Sharad Purnima 2020: शरद पूर्णिमा की खीर में कैसे मिल जाते औषधीय गुण, रोगी की इम्यून सिस्टम को करती है मजबूत

नई दिल्ली। Sharad Purnima 2020: हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है जो हर वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को यह पर्व मनाया जाता हैं। इस वर्ष शरद पूर्णिमा आज के दिन शुक्रवार को 30 अक्टूबर को मनाई जा रही है। शरद पूर्णिमा के दिन चांद के साथ देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इस दिन को कोजागरी पूर्णिमा या कोजागरी लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है।

ज्योतिषाचार्यो के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात हमारेलिए कई तरह से फायदेमंद हैं। इस रात को चंद्रमा की रोशनी रोज से काफी अलग होती है। क्योंकि शरद पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और अपनी चांदनी में अमृत बरसाता है। और यही गुण पूजा के दौरान रखी गई खीर में समाहित होते है और खीर को भी अमृत बना देते है।

जब लोग सुबह उठकर नहा धोकर इस प्रसाद को ग्रहणकरते है तो उनके शरीर में कई तरह के परिवर्तन देखने को मिलते है। इस खीर को खाने से कई तरह के रोग दूर हो जाते है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। पेट और आंख संबंधी समस्याएं भी दूर होती है। इसलिए अमृत रस को समेटने के लिए ही शरद पूर्णिमा का दिन रात को खीर बनाकर चंद्रमा की चांदनी में रखी जाती है। और सुबह उठकर लोग स्नान करके इसे प्रसाद के रूप में गर्हण करनेके बाद निरोग हो जाते है।

पौराणिक मान्यता है कि चन्द्रमा की रोशनी में रखी गई खीर में अमृत का अंश होता है, क्योंकि चांद की रोशनी में औषधीय गुण होते हैं जिसमें कई असाध्य रोगों को दूर करने की क्षमता होती है जो आरोग्य सुख प्रदान करता है। इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की प्राप्ति के लिए शरद पूर्णिमा के दिन खीर जरूर बनानी चाहिए और रात में इस खीर को खुले आसमान के नीचे जरूर रखना चाहिए।

कहते हैं कि इसी रात को देवी लक्ष्मी सागर मंथन से प्रगट हुईं थी। इसलिए अपने जन्मदिन के अवसर पर देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आती हैं। इसलिए जो इस रात देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन पर देवी की असीम कृपा होती है। इस रात देवी लक्ष्मी की पूजा कौड़ी से करना बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है।



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