क्या ग्रह आपको भी कर रहे हैं परेशान, तो ये चमत्कारी उपाय देगा राहत

मनुष्य के जीवन में ग्रहों का अत्यधिक प्रभाव होता है, भले ही कई लोग इसे सिरे से नकार देते हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो जैसे चंद्र धरती पर ज्वार भाटा जैसी स्थितियां उत्पन्न करता है। वैसे ही मानव को भी ग्रह अपनी शक्ति से प्रभावित करते है। ज्योतिष के जानकारों का तो यहां तक कहना है कि जैसे चंद्र अपने आकर्षण से पानी को ज्वार भाटे के रूप में उपर तक उठा लेता है, वैसे ही जब विज्ञान तक ये मानता है कि मानव शरीर में 75 प्रतिशत तक जल है, तो क्या वह मानव शरीर को भी अपने आकर्षण से प्रभावित नहीं करेगा।

वैदिक ज्योतिष में 9 ग्रह हैं, जिन्हें नवग्रह भी कहा जाता है। इसमें सूर्य और चंद्रमा को भी ग्रह माना जाता है। इसके अलावा मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि और राहु-केतु भी इनमें शामिल हैं। हालाँकि राहु और केतु ग्रह को छाया ग्रह कहा जाता है। इन ग्रहों की अपनी एक अलग प्रकृति और अपना भिन्न स्वभाव होता है। अपनी विशेषता के कारण इनमें से कुछ ग्रह शुभ तो कुछ क्रूर ग्रह होते हैं। हालाँकि केवल बुध एक ऐसा ग्रह है जो तटस्थ ग्रह की श्रेणी में आता है।

ज्योतिष के जानकार सुनील शर्मा का कहना है कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हम सभी के जीवन की घटनाएं ग्रहों के द्वारा संचालित होती हैं। जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव और बदलती घटनाएं इस बात का प्रमाण होती हैं कि हम सोचते कुछ हैं और होता कुछ दूसरा ही है। इसका अर्थ यह है कि एक ऊपरी शक्ति है जो हम सभी के जीवन को नियंत्रित करती है। ऐसे में ग्रहों की दशाएं हमें प्रभावित करती है।

वहीं जीवन में हमारे ग्रहों की सटीक स्थिति का वर्णन हमें जन्मकुंडली में देखने को मिल जाता ह।, बशर्ते समय व जो जानकारी मांगी गई है वह सटीक हो। पंडित शर्मा के अनुसार सभी ग्रहों की स्थिति हमारे लिए अच्छी हो ऐसी संभावना नहीं होती हैं। यही वजह है कि सभी को जीवन में कोई न कोई दुख अवश्य होता है। वहीं इन दुखों, परेशानियों और दिक्कतों को दूर करने के लिए ज्योतिषीय उपायों का सहारा लिया जाता है, साथ ही अधिकांश देखने को भी मिलता है कि इन उपायों से दुखों में कमी आती है, जिससे राहत मिलती है।

MUST READ : पुनर्जन्म - इन लोगों में दिखते हैं कुछ विशेष गुण, जानें कौन हैं ये और कहा से आए हैं

photo_2.jpg

इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वैदिक ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार शुभ ग्रहों के रत्न पहने जाते हैं, अशुभ ग्रहों की अशुभता में कमी करने के लिए पूजन, मंत्र, व्रत, हवन और रुद्राक्ष धारण किया जाता है। अधिक अशुभता होने पर संबंधित वस्तुओं के दान किए जाते हैं।

ऐसे समझें ग्रहों को... know your astrological planets

सूर्य ग्रह: कुंडली में ये आत्मा का कारक ग्रह माना गया है। वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ऊर्जा, पराक्रम, आत्मा, अहं, यश, सम्मान, पिता और राजा का कारक माना गया है। मान्यता के अनुसार सूर्य ग्रह की शुभता प्राप्ति के लिए नित्य प्रात: सूर्योदय के बाद आदित्य हृदय स्रोत का पाठ करें। पिता की सेवा, सूर्य देव को जल में रोली और लाल रंग के फूल डाल कर अघ्र्य देना शुभ रहता है। इसके अतिरिक्त स्वर्ण-ताम्र, चीनी-गुड़ का दान करने से सूर्य ग्रह प्रसन्न होते हैं। बुजुर्गों और पिता तुल्य व्यक्तियों का सम्मान करें।

