पूर्णिमा का आप पर असर, चंद्रमा का प्रभाव इन लोगों पर होता है खास- जानें निगेटिव असर से बचाव के उपाय

पूर्णिमा पंचांग के अनुसार मास की 15वीं और शुक्लपक्ष की अंतिम तिथि है, जिस दिन चंद्रमा आकाश में पूरा होता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। हर माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व अथवा व्रत अवश्य मनाया जाता हैं। ऐसे में इस बार अधिक मास की पूर्णिमा 1 अक्टूबर को है। धार्मिक रूप से यह तिथि अपने आप में महत्वपूर्ण है। इस दिन लक्ष्मी नारायण की पूजा, दान-पुण्य व पवित्र नदी में स्नान का विधान है।

हिन्दू पंचांग के अनुसार माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या कहते हैं। वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनमें से ही सबसे महत्वपूर्ण दिन है पूर्णिमा। सभी का अलग-अलग महत्व है। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है।

दरअसल ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक माना गया है। चंद्रमा चतुर्थ भाव का भी कारक है। यह माता का सुख,भवन और आवास का सुख, वाहन का सुख और अन्य सुख-सुविधाएं देने वाला होता है। चंद्रमा रोहिणी हस्त और श्रवण नक्षत्र का स्वामी है। यदि किसी की जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव में अथवा चतुर्थ भाव का कारक चंद्रमा अपनी उच्च स्थिति में हो या बली हो तो वह जातक अपने जीवन में सभी सुख-सुविधाओं को प्राप्त करता है। चंद्रमा मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्रों में शुभ होता है और बलवान होता है। चंद्रमा के मित्र ग्रह सूर्य और बुध हैं। मंगल, गुरु, शुक्र और शनि सम ग्रह हैं। राहु और केतु चंद्रमा के शत्रु ग्रह हैं। चंद्रमा की दिशा वायव्य है। चंद्रमा वैश्य वर्ण के अंतर्गत आते हैं। सत्वगुणी हैं। मुख्य रस नमकीन है। पूर्ण चंद्रमा सौम्य ग्रह की श्रेणी में आता है जबकि क्षीण चंद्रमा पाप ग्रह की श्रेणी में आता है।

इन तिथियों के नाम निम्न हैं- पूर्णिमा (पूरनमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और अमावस्या (अमावस)।

वर्ष की 12 पूर्णिमाओं में कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, बुद्ध पूर्णिमा आदि मुख्य पूर्णिमा मानी गई है।

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कृष्ण पक्ष की एकादशी से शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि तक चंद्रमा क्षीण होते हैं। चंद्र वृष राशि में 3 से 27 अंश तक मूल त्रिकोण में होता है। चंद्रमा के कारक देव महादेव माने जाते हैं। काल पुरुष के अनुसार चंद्रमा मन का कारक है और गले और हृदय पर आधिपत्य रखता है। यदि गोचर में चंद्रमा उच्च राशि, मूल त्रिकोण वृषभ राशि में हो तो उस समय गले और हृदय संबंधी ऑपरेशन से बचना चाहिए। चंद्रमा अपने भाव से सप्तम भाव पर अपनी पूर्ण दृष्टि रखता है। चंद्रमा की अपनी राशि कर्क होती है। उच्च राशि वृषभ है और नीच राशि वृश्चिक होती है। यह तीव्र गति का ग्रह है। एक राशि को पार करने में सवा 2 दिन लगते हैं।

पूर्णिमा के दिन : चांद का धरती के जल से संबंध है। जब पूर्णिमा आती है तो समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पन्न होता है, क्योंकि चंद्रमा समुद्र के जल को ऊपर की ओर खींचता है। मानव के शरीर में भी लगभग 85 प्रतिशत जल रहता है। पूर्णिमा के दिन इस जल की गति और गुण बदल जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस दिन चन्द्रमा का प्रभाव काफी तेज होता है इन कारणों से शरीर के अंदर रक्‍त में न्यूरॉन सेल्स क्रियाशील हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में इंसान ज्यादा उत्तेजित या भावुक रहता है।

खगोल शास्त्र के अनुसार पृथ्वी के सबसे निकट होने कारण मानव प्रवृत्तियों पर इसका बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जिन व्यक्तियों का चंद्रमा नीच का है या कम अंशों का है तो पूर्ण चंद्रमा के कारण अर्थात पूर्णिमा के आसपास ऐसे लोगों को अधिक क्रोध आता है। बीपी बढ़ने की शिकायत रहती है। कुछ लोग अपना धैर्य खो देते हैं।

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अधिक मास पूर्णिमा पर जरूर करें ये...
अधिक मास पूर्णिमा (Adhik Maas Purnima) पर दीप दान (Deep Daan) को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन दीप दान करने से कई शुभफलों की प्राप्ति होती है। वैसे तो अधिक मास में रोज ही एक दीप दान करना चाहिए। लेकिन जो व्यक्ति पूरे अधिक मास में दीप दान नहीं कर सकते वह अधिक मास की पूर्णिमा पर दीप दान अवश्य करें। इसके अलावा क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है अधिक मास पूर्णिमा पर दीप दान करना आइए जानते हैं...

