जन्म कुंडली में दोष व कुयोग का ऐसे करें उपचार, जानें ​मंत्र

कई बार तमाम तरह की कोशिशों के बावजूद या तो हम सफल नहीं हो पाते या सफलता के बिलकुल नजदीक पहुंचते ही वह हाथों से फिसल जाती है। इसके तमाम तरह के कारण बताए जाते हैं, लेकिन पूरी शिद्दत से कार्य करने के बाद भी आपको अपने किए कार्य का श्रेय न मिले तो यह काफी दुख देने वाला होता है।

ज्योतिष में इसका कारण आपकी कुंडली के आधार पर देखा जाता है। माना जाता है कि दरअसल तमाम तरह के प्रयासों के बावजूद सफलता का हाथ से निकल जाने की मुख्य वजह जन्म कुंडली में दोष व कुयोग होते हैं। ऐसे में सामान्य व्यक्ति जहां इससे खबरा जाता है, वहीं कई बार कुछ लोग जानबुझकर आपकी ऐसी स्थिति का फायदा भी उठाते हैं। ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं, जिनके संबंध में कहा जाता है कि इन्हें अपनाने से कई तरह के दोष व कुयोग दूर हो जाते हैं, वहीं चूकिं आप इन्हें अपने ही द्वारा कर सकते हैं, अत: आपको किसी ज्योतिष या अन्य जगहों पर भटकना भी नहीं पड़ता।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार जन्म कुंडली में मौजूद दोषों के कारण व्यक्ति को जीवन में अनेकों बार असफलताओं का सामना करना पड़ता है। वहीं इन कारणों से जीवन में प्रगति का पथ अवरुद्ध हो जाता है साथ ही आर्थिक परेशानियां भी खड़ी हो जाती हैं। ऐसे में यदि जन्म कुंडली में केमद्रुम योग या कालसर्प योग या दरिद्री योग बन रहा है, तब आर्थिक परेशानियों का सामना अधिक करना पड़ सकता है। यहां तक की कई बार तो कर्जे इतने अधिक हो जाते हैं कि उतरने का नाम ही नहीं लेते। ऎसे ही कई प्रकार की परेशानियों से मुक्ति हम घर बैठे मंत्रोपचार बताया से पा सकते हैं।

विघ्नबाधा दूर करने का गणेश मंत्र : Ganesh Mantra For Hurdles
किसी भी शुभ मुहूर्त तथा शुभ वार में श्रीगणेश यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। यंत्र स्थापित कर उसकी पंचोपचार अथवा षोडशोपचार से पूजा करनी चाहिए। उसके बाद ' ऊँ गं गणपतये नम: ' मंत्र का एक लाख जप करना चाहिए। जप संख्या पूर्ण होने पर व्यक्ति के जीवन की सभी प्रकार की बाधाएं स्वत: दूर होने लगती हैं और बिगड़ते हुए काम बनना आरंभ हो जाते हैं।

मंत्र –
ऊँ गं गणपतये नम:।।

: कर्ज मुक्ति के लिए कुबेर मंत्र : Kuber Mantra For debts
किसी भी शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर मुख करके बैठना चाहिए और अपने सामने कुबेर यंत्र की स्थापना करनी चाहिए। यंत्र का पूजन करना चाहिए। उसके बाद रात्रि के प्रथम प्रहर में किसी भी एक कुबेर मंत्र का जाप एक लाख की संख्या में करना चाहिए।

कुबेर मंत्र : Kuber Mantra
ऊँ श्रीं ऊँ ह्रीं श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नम: ।
ऊँ श्रीं यक्षाय कुबेराय सिद्धिं समृद्धिं कुरु कुरु स्वाहा ।
यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा ।

इसके बाद यानि जाप समाप्त होने पर बिल्वपत्रों से दशांश हवन करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को शीघ्रता ना हो तब इस कुबेर मंत्र का अनुष्ठान धनतेरस के दिन करना अधिक शुभफल प्रदान करता है। काली चौदस अथवा दीपावली की रात्रि में भी इस मंत्र का अनुष्ठान अत्यधिक शुभ फल देने वाला होता है।

: दरिद्र योग की शांति : Remedies For Poverty
यदि जन्म कुंडली के अनुसार धन का अभाव व्यक्ति के जीवन में लगातार बना हुआ है तब ऎसे में कुछ मंत्रों का जाप करके धनाभाव दूर किया जा सकता है। ग्रह शांति मंत्र के साथ नवग्रहों का पूजन करके नीचे लिखे मंत्रों में से किसी भी एक मंत्र का एक लाख जप किया जाना चाहिए। यदि रविमंत्र करते हैं तब आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति भौम मंत्र करता है तब उसके साथ में भौम स्तोत्र अथवा मंगल स्तोत्र का पाठ भी अवश्य करना चाहिए।

निर्धनता नाशक रविमंत्र : Ravi Mantra For Poverty
ऊँ ह्रीं घृणि: सूर्य आदित्य: श्रीं।।

निर्धनता नाशक भौम मंत्र : Bhaum Mantra For Poverty
ऊँ श्रीं ऋणहर्त्रे नमस्तुभ्यं दु:खदारिद्रयनाशिने नभसि घोतमानाय मंगलप्रद मंगल ह्रीं ।।

