इस मंदिर की हैं अनोखी प्रथा: शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ाने से सभी प्रकार के रोग होते है खत्म

नई दिल्ली। भगवान शिव पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा आदि चढ़ते हुए तो हम सभी ने देखा और सुना है। ये सभी चीजों चढ़ाने से भगवान प्रसंन्न होते है और अपने भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते है। आज आपको ऐसे अनोख शिव मंदिर के बारे में बताने जा रहे है। इस मंदिर में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को खुश करने के लिए झाडू अर्पित करते है। इसके पीछे ऐसी मान्यता चली आ रही है कि शिवलिंग पर झाडू चढ़ाने से त्वचा से संबंधित रोग दूर हो जाते हैं। हम बात कर रहे है उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद जिले में बीहाजोई गांव के प्राचीन पतालेश्वर शिव मंदिर की।

भक्तों की अनोखी श्रद्धा
संभल जिले के बीहाजोई में एक ऐसा शिव मंदिर है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए झाडू चढ़ाते हैं। इसके पीछे की कहानी बेहद रोचक हैं। यह अति प्राचीन पातालेश्वर मंदिर है जहाँ की परम्परा सबसे निराली है। इस प्राचीन पतालेश्वर शिव मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की अराधना करते हुए लोग उन्हें झाड़ू चढ़ाते हैं। इस मंदिर के प्रति भक्तों की अनोखी श्रद्धा है। यहां शिव को लोग दूध, जल और फल के साथ-साथ सीखों वाली झाड़ू उनके शिवलिंग पर अर्पित करते हैं।

 

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झाड़ू चढ़ाने से सभी प्रकार के रोग खत्म
ऐसी मान्यता है कि यहां मंदिर में शिवलिंग पर झाडू चढ़ाने से इंसान के बड़े से बड़े रोग दूर हो जाते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां जो भी रोगी आता है उसे झाड़ू लानी होती है। वह शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ा दे तो उसे सभी प्रकार के रोग खत्म हो जाते है। आम दिनों में भी यहां मंदिर श्रद्धालुओं से भरा रहता है।

 

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प्राचीन कथा
कहा जाता है यहाँ प्रचलित मान्यताओं के कारण ऐसा होता है। यहाँ के लोगों का कहना है सदियों पहले यहां एक भिखारी दास व्यापारी रहता था, जो बहुत धनवान था। मगर चर्म रोग से पीड़ित था। एक बार व्यापारी उपचार करवाने के लिए किसी वैद्य के पास जा रहा था। तभी अचानक से उन्हें बहुत तेज प्यास लगी, उन्हें एक आश्रम दिखाई दिया पानी पीने की इच्छा से वे उसके अंदर चले गए। लेकिन जाते-जाते भिखारीदास आश्रम में रखे एक झाड़ू से टकरा गए। झाड़ू के स्पर्श मात्र से ही उन्हें अपने सभी रोगों से मुक्ति मिल गई। कहा जाता है उस समय संत ने व्यापारी से शिव मंदिर बनवाने के लिए कहा और व्यपारी ने वही किया। उसी के बाद से मंदिर में झाड़ू चढ़ाने की परंपरा है।



source https://www.patrika.com/astrology-and-spirituality/charmagog-is-done-by-blowing-a-broom-on-shivling-6501028/

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