Sharad Purnima 2020: कब है शरद पूर्णिमा? जानें किस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से मिलेगा इसका अद्भुत फल

नई दिल्ली। हमारे भारत में Sharad Purnima 2020 शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) का महत्व हिन्‍दू धर्म में विशेष है। क्योंकि इस दिन आसमान से अमृत बरसता है, जो हमारे जीवन को सुख शांति प्रदान करने वाला होता है। कहा जाता है कि इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं को जोड़कर धरती पर अमृत की वर्षा करता है। ये 10 कालाए मनुष्यों कें अंदर भी पाई जाती है लेकिन यह उन लोगों के अंदर होती है जो सर्वोत्तम पुरुष होते है और यह सभी कलाए भगवान श्रीकृष्‍ण के अंदर मौजूद थीं। यहां तक कि भगवान राम के पास भी 12 कलाएं थीं। कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्‍ण ने 16 कलाओं के साथ जन्‍म लिया था, इसलिए शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा के साथ माता लक्ष्‍मी (Laxmi Puja) और विष्‍णु जी की पूजा का विधान है।

शरद पूर्णिमा के व्रत को पूरे विधि विधान के साथ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस पर्व को कोजागरी पूर्णिमा (Kojagiri or Kojagara Purnima) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूजा के लिए खीर (Sharad Purnima Kheer) बनाई जाती है जिसे शरद पूर्णिमा की रात इस खीर को खुले आकाश के नीचे रखा जाता है। फिर 12 बजे के बाद उसका प्रसाद गहण किया जाता है। कहा जाता है कि इस खीर में ऐसे गुए समाहित हो जाते है कि यह कई रोगों को दूर करने की शक्ति रखता है।

शरद पूर्णिमा कब है?
अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस बार शरद पूर्णिमा 30 अक्‍टूबर 2020 को है.

शरद पूर्णिमा का दिन और शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा 30 अक्‍टूबर 2020 शुक्रवार को पड़ने वाली है। जिसका शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 45 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।

शरद पूर्णिमा का महत्व
अमृत का रस बरसाने वाली शरद पूर्णिमा को 'कोजागर पूर्णिमा' (Kojagara Purnima) और 'रास पूर्णिमा' (Raas Purnima) के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाए ही रखती है। जिससे उनके घर खुशहाल बना रहता है। उन्‍हें संतान की प्राप्‍ति होती है। इस व्रत को कुंवारी कन्‍याएं भी रख सकती है। इससे उन्‍हें मनचाहा पति मिलता है। शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से अमृत बरसता है। माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा के प्रकाश में औषधिय गुण मौजूद रहते हैं जिनमें कई असाध्‍य रोगों को दूर करने की शक्ति होती है।

शरद पूर्णिमा की पूजा विधि
- शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर स्‍नान करके साफ सुधरे कपड़े पहनना चाहिए। इसके बाद
- घर के मंदिर में जाकर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करें।घी का दीपक जलाकर
धूप-बत्ती से आरती उतारें। संध्‍या के समय लक्ष्‍मी जी की पूजा करें और आरती उतारें। चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर प्रसाद चढ़ाएं किसी किसी जगह इस दिन खोवा के लड्डू चढ़ाए चढ़ाए जाते है। इसके बा खीर रखी जाती है। रात 12 बजे के बाद इस खीर को उठाकर प्रसाद के रूप में घर के सदस्यों के बीच बांट दिया जाता है।

चंद्रमा को अर्घ्‍य देते समय इस मंत्र का उच्‍चारण करें
ॐ चं चंद्रमस्यै नम:
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।
नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।।
ॐ श्रां श्रीं

 



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