ज्योतिष का ये है सबसे रहस्यमयी ग्रह: जो राजनीति से लेकर प्रेम तक के मामले में बनाता है अलग अलग हालात

ज्योतिष के अनुसार कुंडली में सभी नौ ग्रह मानव जीवन को दिशा देने में अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं, समय-समय पर सभी की दशा, महादशा, अंतर्दशा चलती रहती है। लेकिन इनमें से कुछ ग्रह ऐसे भी हैं जिनका नाम ही भयभीत कर देता है। ऐसा नहीं है कि हर शुभ ग्रह हर कुंडली में शुभ ही फल दे, दरअसल ये निर्भर करता है कि वो कहां बैठा है,कितनी डिग्री यानि ताकत लिए है और किन ग्रहों की दृष्टि में हैं। यानि कई बार शुभ ग्रह भी अशुभ अवस्था में बैठकर आपको परेशान कर सकते हैं।

लेकिन इनके अलावा कुछ ऐसे भी ग्रह हैं तो शुभ स्थिति में बैठे हों, उसके बावजूद उनका नाम आते ही मन में भय की आ जाता है। वहीं ये ग्रह जब अशुभ स्थिति में हो तो सर्वनाश तक की स्थिति पैदा कर देते हैं।

ज्योतिष के जानकारों के अनुसार एक ओर जहां कुछ ग्रह अपने शुभ फल देने के लिए जाने जाते हैं वहीं शनि, राहु और केतु कुछ ऐसे ग्रह हैं जिनकी बैठकी अगर सही ना हो तो ये समस्या का बड़ा कारण बन सकते हैं, वहीं इन ग्रहों का ज्योतिष में दुख का कारक भी माना गया है। इनमें शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है, वे हमारे कर्मों के अनुसार ही हमें दंड देते हैं।

लेकिन जब राहु की बात आती है, तो यह एक ऐसा ग्रह हैं जो हमसे स्वयं कर्म भी करवाता है और फिर उन्हीं कर्मों के आधार पर हमें दंड भी देता है। राहु को आकस्मिक ग्रह करार दिया गया है, इसके पीछे कारण यह है कि अपनी दशा के किस पड़ाव पर आकर यह अपना प्रभाव दर्शाएता है, जिससे इस बात को समझना बहुत मुश्किल हो जाता है।

इसलिए जहां बाकी ग्रहों के लिए किए जाने वाले उपचार निर्धारित समय पर शुरू होते हैं, वहीं राहु एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसके लिए उपचार उसकी दशा आने से कुछ समय पहले ही शुरू कर देने चाहिए, ताकि जब उसकी दशा आए तो वह उतना तीव्र ना हो जितना हो सकता है। इसके साथ ही जानकारों द्वारा राहु को लालच का नाम दिया गया है, जिस भी व्यक्ति की कुंडली में इसकी दशा शुरू होती है वह अपना अच्छा-बुरा कुछ नहीं समझ पाता। वह एक लालच का शिकार हो जाता है और उसे अपने स्वार्थ के अलावा और कुछ नजर नहीं आता।

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ज्योतिष विद्या के अंतर्गत राहु को "भ्रम" माना गया है। इसलिए जिस भी व्यक्ति की कुंडली में राहु की बैठकी अशुभ है और जब इसकी दशा चलती है तो वह बुरी लत का शिकार हो जाता है, उसका उठना-बैठना बुरे लोगों में होता है। उसकी अंतरआत्मा जानती है कि वह गलत कर रहा है, लेकिन फिर भी वह भ्रमित होकर वही कार्य करता रहता है। माना जाता है कि राहु भ्रम है इसलिए इसे ज्योतिष की भाषा में छाया ग्रह माना गया है। यूं तो राहु और केतु को समान संज्ञा दी गई है, लेकिन जहां केतु का परिणाम निश्चित होता है। वहीं राहु दुविधा, असमंजस और भ्रम फैलाता है।

छाया ग्रह राहु की विशेषताएं...
आमतौर पर प्रेम संबंधों के विषय में माना जाता है कि इनके लिए शुक्र ग्रह उत्तरदायी होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आपके पंचम या सप्तम भाव पर राहु की दृष्टि, बैठकी या किसी भी तरह का प्रभाव हो तो उस संबंध की नियति राहु द्वारा ही निर्धारित होती है।

