यमराज के साथ ही श्रीकृष्ण और राजाबलि से भी जुड़ा है ये पर्व, औषधि स्नान का भी महत्व है

दीपावली से ठीक एक दिन पहले रूप चौदस का त्योहार मनाया जाता है। इसे नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली भी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन यमराज को प्रणाम कर के दीपक जलाने से तमाम तरह की परेशानियों और पापों से मुक्ति मिल जाती है। दिवाली से पहले रूप चौदस के दिन यम के लिए दीपक जलाते हैं। ये पर्व नरकासुर और राजाबलि से भी जुड़ा हुआ है। इस बार यह पर्व 13 नवंबर को मनाया जाएगा। पुराणों के मुताबिक इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर उबटन, तेल आदि लगाकर स्नान करना चाहिए।

उबटन और औषधि स्नान
रूप चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल या सरसों के तेल की मालिश करनी चाहिए। औषधियों से बनाया हुआ उबटन लगाना चाहिए। इसके बाद पानी में दो बूंद गंगाजल और अपामार्ग यानी चिरचिटा के पत्ते डालकर नहाना चाहिए। फिर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण के दर्शन करने चाहिए। ऐसा करने से उम्र बढ़ती है पाप खत्म होते हैं और सौंदर्य भी बढ़ता है।

नरकासुर का वध
विष्णु पुराण में नरकासुर वध की कथा है। द्वापर युग में भूमि देवी ने एक क्रूर पुत्र को जन्म दिया। असुर होने से उसका नाम नरकासुर पड़ा। वो प्रागज्योतिषपुर का राजा बना। उसने देवताओं और इंसानों को बहुत परेशान किया। सोलह हजार अप्सराओं को नरकासुर ने कैद किया था। फिर इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान कृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर की नगरी पर आक्रमण किया।
युद्ध में उन्होंने मुर, हयग्रीव और पंचजन आदि राक्षसों को मारा तो नरकासुर ने हाथी का रूप लेकर आक्रमण किया। कार्तिक महीने की चतुर्दशी तिथि पर श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर दिया। इसके बाद अप्सराओं और अन्य लोगों को कैद से छुड़ाया। इसलिए भी यह त्योहार मनाया जाता है। इसलिए इस त्योहार का नाम नरक चौदस पड़ा।

वामन अवतार और राजा बलि की कथा
राजा बलि पराक्रमी और महादानी था। देवराज इंद्र उससे डरते थे। उन्हें डर था कि कहीं वो उनका राज्य न ले ले। इसलिए उन्होंने अपनी रक्षा के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वामन रूप लेकर राजा बलि से तीन पग धरती मांग ली और उसे पाताल का राजा बना कर पाताल भेज दिया।

  • दक्षिण भारत में मान्यता है कि ओणम के दिन हर साल राजा बलि अपने पुराने राज्य को देखने आते हैं। विष्णु भगवान की पूजा के साथ-साथ राजा बलि की पूजा भी की जाती है। नरक चौदस के दिन दीपक जलाने से वामन भगवान खुश होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं।

यमराज की प्रार्थना का दिन
कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन अकाल मृत्यु से बचने और अच्छी सेहत के लिए यमराज की प्रार्थना की जाती है। यम, धर्मराज, मृत्यु, अन्तक, वैनस्वत, काल, सर्वभूतक्षय, औदुम्बर, दग्ध, नील, परमेष्ठी, वृकोदर, चित्र और चित्रगुप्त नाम से प्रणाम करना चाहिए। ऐसा करने से उम्र लंबी होती है।



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Narak Chaturdashi Information And Importance


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