चंद्र ग्रह: कुंडली में ये मन का कारक ग्रह माना गया है। नवग्रहों में चंद्रमा को मन, माता, धन, यात्रा और जल का कारक माना गया है। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा जन्म के समय जिस राशि में स्थित होता है वह जातक की चंद्र राशि कहलाती है।मान्यता के अनुसार चंद्र ग्रह की अनुकूलता के लिए भगवान शिव का मंत्र 'नम: शिवाय' का जाप करें। जट्टा वाला नारियल, सफेद, चंदन, बिल्वपत्र तथा सफेद मिठाई का भोग लगाने से शंकर भगवान प्रसन्न होते हैं। चंद्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए सोमवार के व्रत का पालन करें, सफेद वस्त्र पहनें और माता का आशीर्वाद लें।

मंगल ग्रह : कुंडली में ये पराक्रम का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिष विज्ञान में मंगल को शक्ति, पराक्रम, साहस, सेना, क्रोध, उत्तेजना, छोटे भाई, एवं शस्त्र का कारक माना जाता है। इसके अलावा यह युद्ध, शत्रु, भूमि, अचल संपत्ति, पुलिस आदि का भी कारक होता है। गरुण पुराण के अनुसार मनुष्य के नेत्रों में मंगल ग्रह का वास होता है। मान्यता के अनुसार इस ग्रह के लिए राम भक्त हनुमान जी का पूजन चमेली के तेल, केसरी, सिंदूर और शुद्ध घी से पूजन करें। छोटे भाइयों से रिश्ते अच्छे रखें।

बुध ग्रह: कुंडली में ये बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है। वैदिक ज्योतिष में बुध को बुद्धि, तर्क, गणित, संचार, चतुरता, मामा और मित्र का कारक माना गया है। बुध एक तटस्थ ग्रह है। इसलिए यह जिस भी ग्रह की संगति में आता है उसी के अनुसार जातक को इसके परिणाम प्राप्त होते हैं। मान्यता के अनुसार श्री गणेश जी का पूजन अर्चन करने से बुध ग्रह की अशुभता में कमी होती है। हरे रंग के धान्य पक्षियों को डालें। हरे रंग की सब्जियों व फलों को जरूरतमंदों को दान करें। संभव हो तो तोता पालें। बुधवार का व्रत का पालन करें। छोटी कन्याओं की सेवा करें, आशीर्वाद लें।

बृहस्पति ग्रह: कुंडली में ये विद्या का कारक ग्रह माना गया है। इन्हें देवताओं का गुरु यानि देवगुरु भी माना गया है। गुरु को शिक्षा, अध्यापक, धर्म, बड़े भाई, दान, परोपकार, संतान आदि का कारक माना जाता है। मान्यता के अनुसार बुजुर्गों की सेवा एवं ब्राह्मणों की सेवा करने से बृहस्पति ग्रह की अशुभता दूर होती है। किसी धर्म स्थल में धार्मिक पुस्तकें दान करें। चने की दाल व केसर का दान किसी जरूरतमंद को करें। साथ ही केसर का तिलक माथे पर लगाएं। कुल पुरोहित का सम्मान करें।

शुक्र ग्रह: कुंडली में ये भाग्य का कारक ग्रह माना गया है। यह विवाह, प्रेम, सौन्दर्य, रोमांस, काम वासना, विलासिता, भौतिक सुख-सुविधा, पति-पत्नी, संगीत, कला, फ़ैशन, डिज़ाइन आदि का कारक होता है। विशेष रूप से पुरुषों की कुंडली में शुक्र को वीर्य का कारक माना गया है। मान्यता के अनुसार इस ग्रह की अशुभता प्राप्त हो रही हो तो महालक्ष्मी के मंत्र का पाठ करें। साफ वस्त्र पहनें। जीवन साथी का सम्मान करें। गौ माता की सेवा और पूजन करने से भी शुक्र ग्रह की शुभता बढ़ती है। किसी गौशाला में चारा दान करें और भीगी हुई चने की दाल गायों को खिलाएं। कन्याओं को खीर खिलाएं।

