गणेशोत्सव 2020 : श्री गणेश के दिव्य मंत्र जिनके बिना अधूरी है आपकी पूजा

सनातन धर्म के आदि पंच देवों में से एक व कलयुग के प्रमुख देव श्रीगणेश माने जाते हैं। भगवान गणेश (Lord Ganesha) रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता माने गए हैं।

वहीं प्रथम पूज्य श्रीगणेश का प्रमुख त्योहार गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है, जो इस बार यानि वर्ष 2020 में 22 अगस्त को मनाया जाएगा। मान्यता है कि गणेश जी का जन्म Borth of Shree Ganesh भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से गणेश जी का उत्सव गणपति प्रतिमा की स्थापना कर उनकी पूजा से आरंभ होता है और लगातार दस दिनों तक घर में रखकर अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा की विदाई की जाती है।

इस दिन ढोल नगाड़े बजाते हुए, नाचते गाते हुए गणेश प्रतिमा को विसर्जन के लिये ले जाया जाता है। विसर्जन के साथ ही गणेशोत्सव की समाप्ति होती है।

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पंडित सुनील शर्मा के अनुसार जब जीवन में हर तरफ दुख हो, संकट हो और निकलने का कोई मार्ग न दिखे तो गौरीपुत्र गजानन की आराधना तुरंत फल देती है। भगवान गणेश की सात्विक साधनाएं अत्यंत सरल तथा प्रभावी होती है।

हिंदू धर्म के आदि पंचदेवों में श्रीगणेश, विष्णु, दुर्गा, शिव और सूर्य को माना जाता है। इनमें भी सर्वप्रथम भगवान गणेश की पूजाकी जाती है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार गणेश जी को भौतिक, दैहिक और अध्यात्मिक कामनाओं के सिद्धि के लिए सबसे पहले पूजा जाता है। इसलिए इन्हें गणाध्यक्ष और मंगलमूर्ति भी कहा जाता है।

इनमें अधिक विधि-विधान की भी जरूरत नहीं होती केवल मन में भाव होने मात्र से ही गणेश अपने भक्त को हर संकट से बाहर निकालते हैं और सुख-समृदि्ध का मार्ग दिखाते हैं।

Ganesh Utsav 2020: Divine mantras of lord shri ganesh

पंडितों के अनुसार भगवान गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता हैं। वे भक्तों की बाधा, संकट, रोग-दोष व दरिद्रता को दूर करते हैं। वहीं शास्त्रों में श्री गणेश जी की विशेष पूजा का दिन बुधवार माना गया है।

धार्मिक पौराणिक शास्त्रों के अनुसार श्री विनायकजी की अर्चना से अर्थ, विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, प्रसिद्धि, सिद्धि की उपलब्धि सहज ही प्राप्त हो जाती है। ऐसे विघ्न विनाशक भगवान श्रीगणेश का निम्न मंत्रों से जाप करने से विघ्न, आलस्य, रोग आदि का तत्काल निवारण हो जाता है।

-: गणेश गायत्री मंत्र :
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुद्धि प्रचोदयात।।

यह गणेश गायत्री मंत्र है। इस मंत्र का प्रतिदिन शांत मन से 108 बार जप करने से गणेशजी की कृपा होती है। लगातार 11 दिन तक गणेश गायत्री मंत्र के जप से व्यक्ति के पूर्व कर्मो का बुरा फल खत्म होने लगता है और भाग्य उसके साथ हो जाता है।

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भगवान श्रीगणेश के तुरंत असरकारी मंत्र...
गणपतिजी का बीज मंत्र 'गं' है। इनसे युक्त मंत्र- 'ॐ गं गणपतये नमः' का जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। षडाक्षर मंत्र का जप आर्थिक प्रगति व समृद्धि प्रदायक है।

