जो दुखद घटनाएं घट चुकी है, उन्हें बदला नहीं जा सकता, दुख के समय नकारात्मक बातों को नहीं अच्छी बातों को याद करने से मन शांत हो सकता है

दुख देने वाली पुरानी बातों के बारे में सोचते रहने से हमारा वर्तमान खराब होता है। मन अशांत रहता है। अशांत मन से किए गए कामों में सफलता नहीं मिलती है, जिससे भविष्य भी बिगड़ सकता है। इसीलिए बीते समय की नकारात्मक बातों को नहीं, अच्छी बातों के बारे में सोचना चाहिए, इससे मन शांत होता है। ये बात एक लोक कथा से समझ सकते हैं।

लोक कथा के अनुसार पुराने समय में एक आश्रम में संत अपने कुछ शिष्यों के साथ रहते थे। उनका एक शिष्य घर से लौटकर आया तो वह उदास रहने लगा। पढ़ाई के अलावा आश्रम के अन्य दैनिक कामों में भी उसका मन नहीं लगता था। संत ने कुछ दिनों तक तो उससे कुछ नहीं कहा, लेकिन जब उसके व्यवहार में बदलाव नहीं आया तो एक दिन संत ने शिष्य को अपनी कुटिया में बुलाया।

शिष्य कुटिया में पहुंचा तो संत ने उससे दुखी रहने का कारण पूछा। शिष्य ने बताया कि बीते समय में परिवार को कई दुखों का सामना करना पड़ा है। पारिवारिक स्थितियां बहुत बिगड़ गई थीं। अब धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं, लेकिन पुरानी बातों को याद करके मेरा मन दुखी रहता है।

संत ने तुम बैठो, मैं तुम्हारे लिए नींबू शरबत बनाकर लाता हूं। संत ने नींबू शरबत बनाया और उसमें जानबूझकर शकर कम और नमक ज्यादा डाल दिया। संत ने शिष्य को पीने के लिए शरबत दिया। शिष्य ने जैसे ही शरबत का पहला घूंट पिया तो उसने अजीब सा मुंह बना लिया।

संत ने उससे कहा कि क्या शरबत अच्छा नहीं है? शिष्य बोला कि गुरुजी इसमें नमक ज्यादा हो गया है।

संत बोले कि ठीक है, इसे फेंक दो, मैं दूसरा शरबत बना देता हूं। शिष्य ने कहा कि नहीं गुरुजी, इसे फेंकने की जरूरत नहीं है। इसमें नमक ज्यादा है तो इसमें थोड़ी और शकर मिला देते है, जिससे इसका खारापन कम हो जाएगा।

ये बात सुनते ही गुरु ने कहा कि मैं तुमसे यही जवाब सुनना चाहता था। इस शरबत में ज्यादा नमक हमारे जीवन के दुखों की तरह ही है। जब हमारे जीवन में दुख देने वाली घटनाएं घटित होती हैं तो हम उन्हें बदल नहीं सकते हैं। जैसे इस शरबत मिला हुआ ज्यादा नमक हम निकाल नहीं सकते। इस नमक का खारापन कम करने के लिए हमें इसमें शकर की मिठास घोलना होगी। जिससे ये शरबत पीने योग्य हो जाएगा।

ठीक इसी तरह हमें भी बीते समय की नकारात्मक बातों को याद करके वर्तमान को खराब नहीं करना चाहिए। हमें सकारात्मक बातें सोचना चाहिए, जिससे हमारा दुख कम हो सके। सकारात्मक और अच्छी बातों से ही बीते समय के दुख का प्रभाव कम किया जा सकता है।



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