कोई हमें बुरी बातें कहता है तो उन बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, अगर ध्यान देंगे तो क्रोध आएगा और बात ज्यादा बिगड़ जाएगी

दो लोगों में विवाद तभी होता है, जब दोनों लोग एक ही समय पर एक साथ क्रोधित हो जाते हैं। क्रोध में वाणी पर नियंत्रण नहीं रहता है। वाद-विवाद से बचने के लिए मन शांत रखना चाहिए और दूसरों की बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। विवादों से कैसे बच सकते हैं, ये एक लोक कथा से समझ सकते हैं। जानिए ये कथा...

पुराने समय में एक लड़का दूसरों को बार-बार परेशान करता था, अपशब्द कहता, अपमानित करता था। यही उसकी आदत बन गई थी। उसे ऐसा करने में मजा आता था। आसपास के सभी लोग उसकी वजह से दुखी थे।

वह लड़का दूसरों को अपमानित करता तो लोग पलटकर जवाब देते तो वाद-विवाद हो जाता था। रोज उसकी वजह से लड़ाई-झगड़े होते थे। उन दिनों गांव में एक संत पहुंचे। संत बहुत ही विद्वान थे। वे गांव के बाहर छोटी सी कुटिया बनाकर रह रहे थे।

गांव के लोग रोज प्रवचन सुनने उनके पास पहुंच रहे थे। एक दिन वह लड़का भी संत की कुटिया के पास पहुंच गया और संत को अपमानित करने लगा। अपशब्द कहकर वहां से भाग गया। उसे लग रहा था कि संत भी गुस्सा होकर मारने के लिए दौड़ेंगे तो मजा आएगा। लेकिन, साधु ने उस लड़के की ओर देखा तक नहीं। वे लोगों को प्रवचन देने रहे थे।

लड़का वापस साधु के पास पहुंचा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा। गांव के लोग हैरान थे। संत उस लड़के को जवाब दे ही नहीं रहे थे। तभी गांव के व्यक्ति ने संत से कहा कि गुरुजी ये लड़का बहुत बदमाश है। गांव के लोगों को इसी तरह परेशान करता है।

संत ने कहा कि भाई वो मेरे साथ भी यही सलूक कर रहा है, लेकिन मैं उसकी अपमानजनक बातें और अपशब्द ग्रहण ही नहीं कर रहा हूं। ये सारे बारे उसके मुंह में ही हैं। देखो उसका मुंह ही कितना गंदा है। उसकी बातें उसी के पास हैं।

लड़का संत की बातें सुन रहा था। उसे समझ आ गया कि अगर संत इन बातों को ग्रहण नहीं करेंगे तो उन्हें गुस्सा नहीं आएगा, ये बातें तो मेरे पास ही हैं। मैं कितना गंदा लड़का हूं। उसे अपनी गलती का अहसास हो गया।

लड़के ने संत से क्षमा मांगी और गांवों के लोगों के सामने संकल्प किया कि वह अब से सभी के साथ प्रेम से रहेगा। कभी किसी का अपमान नहीं करेगा।

प्रसंग की सीख

इस प्रसंग की सीख यह है कि अगर कोई हमें गलत बात बोल रहा है तो उसे ग्रहण ही नहीं करना चाहिए। अगर दूसरों की बुरी बातों पर ध्यान नहीं देंगे तो हमारा मन शांत रहेगा और हम वाद-विवाद से बच सकते हैं।



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