चिरगांव का श्रीराम जानकी मंदिर, संतान की मनोकामना लेकर पहुंचते हैं दंपत्ति और संतान होने के बाद करते हैं झूले का दान, मंदिर में टंगे हैं सैकड़ों झूले

उत्तर प्रदेश के झांसी से करीब 40 किलो मीटर दूर राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त की जन्म स्थान है चिरगांव। आजकल चिरगांव की नई पहचान यहां के श्रीराम जानकी मंदिर से भी हो रही है। पहचान का कारण भी अनोखा है। किला परिसर के प्राचीन मंदिर में प्रवेश करते ही बच्चों के सैकड़ों पालने (झूला) टंगे दिखाई देते हैं। पालने टंगे होने का कारण है यहां का हनुमान मंदिर।

यहां पुजारी हरिमोहन पाराशर कहते हैं कि मंदिर की मान्यता है कि यहां जो भी दंपत्ति संतान की मनोकामना लेकर आता है, उसे संतान प्राप्ति अवश्य होती है। संतान होने के बाद दंपत्ति मंदिर में झूला अवश्य चढ़ाते हैं।
करीब 40 साल से श्रीराम जानकी मंदिर में झूले चढ़ाने का सिलसिला चल रहा है। इस दौरान हजारों की संख्या में लोग यहां आए और उन्हें संतान प्राप्ति हुई है।

मंदिर में अब तक हजारों पालने श्रद्धालुओ द्वारा चढ़ाए गए हैं। अब मंदिर में झूले रखने की जगह नहीं बची है तो छत पर झूले रखवा दिए गए हैं। मंदिर में ग्वालियर, कानपुर, झांसी और आसपास के 100 किलोमीटर क्षेत्र से लोग आते हैं।



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