गुप्त नवरात्र 2020: नवरात्रि की नौ देवियों से अलग, जानिये किस दिन होती है किस देवी की पूजा, जानिये दस महाविद्याएं

सूर्यग्रहण के ठीक अगले दिन यानि 22 जून 2020 से गुप्त नवरात्रि शुरू हो गई हैं। ऐसे में आज यानि 23 जून 2020 को गुप्त नवरात्र का दूसरा दिन है। वहीं इस बार माता का आगमन हाथी पर हुआ है, ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार अधिक बारिश होगी। वहीं माता की विदाई भैंसे पर होगी, जिससे रोग और शोक दोनों बढ़ेंगे।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार हिन्दू माह में नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है। जो कि चैत्र, आश्विन, आषाढ़ और माघ मास में आते हैं। दरअसल, चैत्र व शारदीय नवरात्रि के बीच 6 माह का अंतर होता है।

वैसे तो गुप्त नवरात्रि में भी चैत्र नवरात्रि की ही नौ माताओं की पूजा और आराधना होती है, लेकिन यदि कोई अघोर साधान करना चाहे तो दस महाविद्या में से किसी एक की साधना करता है, जो गुप्त नवरात्रि में सफल होती है।

वहीं पौष-माघ और आषाढ़ मास के नवरात्रि की गुप्त नवरात्रि कहा जाता है, गुप्त नवरात्र के इस दौरान माता की गुप्त रूप में आराधना की जाती है। अभी 22 जून से शुरु हुए नवरात्र आषाढ़ के गुप्त नवरात्र हैं। वहीं इस बार की गुप्त नवरात्रि में पंचमी और षष्ठी तिथि एक ही दिन होने से आषाढ़ की ये गुप्त नवरात्रि 8 दिन की होगी।

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पंडित शर्मा के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना के लिए महत्वपूर्ण होती है। जिसमें कि आषाढ़ सुदी प्रतिपदा (एकम) से नवमी तक दूसरा पौष सुदी प्रतिप्रदा (एकम) से नवमी तक। ये दोनों नवरात्रि युक्त संगत है, क्योंकि ये दोनों नवरात्रि अयन के पूर्व संख्या संक्रांति के हैं।

यही नवरात्रि अपने आगामी नवरात्रि की संक्रांति के साथ-साथ मित्रता वाली भी हैं, जैसे आषाढ़ संक्रांति मिथुन व ‍आश्विन की कन्या संक्रांति का स्वामी बुध हुआ और पौष संक्रांति धनु और चैत्र संक्रांति मीन का स्वामी गुरु है। अत: ये चारों नवरात्रि वर्ष में 3-3 माह की दूरी पर हैं।

गुप्त नवरात्र में देवी मां शक्ति को प्रसन्न करने का प्रमुख मंत्र-
: धूप दीप प्रसाद माता को अर्पित करें।
: रुद्राक्ष की माला से ग्यारह माला का मंत्र जप करें।
: दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
मंत्र-ॐ ह्रीं सर्वैश्वर्याकारिणी देव्यै नमो नम:।
: पेठे का भोग लगाएं।

गुप्त नवरात्र में होती हैं इन देवियों की पूजा

गुप्त नवरात्र में सामान्य नवरात्रि से अलग माता के 10 महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है, जिसमें माता काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी माता, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माता धूमावती, माता बंगलामुखी, मातंगी और कमलादेवी की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्रि में प्रलय व संहार के देव महादेव और माता काली की पूजा का विधान है।

दस महाविद्या...
मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्र दस महाविद्याओं के होते हैं,यदि कोई दस महाविद्याओं के रूप में शक्ति की उपासना कर ले तो जीवन धन धान्य राज्यसत्त ऐश्वर्य से भर जाता है।

इन नवरात्रों की प्रमुख देवी स्वरुप का नाम सर्वैश्वर्यकारिणी देवी है, माना जाता है कि यदि इन गुप्त नवरात्रों में कोई भी भक्त माता दुर्गा की पूजा साधना करता है तो मां उसके जीवन को सफल कर देती हैं,लोभी,कामी,व्यसनी,सहित यदि मांसाहारी अथवा पूजा पाठ न कर सकने वाला भी यदि इन दिनों माता की पूजा कर लें, तो जीवन में कुछ और करने की आवश्यकता ही नहीं रहती।

ज्ञात हो कि तंत्र और शाक्त मत का तो ये सबसे अहम् पर्व माना जाता है,वैशनो,पराम्बा देवी और कामाख्या देवी का ये अहम् पर्व माना जाता है,पाकिस्तान स्थित हिन्गुलाज देवी की सिद्धि का भी यही अहम् समय होता है।

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माना जाता है कि दस महाविद्याओं को सिद्ध करने के लिए ऋषि विश्वामित्र ने बहुत प्रयास किया, लेकिन सिद्धि नहीं मिली तो उन्होंने काल ज्ञान द्वारा ये पता किया कि गुप्त नवरात्र ही वो समय है, जब शक्ति के इन स्वरूपों को सिद्ध किया जा सकता है, इसके बाद ऋषि विश्वामित्र ने तो शक्तियां प्राप्त कर नयी सृष्टि तक रच डाली।