- ॐ वक्रतुंडाय हुम्‌।।

किसी के द्वारा नेष्ट के लिए की गई क्रिया को नष्ट करने के लिए, विविध कामनाओं की पूर्ति के लिए उच्छिष्ट गणपति की साधना करना चाहिए। इनका जप करते समय मुंह में गुड़, लौंग, इलायची, पताशा, ताम्बुल, सुपारी होना चाहिए। यह साधना अक्षय भंडार प्रदान करने वाली है। इसमें पवित्रता-अपवित्रता का विशेष बंधन नहीं है।

: उच्छिष्ट गणपति का मंत्र

- ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।।

: आलस्य, निराशा, कलह, विघ्न दूर करने के लिए मंत्र -

- गं क्षिप्रप्रसादनाय नम:।।

: विघ्न को दूर करके धन व आत्मबल की प्राप्ति के मंत्र-

- 'ॐ गं नमः।। '

: रोजगार की प्राप्ति व आर्थिक वृद्धि के लिए लक्ष्मी विनायक मंत्र-

- ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

: विवाह में आने वाले दोषों को दूर करने व शीघ्र विवाह व अनुकूल जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए-

- ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

इन मंत्रों के अतिरिक्त गणपति अथर्वशीर्ष, संकटनाशन गणेश स्तोत्र, गणेशकवच, संतान गणपति स्तोत्र, ऋणहर्ता गणपति स्तोत्र, मयूरेश स्तोत्र, गणेश चालीसा का पाठ करने से गणेशजी की कृपा प्राप्त होती है।

-: तांत्रिक गणेश मंत्र

ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।।

यूं तो यह एक तांत्रिक मंत्र है जिसकी साधना में कुछ खास चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। परन्तु रोज सुबह महादेवजी, पार्वतीजी तथा गणेशजी की पूजा करने के बाद इस मंत्र का 108 बार जाप करने व्यक्ति के समस्त सुख-दुख तुरंत खत्म होते हैं। लेकिन इस मंत्र के प्रयोग के समय व्यक्ति को पूर्ण सात्विकता रखनी होती है और क्रोध, मांस, मदिरा, परस्त्री से संबंधों से दूर रहना होता है।

-: गणेश कुबेर मंत्र

ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।

यदि व्यक्ति पर अत्यन्त भारी कर्जा हो जाए, आर्थिक परेशानियां आए-दिन दुखी करने लगे। तब गणेशजी की पूजा करने के बाद गणेश कुबेर मंत्र का नियमित रूप से जाप क रने से व्यक्ति का कर्जा चुकना शुरू हो जाता है तथा धन के नए स्त्रोत प्राप्त होते हैं जिनसे व्यक्ति का भाग्य चमक उठता है।

बुधवार के दिन गणेश जी को सिंदूर चढ़ाना विशेष फलकारी कहलाता है। सिंदूर चढ़ाते समय विशेष मंत्र को भी पढऩा चाहिए, मान्यता है कि अन्य देवताओं से इतर शिव परिवार या शिव के सभी अंश अवतारों पर सिंदूर चढ़ाने का एक अलग ही महत्व है। इसलिए हर बुधवार को इस मंत्र के साथ गणेशजी को सिंदूर चढ़ाना चाहिए।
मंत्र:
सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम।
शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम।।

इसके अलावा माना जाता है कि बुधवार को गणेश जी को शमी के पत्ते चढ़ाने पर बुद्धि तेज होती है, साथ ही सभी क्लेशों का भी नाश होने के अलावा मानसिक शांति भी मिलती है। शमी के पत्ते चढाते समय मंत्र का जाप जरूर करें, जिससे कि गणेश जी जल्द प्रसन्न होगा।
मंत्र:
त्वत्प्रियाणि सुपुष्पाणि कोमलानि शुभानि वै।
शमी दलानि हेरम्ब गृहाण गणनायक।


किसी भी प्रकार के कार्य प्रारंभ करने के पूर्व श्री गणेश जी का स्मरण इस मंत्र के साथ अवश्य करना चाहिए, आपके शुभकार्य निश्चित ही सिद्ध होंगे।

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥



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