Dussehra 2020: भारत के इन 7 जगहों पर रावण का दहन करने की बजाय होती है पूरी श्रद्धा और आस्था से पूजा, नहीं फूंके जाते पुतले

नई दिल्ली। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व (Vijayadashami 2020) विजय दशमी पर्व शारदीय नवरात्रि में पूजा के साथ प्रारम्भ हो कर दशमी तक मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की आज के ही दिन अयोध्या वापसी हुई थी।इस अवसर पर देशभर में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। पर देश में कई स्थान ऐसे भी हैं जहां रावण (Ravan temples in india) को जलाया नहीं जाता है, रावण की पूजा की जाती है। यह सुन कर आपको हैरानी हो सकती है, पर आइये जानते हैं इसकी वजह क्या है।

सबसे पहले बात करते हैं दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव की, यहां रावण का मंदिर स्थित है और लोग रावण का दहन करने की बजाय पूरी श्रद्धा और आस्था से रावण की पूजा आराधना करते हैं। यहां की मान्यता है कि बिसरख गांव में रावण का ननिहाल था।

बात करते है मध्यप्रदेश के मंदसौर की, जानकार इसका असली नाम दशपुर बताते हैं, ऐसी मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का यहीं मायका था। इसी लिहाज से मंदसौर में रावण की ससुराल थी। और इसी मान्यता के हिसाब से रावण के पुतले का दहन करने की बजाय यहां रावण की पूजा होती है।

मध्य प्रदेश में ही एक गांव है जिसका नाम है रावनग्राम। यहां भी रावण के पुतले का दहन नहीं होता है। रावनग्राम में लोग रावण के पुतले का दहन करने की जगह भगवान की तरह पूजते हैं। रावनग्राम में रावण की एक विशाल मूर्ति भी है जिसकी रोज पूजा होती है।

राजस्थान का जोधपुर भी देशभर में रावण के मंदिर और पूजा के लिए मशहूर है। यहां समाज विशेष के लोग रावण की पूजा करते हैं यहां के लोग खुद को रावण का वंशज बताते हैं, इसी वजह से दशहरे पर जहां देशभर में रावण का दहन होता है लेकिन यहां रावण की पूजा होती है।

देश के दक्षिणी हिस्से यानी आंध्रप्रदेश के काकिनाड में भी रावण की पूजा-आराधना होती है और यहां रावण का भव्य मंदिर बना हुआ है। प्राचीन मान्यता के मुताबिक यहां के निवासी भगवान राम को आराध्य मानने से इनकार करते हैं, और रावण को ही शक्ति संपन्न मानते हैं। यहां के मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा करने का विधान है।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक कस्बा है जहाँ रावण की पूजा होती है। इसके पीछे मान्यता यह है कि रावण ने इसी स्थान पर बैठकर भगवान शिव की पूजा और तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दशानन को मोक्ष का वरदान दिया था। यहां यह भी माना जाता है कि अगर किसी ने रावण का दहन किया तो उसकी मृत्यु हो सकती है।

अब बात करते हैं अमरावती के गढ़चिरौली की यहां का आदिवासी समाज रावण को पूजता है। ऐसी मान्यता है कि उस समुदाय के लोग रावण और उसके पुत्र को अपना देवता मानते हैं।



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