शनि ग्रह: इसे न्याय का कारक भी माना गया है, न्याय में दंड के विधान के चलते ही इसे कुंडली में दुख का कारक ग्रह भी माना गया है। शनि पापी ग्रह है और इसकी चाल सबसे धीमी है। अतः सभी ग्रहों में से इसके गोचर की अवधि बड़ी होती है। मान्यता के अनुसार ग्रह के लिए भगवान शनि देव का मंत्र जाप और पूजन करें। पीपल के पेड़ को प्रात: जल दें और सायंकाल में सरसों के तेल का दीपक जलाएं। किसी जरूरतमंद को काली उड़द की दाल दान करें। शनिवार के व्रत का पालन करें। जहां तक संभव हो ताऊ और चाचा से रिश्ते मधुर बनाए रखें। शनि देव का अभिषेक सरसों के तेल से करें।

राहू : यह एक छाया ग्रह है, जिसे कुंडली में दुख का कारक माना गया है। ज्योतिष में राहु कठोर वाणी, जुआ, यात्राएं, चोरी, दुष्टता, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राएँ आदि का कारक होता है। राहु के संबंध में मान्यता है कि ये भगवान भैरो जी के दर्शन और पूजन करने से प्रसन्न होता हैं। देवी सरस्वती जी के मंत्र जाप से भी राहू ग्रह की अशुभता में कमी होती है। खराब बिजली का सामान घर में न रखें। नाना जी से संबंध बेहतर रखें।

केतु : यह एक छाया ग्रह है, इसे भी कुंडली में दुख का कारक माना गया है। ज्योतिष में इसे किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार केतु को तंत्र-मंत्र, मोक्ष, जादू, टोना, घाव, ज्वर और पीड़ा का कारक माना गया है। केतु के संबंध में मान्यता है कि केतु नाग पूजा से प्रसन्न होता है, वहीं कुछ जानकारों के अनुसार यह श्री गणेश जी का पूजन करने से भी प्रसन्न होता हैं। शनिवार के दिन कुत्तों को तेल लगी रोटी खिलाना शुभफलदायक है। किसी धर्मस्थल पर ध्वजा फहराएं।

हिन्दू ज्योतिष के मुताबिक ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। इसे उस व्यक्ति की जन्म कुण्डली से भली प्रकार से समझा जा सकता है। ज्योतिष में नवग्रह कुंडली के 12 भावों के कारक होते हैं। ऐसे समझें...

ग्रह : भाव कारकत्व
सूर्य : प्रथम, नवम, दशम
चंद्रमा : चतुर्थ
मंगल : तृतीय, षष्टम
बुध : चतुर्थ, दशम
बृहस्पति : द्वितीय, पंचम, नवम, दशम, एकादश
शुक्र : सप्तम, द्वादश
शनि : षष्टम, अष्टम, दशम


इन ग्रहों की नीच और उच्च राशि भी होती है। ऐसे जानें -
ग्रह : स्वामित्व राशि : उच्च राशि : नीच राशि
सूर्य : सिंह : मेष : तुला
चंद्रमा : कर्क : वृषभ : वृश्चिक
मंगल : मेष, वृश्चिक : मकर : कर्क
बुध : मिथुन, कन्या : कन्या : मीन
गुरु : धनु, मीन : कर्क : मकर
शुक्र : वृषभ, तुला : मीन : कन्या
शनि : मकर, कुंभ : तुला : मेष
राहु : - : मिथुन : धनु
केतु : - : धनु : मिथुन



source https://www.patrika.com/religion-and-spirituality/miraculous-way-to-please-astrological-planets-6413420/

Comments