भाई दूज पर बहन के घर भोजन करने की परंपरा, इससे भाई-बहन के बीच बना रहता है प्रेम

सोमवार, 16 नवंबर को दीपोत्सव का अंतिम दिन भाई दूज है। इस दिन भाई अपनी बहन के घर भोजन करता है। इस परंपरा से भाई-बहन के बीच प्रेम बना रहता है। मान्यता है कि इस दिन बहन अपने भाई की लंबी उम्र, सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य के लिए यमराज और चित्रगुप्त से प्रार्थना करती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार इस तिथि पर बहन के घर भोजन करने से भाई की उम्र बढ़ती है।

यमराज और यमुना से जुड़ी है कथा इस पर्व की कथा

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं। पुराने समय में इस तिथि पर यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था। यमुना के सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने वर दिया था कि जो व्यक्ति इस दिन यमुना में स्नान करेगा और यम पूजन करेगा, उसे सभी परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। इसी वजह से इस दिन यमुना में स्नान करने का विशेष महत्व है।

बहन को करनी चाहिए भाई के सौभाग्य की प्रार्थना

इस दिन बहन-भाई को यम और चित्रगुप्त की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। प्रार्थना करें कि मार्कण्डेय, हनुमान, बलि, परशुराम, व्यास, विभीषण, कृपाचार्य और अश्वत्थामा इन आठ चिरंजीवियों की तरह मेरे भाई को भी चिरंजीवी कर दें। इस तरह पूजा में बहन अपने भाई की लंबी उम्र और सौभाग्य प्रार्थना करती है।

पूजा के बाद बहन भाई को भोजन कराती हैं। तिलक लगाती हैं। भाई बहन को कोई उपहार देता है।

अगर यमुना नदी में स्नान करना संभव न हो तो अपने घर पर ही पानी में यमुना का जल मिलाएं और स्नान करें। यमुना नदी का जल न हो तो पवित्र नदी का ध्यान करते हुए स्नान करें। स्नान के बाद यमराज और यमुना की पूजा करें और मंत्र जाप करें। मंत्र जाप कम से कम 11, 21 या 108 बार करें।

यमराज का मंत्र - धर्मराज नमस्तुभ्यं नमस्ते यमुनाग्रज। पाहि मां किंकरैः सार्धं सूर्यपुत्र नमोऽस्तु ते।।

यमुना का मंत्र - यमस्वसर्नमस्तेऽसु यमुने लोकपूजिते। वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते।।

भाई दूज पर पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

सुबह 9 से 10.30 बजे तक शुभ

दोपहर 3 से 4.30 बजे तक लाभ

दोपहर 4.30 से शाम 6 बजे तक अमृत



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