: कालसर्प योग : Kalsarpa Yoga
इस योग के बनने के साथ दशा भी यदि प्रतिकूल चल रही हो तो अनेकों प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ जाता है जिससे व्यक्ति हताश तथा निराश हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि कालसर्प योग का प्रभाव उसे आर्थिक, मानसिक अथवा व्यवसायिक रुप से हानि पहुंचा रहा है तब इस योग की शांति का पाठ अवश्य करना चाहिए। कई बार इस योग के बुरे प्रभाव से व्यक्ति किसी ना किसी प्रकार की परेशानी में फंसता ही रहता है। एक मुसीबत टली नहीं कि दूसरी सामने आ जाती है। इस योग की शांति के लिए आवश्यक नहीं कि नासिक अथवा महाकालेश्वर अथवा किसी अन्य स्थान पर ही जाया जाए। व्यक्ति अपने निवास स्थान पर रहकर भी इस योग का निवारण मंत्रोपचार से कर सकता है।

कालसर्प योग का उपचार : Remedies For Kalsarpa Yoga
कालसर्प योग की शांति के लिए कुछ शर्तों का होना आवश्यक है, जैसे – जिस दिन इस योग की शांति कराई जाए उस दिन पूर्णा तिथि हो या आश्लेषा अथवा विशाखा अथवा ध्रुवसंज्ञक नक्षत्र हो। इन नक्षत्रों के साथ शुभ ग्रहों का वार हो, चंद्रमा बली हो। व्यक्ति यदि किसी पंडित अथवा पुरोहित से शांति करवा रहा है तो उसे स्वयं उपस्थित होकर अपने समक्ष विधिपूर्वक सब काम करना चाहिए। कालसर्प यंत्र की स्थापना करनी चाहिए, फिर उसका पंचोपचार अथवा षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। पूजन में सुगन्धित द्रव्यों का उपयोग करना चाहिए।

पूजन के बाद इसके मंत्र का सवा लाख की संख्या में जप करना चाहिए। जप संख्या पूरी होने पर पूरे विधान के साथ हवन करना चाहिए, तर्पण करना चाहिए, मार्जन करना चाहिए तथा अंत में यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए। ऎसा करने पर कालसर्प योग की शांति होती है और शुभ फलों की वृद्धि होती है।


: केमद्रुम योग : Kemdrum Yoga
जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा से एक भाव आगे और एक भाव पीछे कोई ग्रह स्थित नहीं है तब इसे केमद्रुम योग कहा जाता है। (यदि चंद्रमा के आगे या पीछे राहु/केतु हैं तब भी चंद्रमा को अकेला ही माना जाएगा और केमद्र्म योग बनेगा) चंद्रमा के आगे पीछे कोई ग्रह ना होने से यह अकेला पड़ जाता है और व्यक्ति को कोई ना कोई भय सताता रहता है। चंद्रमा मन है और मन को किसी का सहारा ना हो तब परेशानी आती है।

केमद्रुम योग के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन में एक समय ऎसा देखना पड़ जाता है जब उसे संघर्षों से होकर निकलना पड़ता है। ये संघर्ष किसी भी रूप में हो सकते हैं। जब संघर्ष का समय बीत जाता है तब नया चंद्रमा धुला हुआ सा सामने आता है और व्यक्ति का मन अब दृढ़ निश्चयी बनता है।

यदि किसी की जन्म कुंडली में केमद्रुम योग बन रहा है तो उसके भंग होने के योग भी कुंडली में ही मौजूद होते हैं। अगर चंद्रमा से केन्द्र में कोई ग्रह हो तब यह योग भंग हो जाता है। यदि शुभ ग्रह चंद्रमा से केन्द्र में हो प्रबल रुप से भंग होता है, लेकिन जो योग बना है उसका कुछ फल तो जीवन में एक बार भोगना ही पड़ता है।

केमद्र्म योग की शांति : Remedies For Kemdrum Yoga
यदि किसी जातक की कुंडली में केमद्रुम योग बन रहा है तब इस योग की शांति करके इसके अशुभ फलों की रोकथाम की जा सकती है क्योंकि इस योग के कारण अनेकों बार धन हानि का सामना करना पड़ जाता है। इस योग की शांति के लिए “लक्ष्मी मंत्र” का अनुष्ठान किया जा सकता है।

नवरात्रि, दीपावली अथवा किसी अन्य शुभ दिन में अनुष्ठान किया जा सकता है। सुबह स्नानादि के बाद एक लक्ष्मी यंत्र लेकर उसकी विधिवत स्थापना करनी चाहिए। लक्ष्मी यंत्र लेकर उसका पंचोपचार अथवा षोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। पूजन करने के बाद नीचे लिखें मंत्र का एक मंत्र का चार लाख जप करना चाहिए। इस अनुष्ठान के साथ ही यदि श्रीसूक्त तथा लक्ष्मी सूक्त का पाठ भी किया जाए तो विशेष लाभकारी फल मिलते हैं।

ऎं श्रीं ह्रीं क्लीं
ऊँ ऎं ह्रीं श्रीं क्लीं ह् सौ: जगत्प्रसूत्यै नम: ।।



source https://www.patrika.com/religion-and-spirituality/defects-and-birth-defects-in-horoscopes-and-their-treatment-by-mantras-6368672/

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