बारिश के नक्षत्र की बड़ी चेतावनी, जानें इस वर्ष 2020 में कब तक होगी वर्षा

इस साल यानि 2020 में शनि के जल तत्व की राशि मकर और मंगल के जलतत्व की राशि मीन में वक्री होने से सामान्य से कुछ अधिक वर्षा होने की संभावनाएं काफी समय से लगाई जा रही हैं। इस संबंध में ज्योतिष के जानकार पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि वर्षा का ज्ञान प्राप्त करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में वायुमंडल का विचार किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्व तथा उत्तर की वायु चले तो वर्षा शीघ्र होती है। वायव्य दिशा की वायु के कारण तूफानी वर्षा होती है। ईशानकोण की चलने वाली वायु वर्षा के साथ-साथ मानव हृदय को प्रसन्न करती है।

वर्तमान में भले ही मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब कुछ दिनों का बचा है, लेकिन ज्योतिष के मुताबिक, अभी बारिश के नक्षत्र हैं। इस संबंध में ज्योतिष के जानकार वीडी श्रीवास्तव के अनुसार, वर्षा का योग अभी पूरे पुरुषोत्तम मास में यानि 16 अक्टूबर तक तो है ही वहीं इसके बाद तक बारिश के नक्षत्र हैं और इसमें अंतिम स्वाति का आरंभ ही 24 अक्टूबर से हो रहा है। इनमें अभी खंड वृष्टि के साथ सामान्य वृष्टि दर्शाई गई है।

वहीं कुछ जानकारों के अनुसार इस साल यानि 2020 में अभी जो संकेत मिल रहे हैं उनके अनुसार अक्टूबर मे 13 व 19 से 30 तक खण्डवृष्टि हो सकती है। जबकि नवंबर में 02 से 04 नवंबर, 17 से 19 नवंबर एवं 20 से 30 नवंबर तक देश के कई हिस्सों में प्रकृति प्रकोप से जन हानि हो सकती है। इसके अलावा दिसंबर में 04 से 05 दिसंबर, 11 से 14, 24 से 26 एवं 29 से 31 दिसंबर तक देश के कई हिस्सों में खण्डवृष्टि, शीतलहर चल सकती है।

पंडित शर्मा के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में ऋतु चक्र के प्रवर्तक भगवान सूर्य माने जाते हैं। यही कारण है कि वर्षा ऋतु की शुरुआत भगवान सूर्यदेव के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू होती है। जबकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, आमतौर पर 21-22 जून को किसी भी समय भगवान भास्कर इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और वर्षारंभ होता है और स्वाति नक्षत्र पर्यंत चलता है। इस दौरान सूर्यदेव कुल 10 वर्षा नक्षत्रों से गुजरते हैं।

ऐसे में इस साल आद्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश 22 जून को दिन में 7 बजकर 11 मिनट पर हुआ था। जबकि उत्तरा फाल्गुनी में सूर्य का प्रवेश 13-14 सितंबर की रात 12 बजकर 51 मिनट पर हुआ और 27 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर वे हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर गए थे। जबकि आज यानि 11 अक्टूबर की प्रात:काल में 04 बजकर 05 मिनट पर सूर्यदेव का चित्रा नक्षत्र में प्रवेश हुआ और अब वे 24 अक्टूबर को सुबह में 10 बजकर 34 मिनट पर स्वाति नक्षत्र में जाएंगे।

वैसे तो चित्रा नक्षत्र तक ही वर्षा अधिक होती है और स्वाति में बारिश का असर कम देखने को मिलता है, लेकिन हल्की फुल्की बारिश इस समय भी होती है। ऐसे में 10 अक्टूबर तक वृष्टि के योग के बाद चित्रा के सूर्य से और अन्य ग्रह स्थितियों के प्रभाव से वातावरण सामान्य हो जाएगा, लेकिन इसके बावजूद कहीं कहीं खंड और अल्पवृष्टि का योग बना रहेगा, जिसके लंबे समय तक चलने की संभावना है ।



source https://www.patrika.com/religion-news/continue-raining-predicted-by-astrologer-in-2020-after-adhik-maas-6452803/

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