इस संसार में सबसे सहनशील मां ही होती है, हर हाल में माता का सम्मान करें

रविवार, 10 मई को मदर्स डे है। इस दिन दुनियाभर में मां के त्याग, सहनशीलता और प्रेम को याद किया जाता है। माता के प्रति आभार प्रकट किया जाता है। इस अवसर जानिए स्वामी विवेकानंद से जुड़ा एक ऐसा प्रसंग, जिसमें बताया गया है कि मां को महान क्यों माना जाता है।

प्रचलित प्रसंग के अनुसार एक दिन स्वामी विवेकानंदजी से एक व्यक्ति ने पूछा कि स्वामीजी इस संसार में सबसे अधिक माता को ही महत्व क्यों दिया जाता है?

स्वामीजी ने मुस्कुराकर उस व्यक्ति से कहा कि पहले तुम एक पांच सेर का पत्थर एक कपड़े में लपेटकर अपनी कमर में बांध लो। इसके बाद दिनभर ऐसी ही रहना। कल सुबह इसी अवस्था में मुझसे मिलने आना, मैं तुम्हारे इस प्रश्न का उत्तर दूंगा।

उस व्यक्ति ने स्वामीजी की बात मानकर अपनी कमर पर एक पत्थर बांध लिया और अपने घर चला गया। इसके बाद कुछ ही घंटों में वह फिर से स्वामीजी के पास पहुंच गया और बोला कि स्वामीजी आपने एक छोटा सा सवाल पूछने पर मुझे इतनी बड़ी सजा क्यों दी?

स्वामीजी ने कहा कि तुम इस पत्थर का बोझ कुछ घंटे भी नहीं उठा सके। जबकि मां बच्चे को पूरे नौ माह अपने गर्भ में रखती है। घर का पूरा काम करती है, कभी भी अपने काम से पीछे नहीं हटती, थकान और कमजोरी होने पर भी हंसती रहती है। संसार में मां से बढ़कर कोई और सहनशील नहीं है। इसीलिए मां को महान माना जाता है।

प्रसंग की सीख

इस छोटे से प्रसंग की सीख यह है कि हमें अपनी माता के साथ ही सभी महिलाओं का पूरा सम्मान करना चाहिए। महिलाओं की सहनशीलता पूजनीय और सम्मानीय है। कभी भी किसी महिला और किसी की माता का अपमान नहीं करना चाहिए। हर हाल में मां का आदर करें, कभी भी माता से ऐसी बात न करें, जिससे उनके मन को दुख होता है।



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