हनुमानजी ने कैसे तोड़ा अर्जुन का घमंड, अहंकार बड़े-बड़े योद्धाओं को भी छोटा कर देता है, इस बुराई से बचना चाहिए

घमंड एक ऐसी बुराई है, जिसकी वजह से बड़े-बड़े योद्धाओं को भी पराजित होना पड़ा था। महाभारत में हनुमानजी ने भीम के अलावा अर्जुन का भी घमंड तोड़ा था। जानिए पूरी कथा...

प्रचलित कथा के अनुसार एक बार अर्जुन रामेश्वरम् की ओर से गुजर रहे थे। उस समय रामसेतु के पास ही एक वृद्ध वानर ध्यान में बैठे थे। अर्जुन ने रामसेतु को देखा और वह सेतु का मजाक उड़ाने लगे।

वृद्ध वानर कोई और नहीं, बल्कि वे स्वयं हनुमानजी ही थे। अर्जुन उन्हें पहचान नहीं सके और बोले कि श्रीराम श्रेष्ठ धनुर्धर थे, लेकिन फिर भी उन्होंने पत्थरों से सेतु क्यों बनवाया। इससे अच्छा सेतु तो मैं अपने बाणों से बना सकता हूं।

वानर ने अर्जुन से कहा कि भाई ऐसा नहीं है। उस समय श्रीराम की वानर सेना में कई वानर ऐसे थे, जिनका वजन बाणों से बना सेतु झेल नहीं पाता। इसीलिए पत्थरों से सेतु बनवाया था।

अर्जुन ने कहा कि मैं दुनिया का श्रेष्ठ धनुर्धर हूं, मेरे बाणों का सेतु कोई नहीं तोड़ सकता है। वृद्ध वानर ने कहा कि भाई तुम्हारे बाणों का सेतु मेरा वजन भी नहीं झेल पाएगा।

इस बात पर अर्जुन ने वृद्ध वानर से कहा कि ठीक हैं, मैं बाणों से सेतु बनाता हूं, आप उसे तोड़कर दिखाएं। अगर आपने ऐसा कर दिया तो मैं अपने आपको सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर कहना छोड़ दूंगा। ऐसा कहकर अर्जुन ने वहां अपने बाणों से एक सेतु बना दिया।

वृद्ध वानर ने जैसे ही उस सेतु पर पैर रखा वह सेतु टूट गया। ये देखकर अर्जुन हैरान हो गए। तब हनुमानजी अपने वास्तविक स्वरूप में आए और उन्होंने अर्जुन को समझाया कि तुमने अपने अहंकार में श्रीराम का अपमान किया है। ये सुनकर अर्जुन को अपनी गलती का अहसास हो गया।

प्रसंग की सीख

इस प्रसंग की सीख यही है कि घमंड ऐसी बुराई है, जिसकी वजह से हमें घर-परिवार और समाज में अपमानित होना पड़ सकता है। इस बुराई से बचना चाहिए।



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