे, उनको लौटा दिया गया। लोगों ने डोली को रोकने का विरोध किया। उनका कहना था कि डोली को इस तरह रोकना अशुभ माना जाता है।

बदरीनाथ धाम को गेंदे के फूलों से सजाया गया है, जिनका वजन 10 क्विंटल बताया जाता है। पुष्प सेवा समिति ऋषिकेश की ओर से मंदिर को सजाया गया।



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