Diwali 2020 : दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश की साथ में क्यों होती है पूजा, यह है धार्मिक वजह

देशभर में हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा भी की जाती है। इसके लिए पूरे घर को रंगोली से सजाने की भी परंपरा है। दीपावली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के साथ धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। इनकी पूजा के बिना यह त्योहार अधूरा रहता है। हर कोई जानना चाहता है कि आखिर दीपावली पर मां लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा को अन्य देवताओं की अपेक्षा इतनी वरीयता क्यों दी जाती है। आज आपको इस बारे में बताने जा रहे है।

स्थिरलग्न में पूजन महूर्त
वृषभ-सायं 5:30 से 7:30 के मध्य
सिंह -रात 12:00 से 2:15 के मध्य

पूजन सामग्री-
रोली, मौली, पान, सुपारी, अक्षत, धूप, घी का दीपक, तेल का दीपक, खील, बताशे, श्रीयंत्र, शंख , घंटी, चंदन, जलपात्र, कलश, लक्ष्मी-गणेश-सरस्वतीजी का चित्र, पंचामृत, गंगाजल, सिन्दूर, नैवेद्य, इत्र, जनेऊ, कमल का पुष्प, वस्त्र, कुमकुम, पुष्पमाला, फल, कर्पूर, नारियल, इलायची, दूर्वा।


इस दिन मां लक्ष्मी का हुआ था जन्म
धार्मिक कथाओं के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का आगमन हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी का जन्म दिवस होता है। कुछ स्थानों पर इस दिन को देवी लक्ष्मी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। जीविद्यार्णव तंत्र में कालरात्रि को शक्ति रात्रि की संज्ञा दी गई है। कालरात्रि को शत्रु विनाशक माना गया है साथ ही शुभत्व का प्रतीक, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला भी माना गया है।


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भगवान गणेश बुद्धि के प्रतीक हैं
वहीं भगवान गणेश बुद्धि के प्रतीक हैं और मां लक्ष्मी धन-समृद्धि की। दिवाली पर घरों में इन मूर्तियों को स्थापित कर पूजन करने से धन और सद्बुद्धि दोनों प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मी जी को धन का प्रतीक माना गया है, जिसकी वजह से लक्ष्मी जी को इसका अभिमान हो जाता है। विष्णु जी इस अभिमान को खत्म करना चाहते थे इसलिए उन्होंने लक्ष्मी जी से कहा कि स्त्री तब तक पूर्ण नहीं होती है, जब तक वह मां न बन जाए। लक्ष्मी जी का कोई पुत्र नहीं था, इसलिए यह सुन के वह बहुत निराश हो गईं। तब वह देवी पार्वती के पास पहुंचीं।


बुद्धि के पास ही टिकती है मां लक्ष्मी
शास्त्रों के अनुसार, मान्यता है कि माता लक्ष्मी उसी के पास टिकती हैं, जिसके पास बुद्धि होती है। यही वजह है कि लक्ष्मी एवं गणपति की एक साथ पूजा का विधान है जिससे धन और बुद्धि एक साथ मिले। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार दीवाली सुख समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसलिए हर परिवार दिवाली की रात इसी कामना से लक्ष्मी पूजन करता है कि लक्ष्मी मां उस पर अपनी कृपा बनाए रखें।



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