वहीं इसके अलावा लंकापति रावन का पुत्र मेघनाद अतुलनीय शक्तियां प्राप्त करना चाहता था ताकि कोई उसे जीत ना सके, इसके लिए तो मेघनाद ने अपने गुरु शुक्राचार्य से परामर्श किया, तो शुक्राचार्य ने गुप्त नवरात्रों में अपनी कुल देवी निकुम्बाला कि साधना करने को कहा, मेघनाद ने ऐसा ही किया और शक्तियां हासिल की।

राम रावण युद्ध के समय केवल मेघनाद ने ही राम भगवान सहित लक्ष्मण जी को नागपाश में बांध सका था।

कोई भी कर सकता है साधना...
ये भी कहा जाता है की यदि नास्तिक की परिहास्वश इन समय मंत्र साधना कर लें तो भी उसे फल मिल ही जाता है,यही इस गुप्त नवरात्र की महिमा है। यदि आप भी देवी मां कि मंत्र साधना करना चाहते हैं,लेकिन काम-काज की उलझनों के कारण नियमों का पालन नहीं कर पाते हैं, तो ये समय आपके लिए ही माता की कृपा ले कर आया है।

देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। इस दौरान देवी भगवती के साधक बेहद कड़े नियम के साथ व्रत और साधना करते हैं। इस दौरान लोग लंबी साधना कर दुर्लभ शक्तियों की प्राप्ति करने का प्रयास करते हैं।

पं. शर्मा के अनुसार नवरात्रि बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाने वाला त्योहार है। सामान्य नवरात्रि में आमतौर पर सात्विक व् तांत्रिक दोनों पूजा की जाती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में ज्यादातर तांत्रिक पूजा ही की जाती है। इस नवरात्रि में ज्यादा प्रचार-प्रसार न कर के अपनी साधना को गोपनीय रखा जाता है।

ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना को जितना ज्यादा गोपनीय रखा जाये, पूजा उतनी सफल उतनी सफल होती है। ऐसे में आज हम आपको इसका आसान सा तरीका बता रहे हैं...

दस महाविद्याओं की साधना :-

1. काली-
: मंत्र- क्रीं ह्रीं ह्रुं दक्षिणे कालिके स्वाहा
: हकीक की माला से मंत्र जप करें, कम से कम नौ माला का जप करें।
: लम्बी आयु,बुरे ग्रहों के प्रभाव,कालसर्प,मंगलीक बाधा,अकाल मृत्यु नाश आदि के लिए देवी काली की साधना करें।

2. तारा-
: मंत्र- ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्
: नीले कांच की माला से मंत्र जप करें, बारह माला का जप करें।
: तीब्र बुद्धि रचनात्मकता उच्च शिक्षा के लिए करें मां तारा की साधना।

3. त्रिपुर सुंदरी-
: मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदर्यै नमः
: रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें, दस माला मंत्र जप अवश्य करें।
: व्यक्तित्व विकास पूर्ण स्वास्थ्य और सुन्दर काया के लिए त्रिपुर सुंदरी देवी की साधना करें

4. भुवनेश्वरी-
: मंत्र- ॐ ह्रीं भुबनेश्वर्यै ह्रीं नमः
: स्फटिक की माला का प्रयोग करें,ग्यारह माला मंत्र जप करें।
: भूमि भवन वाहन सुख के लिए भुबनेश्वरी देवी की साधना करें।

5. छिन्नमस्ता-
: मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं ऐं वज्र वैरोचिन्यै ह्रीं फट स्वाहा
: रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप करें,दस माला मंत्र जप करना चाहिए।
: रोजगार में सफलता,नौकरी पद्दोंन्ति के लिए छिन्नमस्ता देवी की साधना करें।

6. त्रिपुर भैरवी-
: मंत्र- ॐ ह्रीं भैरवी क्लौं ह्रीं स्वाहा
: मूंगे की माला से मंत्र जप करें, पंद्रह माला मंत्र जप करें।
: सुन्दर पति या पत्नी प्राप्ति,प्रेम विवाह,शीघ्र विवाह,प्रेम में सफलता के लिए त्रिपुर भैरवी देवी की साधना करें।

7. धूमावती-
: मंत्र- ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा
: मोती की माला का प्रयोग मंत्र जप में करें, नौ माला मंत्र जप करें।
: तंत्र मंत्र जादू टोना बुरी नजर और भूत प्रेत आदि समस्त भयों से मुक्ति के लिए धूमावती देवी की साधना करें।

8. बगलामुखी-
: मंत्र- ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नम:
: हल्दी की माला या पीले कांच की माला का प्रयोग करें,आठ माला मंत्र जप को उत्तम माना गया है।
: शत्रुनाश,कोर्ट कचहरी में विजय,प्रतियोगिता में सफलता के लिए माँ बगलामुखी की साधना करें।

9. मातंगी-
: मंत्र- ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा
: स्फटिक की माला से मंत्र जप करें, बारह माला मंत्र जप करें।
: संतान प्राप्ति,पुत्र प्राप्ति आदि के लिए मातंगी देवी की साधना करें।

10. कमला-
: मंत्र- हसौ: जगत प्रसुत्तयै स्वाहा
: कमलगट्टे की माला से मंत्र जप करें,दस माला मंत्र जप करना चाहिए।
: अखंड धन धान्य प्राप्ति,ऋण नाश और लक्ष्मी जी की कृपा के लिए देवी कमला की साधना करें।



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