हनुमानजी ने सूर्यदेव को बनाया था गुरु, सूर्य के साथ चलते-चलते प्राप्त किया था शास्त्रों का ज्ञान, गुरु से जहां भी जैसे भी शिक्षा मिले ग्रहण करनी चाहिए

5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है। गुरु का स्थान सभी देवताओं से ऊंचा माना गया है। गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश कहा गया है। सिर्फ मनुष्यों के लिए ही नहीं भगवानों के अवतारों ने भी गुरु से ही ज्ञान प्राप्त किया है।

भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम ने वशिष्ठ मुनि और विश्वामित्र को गुरु बनाया था। इन्हीं से शास्त्रों का और शस्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। श्रीकृष्ण ने सांदीपनि ऋषि को गुरु बनाया था। शिवजी के अंशावतार हनुमानजी ने सूर्यदेव को गुरु बनाया था। हनुमानजी ने तो सूर्यदेव के साथ चलते-चलते शिक्षा ग्रहण की थी। जानिए पूरा प्रसंग...

ये हनुमानजी की शिक्षा से जुड़ा प्रसंग

हनुमानजी जब शिक्षा ग्रहण करने के योग्य हुए तो उनके माता-पिता अंजनी और केसरी ने उन्हें सूर्यदेव के पास भेजा। माता-पिता ने हनुमानजी को समझाया कि वे सूर्यदेव को गुरु बनाए और उनसे ही ज्ञान हासिल करे। माता-पिता की आज्ञा पाकर हनुमानजी ने सूर्यदेव के पास पहुंचे।

हनुमानजी ने सूर्य से गुरु बनने की प्रार्थना की। तब सूर्य ने कहा कि मैं तो एक पल के लिए भी कहीं रुक नहीं सकता और न ही मैं रथ से उतर सकता हूं। ऐसी स्थिति में मैं तुम्हें शास्त्रों का ज्ञान कैसे दे सकता हूं?

सूर्यदेव की बात सुनकर हनुमानजी ने कहा कि आप बिना अपनी गति कम किए ही मुझे शिक्षा दीजिए। मैं आपके साथ चलते हुए ही ज्ञान ग्रहण करूंगा।

सूर्यदेव इस बात के लिए तैयार हो गए। सूर्यदेव वेद आदि शास्त्रों का रहस्य बोलते जाते और हनुमानजी शांत भाव से उसे ग्रहण करते जाते। इस तरह सूर्य की कृपा से हनुमानजी को शिक्षा प्राप्त हुई।

इस प्रसंग की सीख यह है कि हमें गुरु से जहां भी ज्ञान मिले, उसे शांत रहकर ग्रहण कर लेना चाहिए।



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