राहु और प्रेम संबंध :
ऐसे प्रेम संबंध जब प्रेमी-प्रेमिका को समाज के डर से छिप-छिपकर मिलना पड़ता है राहु की ही देन है। इसके अलावा ऐसे विवाहित या प्रेम संबंध जो नुकसानदेह साबित हो सकते हैं, लेकिन फिर भी हम भ्रमित होकर उनके जाल में ना सिर्फ फंस जाते हैं, बल्कि उसे ही अपना जीवन मानने लगते हैं, यह सब भी राहु की दशा में ही होता है।

राहु एकतरफा प्रेम का भी रूप है। व्यक्ति एकतरफा प्रेम में तो पड़ जाता है लेकिन अपने दिल की बात बता नहीं पाता। वह सिर्फ तड़पता रहता है। झूठ, असत्य और पाखंड ओर से जुड़े प्रेम संबंधों का कारण भी राहु ग्रह ही है। राहु एक ऐसा झूठ माना गया है जो झूठ होते हुए भी सच लगता है। इंसान जानते हुए भी इसके जाल में फंसता चला जाता है। संबंधों में रहस्यों का मौजूद होना भी राहु की ही देन है। राहु ना सिर्फ इंसान को झूठ बोलना सिखाता है कि उस झूठ पर कायम रहना और दूसरों को अपने विश्वास में लेकर उन्हें धोखा देना भी सिखाता है।

राहु का कार्य सत्य को सामने ना आने देना है, ताकि व्यक्ति झूठ और रहस्य के जंजाल में ही फंसा रहे। वहीं केतु का कार्य झूठ का पर्दाफाश करना है इसलिए केतु की दशा में वे रहस्य और झूठ भी उजागर होते हैं, जिन्हें राहु छिपाकर रखना चाहता है।

केतु को दरार कहा गया है, यह संबंध को खत्म कर देता है। घर में भी अगर दरार पड़ जाए तो यह मान लेना चाहिए कि घर में केतु का प्रभाव है। घर का बंटवारा, संबंधों में दरार, यह सब केतु का काम है जबकि राहु किसी नतीजे तक नहीं पहुंचने देता, भ्रमित करके दुविधा में ही रखता है।

जिस भी व्यक्ति की कुंडली में राहु बलवान है तो वह छिपे रहस्यों की तह तक पहुंच पाने भी सफल हो जाता है। गुप्त बातों को जानने में आपको ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अगर आपके पीठ-पीछे बोलने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है, लोग आपसे बातें छिपाने लगे हैं तो यह सब राहु की वजह से ही होता है। जीवन में घटित होने वाली किसी भी आकस्मिक घटना के लिए राहु ही जिम्मेदार होता है।

आपसे कर्म करवाकर स्वयं देता है सजा..
राहु आपके मस्तिष्क में धोखा देने की प्रवृत्ति भी पैदा करता है और आपको इस धोखे के लिए पकड़वाता भी है। अगर आपका भाग्येश निर्बल है तो ऐसी स्थिति का सामना आपको बार-बार करना पड़ सकता है। राहु की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आपसे स्वयं कुकर्म करवाता है और फिर इन्हीं कुकर्मों की सजा आपको देता है। वहीं जानकारों का ये भी मानना है कि राहु की दशा में आपके साथ कब क्या हो जाएगा, यह स्वयं ज्योतिष के जानकार भी नहीं बता सकता। इसलिए पहले से ही सावधान रहने की जरूरत होती है।

राहु और राजनीति:
क्या आप जानते हैं कि राजनीति में जाने के लिए भी कुंडली में कुछ विशेष ग्रहों का प्रबल होना जरूरी है। राहु को राजनीति का ग्रह माना जाता है। यदि इसका दशम भाव से संबंध हो या यह स्वयं दशम में हो तो व्यक्ति धूर्त राजनीति करता है। अनेक तिकड़मों और विवादों में फंसकर भी अपना वर्चस्व कायम रखता है। राहु यदि उच्च का होकर लग्न से संबंध रखता हो तब भी व्यक्ति चालाक होता है।



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