अधिक मास पूर्णिमा पर दीप दान का महत्व (Adhik Maas Purnima Deep Daan Ka Mahatva)

शास्त्रों में कार्तिक मास और अधिक मास में दीप दान का बहुत ही अधिक महत्व बताया गया है। अधिक मास में वैसे तो प्रत्येक दिन एक दीप दान अवश्य करना चाहिए। लेकिन यदि आप रोज एक दीप दान नहीं कर सकते तो अधिक मास की पूर्णिमा पर दीप दान अवश्य करें। इस दिन दीप दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है।अधिक मास की पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन दीप दान करने से भगवान विष्णु का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दीप दान अवश्य करना चाहिए यदि आप ऐसा नहीं कर सकते तो अपने नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान अवश्य करें। इसके बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करके उनके आगे एक दीपक अवश्य जलाएं।

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इसके बाद शाम के समय भी भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें और तुलसी के पौधे के नीचे एक दीपक जलाएं। तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाने के बाद किसी पवित्र नदी के तट पर भी दीपक जलाएं और यदि आपके घर के पास कोई पवित्र नदी नहीं है तो आप जहां पर पानी रखते हैं वहां पर एक दीपक अवश्य जलाएं।शास्त्रों के अनुसार इस दिन दीप दान करने से 10 यज्ञों के बराबर फल प्राप्त होता है।

इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस दिन राशि के अनुसार कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं तो जातकों की मन की मुराद पूरी होती है।

राशि के अनुसार ये करें...

1. मेष राशि - अधिक मास की पूर्णिमा के दिन आर्थिक समृद्धि की प्राप्ति के लिए गुड़ का दान अवश्य करें।

2. वृषभ राशि - जीवन में सुख और समृद्धि के लिए इस राशि के लोग पूर्णिमा के दिन मिश्री का दान अवश्य करें।

3. मिथुन राशि - अधिक मास की पूर्णिमा के दिन वैवाहिक जीवन में चली आ रही को परेशानी समाप्त करने के लिए हरे रंग की मूंग की दाल का दान करें।

4. कर्क राशि - मानसिक शांति के लिए इस राशि के जातक अधिक मास की पूर्णिमा के दिन चावलों का दान अवश्य करें।

5. सिंह राशि - इस राशि के लोग मान- सम्मान में वृद्धि के लिए अधिक मास की पूर्णिमा पर गेहूं का दान अवश्य करेंगी।

6. कन्या राशि - जीवन की सभी समस्याएं दूर करने के लिए इस राशि के लोग अधिक मास की पूर्णिमा के दिन जानवरों को हरे रंग का चारा खिलाएं।

7. तुला राशि - इस राशि के लोग ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए अधिक मास की पूर्णिमा के दिन कन्याओं को खीर का दान करें।

8. वृश्चिक राशि - शत्रुओं के नाश के लिए इस राशि के लोग आश्विन अधिक मास की पूर्णिमा के दिन गुड़ और चना बंदरों को खिलाएं।

 

9. धनु राशि - इस राशि के लोग सभी सुखों की प्राप्ति के लिए अधिक मास की पूर्णिमा के दिन किसी मंदिर में चने की दाल का दान करें।

10. मकर राशि - नौकरी में आ रही सभी तरह की परेशानी दूर करने के लिए इस राशि के लोगों को अधिक मास की पूर्णिमा के दिन कंबल का दान करें।

11. कुंभ राशि - कुंभ राशि के लोग बिजनेस में आ रही सभी तरह की परेशानियों को दूर करने के लिए अधिक मास की पूर्णिमा के दिन काली उड़द की दाल का दान करें।

12. मीन राशि - जीवन में कभी भी धन की कोई कमीं न हो इसके लिए मीन राशि के जातक अधिक मास की पूर्णिमा के दिन हल्दी और बेसन की मिठाई का दान करें।

इस दिन न करें ये कार्य : Don't do this

: इस दिन किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
: इस दिन शराब आदि नशे से भी दूर रहना चाहिए। इसके शरीर पर ही नहीं, आपके भविष्य पर भी दुष्परिणाम हो सकते हैं।
: जानकार लोग तो यह कहते हैं कि चौदस, पूर्णिमा और प्रतिपदा उक्त 3 दिन पवित्र बने रहने में ही भलाई है।



source https://www.patrika.com/dharma-karma/adhik-maas-purnima-2020-kab-hai-and-its-affects-6424910/

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