सोमवार और एकादशी के योग में करें विष्णुजी के साथ ही शिवजी की पूजा, मंत्रों का करें जाप

सोमवार, 18 मई को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इस दिन भगावन विष्णु के लिए व्रत और पूजा करने की परंपरा है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड में एकादशी महात्म्य नाम का अध्याय है। इस अध्याय में श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सालभर की सभी एकादशियों का महत्व बताया गया है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण की एकादशी को अपरा और अचला एकादशी कहा जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ ही शिवजी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए।

सोमवार और एकादशी का योग

इस बार सोमवार को एकादशी होने से इस दिन विष्णुजी के साथ ही शिवजी के लिए व्रत-पूजा करने पर अक्षय पुण्य मिल सकता है। एकादशी पर ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय और ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।

एकादशी पर सुबह जल्दी उठें। स्नान करते समय तीर्थों का, सभी नदियों का ध्यान करें। नहाने के बाद किसी शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिव पूजा की व्यवस्था करें। सुबह शिवलिंग या शिव मूर्ति को पवित्र जल स्नान कराएं।

ऐसे कर सकते हैं शिव पूजा

एकादशी पर सुबह जल्दी उठें और शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। मंत्र ऊँ नम: शिवाय, ऊँ महेश्वराय नम:, ऊँ शंकराय नम:, ऊँ रुद्राय नम: आदि मंत्रों का जाप करें। चंदन, फूल, प्रसाद चढ़ाएं। धूप और दीप जलाएं। शिवजी को बिल्वपत्र, धतूरा, चावल अर्पित करें। प्रसाद के रूप में फल या दूध से बनी मिठाई अर्पित करें। पूजन के बाद धूप, दीप, कर्पूर से आरती करें। शिवजी का ध्यान करते हुए आधी परिक्रमा करें। भक्तों को प्रसाद वितरित करें। ये पूजा की सामान्य विधि है। इस विधि से ब्राह्मण की मदद के बिना भी शिव पूजा कर सकते हैं।

धूप-दीप जलाकर शिव मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें और इसके लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करें।

आप चाहें तो ऊँ नमो महादेवाय, ऊँ नम: शूलपाणये, ऊँ नमो महेशाय इन मंत्रों का भी जाप कर सकते हैं।



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